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रामायण में सूफी संगीत को लेकर विवाद, 'मंगल रंग' पर मचा घमासान

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 3:04 PM IST
रामायण में सूफी संगीत को लेकर विवाद, मंगल रंग पर मचा घमासान
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एंटरटेनमेंट: निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ अपने संगीत को लेकर चर्चा में आ गई है। फिल्म के गाने ‘मंगल रंग’ में कथित तौर पर कव्वाली और सूफी संगीत का प्रभाव होने को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया है। कुछ यूजर्स ने संगीतकार एआर रहमान की संगीत शैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि रामायण जैसे पौराणिक विषय पर आधारित फिल्म के गीतों में पारंपरिक भारतीय धार्मिक संगीत की झलक अधिक होनी चाहिए। वहीं, इस विवाद ने एक बार फिर फिल्मों में रचनात्मक स्वतंत्रता, संगीत के प्रयोग और दर्शकों की धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।
‘मंगल रंग’ को लेकर क्यों शुरू हुआ विवाद?
फिल्म ‘रामायण’ के गाने ‘मंगल रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की बात कही जा रही है।
कुछ यूजर्स का दावा है कि गीत की धुन, गायन शैली और संगीत संयोजन में कव्वाली तथा सूफी संगीत की झलक सुनाई देती है।इसी कथित प्रभाव को लेकर एआर रहमान की संगीत शैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।आलोचना करने वाले यूजर्स का मानना है कि भगवान राम के जीवन और रामायण की कथा पर आधारित फिल्म में संगीत का स्वरूप पारंपरिक भक्ति संगीत के अधिक करीब होना चाहिए।हालांकि, किसी गीत में कव्वाली या सूफी संगीत का प्रभाव वास्तव में कितना है, यह संगीत की व्याख्या और श्रोताओं की व्यक्तिगत समझ पर भी निर्भर करता है।
25 अक्टूबर को रिलीज हुआ गाना
फिल्म निर्माताओं ने 25 अक्टूबर 2026 को ‘मंगल रंग’ रिलीज किया था। इस गीत को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है, जबकि संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है। गाने के बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।यह गीत भगवान राम और माता सीता के विवाह, उनके पवित्र मिलन और अयोध्या में माता सीता के आगमन से जुड़े उत्सव को दर्शाता है। गाने में रणबीर कपूर और साई पल्लवी नजर आते हैं।
‘कुन फाया कुन’ से की जा रही तुलना
सोशल मीडिया पर कुछ श्रोताओं ने ‘मंगल रंग’ की तुलना फिल्म ‘रॉकस्टार’ के लोकप्रिय गीत ‘कुन फाया कुन’ से की है।दोनों गीतों का संगीत एआर रहमान ने दिया है। आलोचना करने वाले यूजर्स का दावा है कि नए गीत के गायन और संगीत संयोजन में रहमान के पुराने सूफी अंदाज की झलक मिलती है।कुछ लोगों ने गीत की तुलना रहमान की तमिल फिल्म ‘कंडुकोंडैन कंडुकोंडैन’ के गाने ‘एन्ना सोल्ला पोगिराई’ से भी की है।हालांकि, संगीत में समानता महसूस होना और किसी रचना की नकल साबित होना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल ये तुलना सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है।
पारंपरिक संगीत की मांग कर रहे दर्शक
गीत की आलोचना करने वाले कुछ दर्शकों का कहना है कि रामायण जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक कथा पर आधारित फिल्म में वीणा, सितार, मृदंग और तबला जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का अधिक उपयोग होना चाहिए था।कुछ यूजर्स ने संस्कृत शब्दों और शास्त्रीय संगीत पर आधारित रचनाओं को प्राथमिकता देने की बात भी कही है।उनका मानना है कि भगवान राम और माता सीता के विवाह से जुड़े गीत में भक्ति और पारंपरिक उत्सव का भाव प्रमुख होना चाहिए।वहीं, संगीत की पसंद व्यक्तिगत होती है। भारतीय फिल्म संगीत में शास्त्रीय, लोक, सूफी और आधुनिक शैलियों का मेल लंबे समय से देखने को मिलता रहा है।
एआर रहमान की प्रतिक्रिया भी आई सामने
विवाद के बीच एआर रहमान की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने ‘रामायण’ जैसी फिल्म के लिए संगीत तैयार करने को बड़ी जिम्मेदारी बताया।रहमान ने कहा कि वह अपने काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि हर प्रतिक्रिया को देखने के लिए उनके पास ऊर्जा नहीं बचती। उन्होंने फिल्म के लिए कई भाषाओं में संगीत तैयार करने से जुड़ी जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया।
रणबीर कपूर और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में
नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं।फिल्म में यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। सनी देओल, रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह और लारा दत्ता भी महत्वपूर्ण किरदारों में हैं।फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा ने किया है। इसके संगीत से एआर रहमान के साथ अंतरराष्ट्रीय संगीतकार हंस जिमर भी जुड़े हैं।फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होना निर्धारित है।
बड़े बजट की फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें
‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की चर्चित परियोजनाओं में शामिल है। फिल्म के कलाकारों, भव्य दृश्यों और संगीत को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई है।रामायण की कथा भारतीय समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। ऐसे में इसके फिल्मी रूपांतरण से दर्शकों की अपेक्षाएं भी अधिक हैं।फिल्म निर्माताओं के सामने कथा की भावनात्मक गहराई को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ प्रस्तुत करने की चुनौती है।इसी कारण फिल्म के हर नए गीत, दृश्य और प्रचार सामग्री पर
दर्शकों
की विशेष नजर बनी हुई है।
विवाद से बढ़ी फिल्म की चर्चा
‘मंगल रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस ने फिल्म को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।एक वर्ग गीत के संगीत संयोजन से असहमत दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य श्रोताओं के लिए किसी रचना का मूल्यांकन उसकी धुन, गायन और भावनात्मक प्रभाव के आधार पर हो सकता है।इस विवाद ने यह सवाल भी उठाया है कि पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों में संगीतकारों को पारंपरिक शैलियों तक सीमित रहना चाहिए या नए प्रयोगों की गुंजाइश भी होनी चाहिए।फिलहाल गीत को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शक इसके संगीत को पूरी कहानी और दृश्यों के संदर्भ में देख सकेंगे।
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