
x
वायरल वीडियो पर दारेज़ गौर की सफाई
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की बस के सामने खड़ी होने वाली कंटेंट क्रिएटर दारेज़ गौर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उनका वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि उन्होंने मुंबई में चर्चा में आई रिया अहीर के बस रोकने वाले अंदाज को कॉपी किया। अब दारेज़ ने ट्रोलिंग पर जवाब देते हुए साफ कहा है कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।
वायरल वीडियो में दारेज़ दिल्ली पुलिस की उस बस के सामने खड़ी दिखाई देती हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ले जाया जा रहा था। उनके मुताबिक जब वह जंतर-मंतर पहुंचीं तो कई लोग बस को रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बस में बैठा रही थी। इसके बाद उन्होंने खुद बस के आगे खड़े होने का फैसला किया।
दारेज़ ने अपने वीडियो में दावा किया कि वह जानती थीं कि उनके पास कुछ ऐसा सामाजिक विशेषाधिकार है, जिसके कारण पुलिस उनके खिलाफ तुरंत बल प्रयोग करने से पहले सोचेगी। उनका कहना था कि इसी वजह से उन्होंने बस के सामने खड़े होकर उसे करीब 10 मिनट तक रोके रखा। यह उनका अपना दावा है और पुलिस की ओर से इस अवधि की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी तुलना रिया अहीर से होने लगी। रिया अहीर इससे पहले मुंबई में एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन के सामने खड़ी होकर चर्चा में आई थीं। दारेज़ पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने उसी तरह का दृश्य दोहराकर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश की।
इन आरोपों का जवाब देते हुए दारेज़ ने कहा कि वह इससे पहले भी करीब 30 बार जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो चुकी हैं, लेकिन पहली बार उनका कोई वीडियो इस स्तर पर वायरल हुआ है। उन्होंने ट्रोल करने वालों से कहा कि अगर सिर्फ बस के सामने खड़ा होना ही लोकप्रियता पाने का आसान तरीका है, तो वे भी ऐसा करके देखें।
दारेज़ ने अपने बयान में मतदान और शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि लोगों को केवल उनके वायरल वीडियो पर सवाल उठाने के बजाय उस मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए, जिसे लेकर प्रदर्शन हो रहा है। उन्होंने कहा कि उनके काम की आलोचना करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वह चाहती हैं कि सार्वजनिक संस्थाओं और सरकार से भी उतने ही सवाल पूछे जाएं।
उन्होंने आखिर में कहा कि उन्हें बस के सामने खड़े होने का कोई पछतावा नहीं है और अपने अधिकारों के लिए वह ऐसी स्थिति में दोबारा भी खड़ी हो सकती हैं। हालांकि सार्वजनिक रास्ता या पुलिस वाहन रोकने जैसी कार्रवाई के कानूनी पहलू परिस्थितियों और पुलिस आदेशों पर निर्भर करते हैं।
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विभिन्न संगठनों और विपक्षी दलों के प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR सहित चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने पक्षपात और अनियमितता के आरोपों से इनकार किया है।
इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। कुछ प्रदर्शनों को अनुमति नहीं मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
दारेज़ गौर का वीडियो अब इस पूरे राजनीतिक विरोध से अलग सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया है। एक पक्ष उनके कदम को विरोध की अभिव्यक्ति बता रहा है, जबकि आलोचक इसे वायरल होने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। दारेज़ ने हालांकि साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बावजूद वह अपने फैसले से पीछे नहीं हट रही हैं।
Next Story





