मनोरंजन

'नागजिला' के फंड विवाद पर कोर्ट सख्त, आरोपियों को झटका

Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 1:25 PM IST
नागजिला के फंड विवाद पर कोर्ट सख्त, आरोपियों को झटका
x
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन और फिल्म निर्माता करण जौहर की आगामी फिल्म 'नागजिला' रिलीज से पहले ही बड़े कानूनी विवाद में फंस गई है। फिल्म के निर्माण के लिए निर्धारित बजट से करीब 3.92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया है। इस मामले में मुंबई की डिंडोशी सेशंस कोर्ट ने तीन प्रोडक्शन अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री मौजूद है, जिससे मामले में उनकी कथित संलिप्तता के संकेत मिलते हैं। अदालत के अनुसार, वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इस फैसले के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तारी से मिली संभावित सुरक्षा नहीं मिल सकी है। हालांकि, अदालत ने अभी उन्हें दोषी नहीं ठहराया है।
कोर्ट ने तीनों अधिकारियों को नहीं दी राहत
मुंबई की डिंडोशी सेशंस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम. मोहिउद्दीन ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें खारिज कर दिया।आरोपियों में 47 वर्षीय कुलदीप सिंह चंपावत, 42 वर्षीय महिपाल करण राठौड़ और 45 वर्षीय शिवकुमार तिवारी शामिल हैं।कुलदीप सिंह चंपावत फिल्म निर्माण से जुड़े कंसल्टेंट और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे। महिपाल करण राठौड़ सर्विस प्रोवाइडर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़े थे, जबकि शिवकुमार तिवारी लाइन प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और बड़ी रकम से जुड़े वित्तीय लेनदेन को देखते हुए विस्तृत जांच जरूरी है। कोर्ट ने साक्ष्यों से संभावित छेड़छाड़ की आशंका का भी उल्लेख किया।
₹82.50 करोड़ के बजट में बनी फिल्म
जानकारी के अनुसार, 'नागजिला' का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस और महावीर जैन फिल्म्स मिलकर कर रहे हैं। फिल्म के निर्माण को लेकर दोनों कंपनियों के बीच 30 अक्टूबर 2025 को समझौता हुआ था।
इस समझौते के तहत फिल्म का कुल बजट 82 करोड़ 50 लाख रुपये निर्धारित किया गया था। फिल्म निर्माण के वित्तीय लेनदेन के लिए अलग बैंक खाता भी खोला गया था।महावीर जैन फिल्म्स के अकाउंटेंट तुकाराम महादेव सावंत ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत के अनुसार, कुलदीप सिंह चंपावत ने फिल्म के प्रोडक्शन से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभालने के लिए संपर्क किया था। इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदार महिपाल करण राठौड़ का नाम सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर सुझाया।बाद में शिवकुमार तिवारी को लाइन प्रोड्यूसर नियुक्त किया गया। उनकी जिम्मेदारी वाहनों, मेकअप आर्टिस्ट और जूनियर कलाकारों के लिए वेंडरों की व्यवस्था करना थी।
बिना बिल और वाउचर के खर्च किए ₹3.92 करोड़!
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से कंपनी की निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।आरोप है कि फिल्म निर्माण के दौरान 3 करोड़ 92 लाख 76 हजार 308 रुपये का खर्च दिखाया गया, लेकिन इस राशि से संबंधित जरूरी बिल और वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए।शिकायतकर्ता का आरोप है कि इतने बड़े वित्तीय लेनदेन का उचित हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया।पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी को दरकिनार करके संदिग्ध भुगतान किए।इस मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, बिल और संबंधित भुगतान की जांच की जा रही है।
85 हजार का बिल बढ़ाकर 1.30 लाख करने का आरोप
मामले की जांच के दौरान कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है।अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि एक वेंडर के 85 हजार रुपये के बिल को कथित तौर पर बढ़ाकर 1 लाख 30 हजार रुपये कर दिया गया।इसके अलावा ANM Global नामक कंपनी को 45 हजार रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है, जबकि शिकायत के अनुसार इस कंपनी ने फिल्म निर्माण से संबंधित कोई सेवा प्रदान नहीं की थी।जांच में एक प्रोडक्शन असिस्टेंट की मदद से 1.50 लाख रुपये से अधिक के कथित फर्जी बिल तैयार करने और उनके भुगतान का मामला भी सामने आया है।पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ वेंडरों को काम देने और उनके बिल स्वीकृत करने के बदले कमीशन तथा मोबाइल फोन की मांग की गई थी।हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
आरोपियों ने अदालत में क्या दी सफाई?
अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अपने बचाव में अलग-अलग दलीलें पेश की गईं।कुलदीप सिंह चंपावत ने कहा कि उनकी भूमिका केवल कंसल्टेंट की थी और वह फिल्म के रोजमर्रा के वित्तीय प्रबंधन, बैंकिंग, ऑडिट या भुगतान जारी करने के लिए जिम्मेदार नहीं थे।शिवकुमार तिवारी ने दलील दी कि वह प्रोडक्शन से जुड़े कार्यों और व्यवस्थाओं का समन्वय करते थे। उनका कंपनी के बैंक खाते या वित्तीय स्वीकृतियों पर कोई अधिकार नहीं था।महिपाल करण राठौड़ ने भी कहा कि कंपनी के बैंक खाते और वित्तीय मामलों पर उनका एकतरफा नियंत्रण नहीं था।हालांकि, अदालत ने उपलब्ध प्रारंभिक सामग्री और जांच की आवश्यकता को देखते हुए तीनों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला बड़ी धनराशि के कथित दुरुपयोग से संबंधित है और इसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता है।न्यायाधीश ने माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपियों की कथित भूमिका की जांच जरूरी है। साथ ही अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जताई।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अग्रिम जमानत खारिज होने का अर्थ आरोपियों का अपराध सिद्ध होना नहीं है। उन्हें कानून के अनुसार आगे न्यायिक राहत मांगने का अधिकार है।
कार्तिक आर्यन निभाएंगे इच्छाधारी नाग का किरदार
फिल्म 'नागजिला' का निर्देशन मृगदीप सिंह लांबा कर रहे हैं, जबकि इसकी कहानी गौतम मेहरा ने लिखी है।फिल्म में कार्तिक आर्यन एक इच्छाधारी नाग की भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस और महावीर जैन फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है।
फिल्म के फरवरी 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, वित्तीय विवाद के कारण रिलीज कार्यक्रम में किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।यह मामला फिल्म निर्माण से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्तिक आर्यन या करण जौहर को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।फिलहाल पुलिस कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अदालत के ताजा फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Next Story