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मनोरंजन डेस्क: लोकप्रिय क्राइम धारावाहिक ‘सीआईडी’ के निर्माता और निर्देशक बृजेंद्र पाल सिंह के निधन से अभिनेता शिवाजी साटम गहरे दुख में हैं। शो में एसीपी प्रद्युमन का किरदार निभाने वाले साटम ने उन्हें अपना करीबी दोस्त और मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि सिंह के जाने से उनके जीवन का सबसे बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है। भारतीय टेलीविजन में उनके योगदान को याद करते हुए अभिनेता ने यह भी कहा कि बी.पी. सिंह जैसे फिल्मकार को पद्मश्री मिलना चाहिए।
बी.पी. सिंह का मंगलवार, 27 अक्टूबर को 77 वर्ष की आयु में निधन हुआ। फिल्मकार अशोक पंडित ने उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए शोक जताया। सिंह ‘सीआईडी’ के साथ हॉरर धारावाहिक ‘आहट’ बनाने के लिए भी जाने जाते थे। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों ने उन्हें याद करते हुए टेलीविजन के प्रति उनके समर्पण और व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख किया है।
शिवाजी साटम के लिए शिक्षक और दोस्त थे सिंह
वैरायटी इंडिया से बातचीत में शिवाजी साटम ने बताया कि बी.पी. सिंह ने उनके अभिनय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थिएटर से आने के कारण वह मंच पर अभिनय की बारीकियां जानते थे, लेकिन कैमरे के सामने प्रस्तुति देने की समझ विकसित करने में सिंह ने मदद की। साटम के अनुसार, निर्देशक ने उन्हें सिखाया कि पर्दे की जरूरत के मुताबिक अपने अभिनय का प्रभाव कैसे बदला जाता है।अभिनेता की प्रतिक्रिया में पेशेवर सम्मान के साथ व्यक्तिगत दुख भी दिखाई दिया। उन्होंने सिंह को ऐसा साथी बताया, जिसके साथ उनका रिश्ता किसी एक भूमिका में नहीं समेटा जा सकता। लंबे समय तक एक शो पर साथ काम करने से बना यह जुड़ाव उनके जीवन के दूसरे दौरों तक भी फैला था। साटम ने उन्हें याद करते हुए अपने करियर में मिले मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया।
पद्मश्री के योग्य बताया योगदान
साटम ने कहा कि भारतीय टेलीविजन को दिए योगदान के लिए बी.पी. सिंह पद्मश्री के हकदार थे। यह अभिनेता की ओर से व्यक्त सम्मान और भावना है; किसी पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उनके बयान का केंद्र यह था कि इतने लंबे समय तक दर्शकों से संबंध बनाए रखने वाले रचनाकार के काम को व्यापक पहचान मिलनी चाहिए। साटम के मुताबिक, सिंह स्वयं पुरस्कारों को लेकर अधिक चिंतित नहीं रहते थे। उनके लिए दर्शकों का साथ और अपने काम के प्रति उनका लगाव महत्वपूर्ण था। अभिनेता ने इसी दृष्टिकोण को याद किया। किसी धारावाहिक का वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में बने रहना उसकी रचनात्मक टीम के लिए बड़ा सम्मान होता है। साटम की श्रद्धांजलि में दर्शकों और रचनाकार के इसी रिश्ते की झलक थी।
दयानंद शेट्टी ने भी याद किया समर्पण
‘सीआईडी’ में सीनियर इंस्पेक्टर दया का किरदार निभाने वाले दयानंद शेट्टी ने भी सिंह के निधन पर दुख व्यक्त किया। एचटी सिटी से बातचीत में उन्होंने बताया कि सिंह अपने काम को लेकर बेहद समर्पित थे। उनके अनुसार, नई सामग्री तैयार करना और फिल्मांकन में सक्रिय रहना सिंह के जीवन का प्रमुख हिस्सा था। उन्होंने उन्हें बेहतरीन कैमरामैन के रूप में भी याद किया। शेट्टी ने यह जानकारी भी दी कि सिंह कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके शब्दों में एक ऐसे सहकर्मी के प्रति सम्मान था, जिसकी पहचान काम के प्रति जुनून से बनी। कलाकारों की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि सिंह का प्रभाव केवल धारावाहिक के निर्देशन तक सीमित नहीं था। साथ काम करने वालों के लिए उनकी तकनीकी समझ और मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण थे।
‘सीआईडी’ ने दी स्थायी पहचान
वर्ष 1998 में शुरू हुआ ‘सीआईडी’ भारतीय टेलीविजन के लंबे समय तक चलने वाले क्राइम धारावाहिकों में शामिल रहा। इसमें शिवाजी साटम के एसीपी प्रद्युमन, आदित्य श्रीवास्तव के अभिजीत और दयानंद शेट्टी के दया जैसे किरदारों को पहचान मिली। अपराध की जांच, टीम के बीच संवाद और रहस्य सुलझाने की शैली शो की विशेषताओं में शामिल थी। बी.पी. सिंह पर्दे के पीछे निर्माता-निर्देशक की जिम्मेदारी निभाने के अलावा कैमरे के सामने भी दिखाई दिए। उन्होंने शो में डीसीपी शमशेर सिंह चित्रोले का किरदार निभाया था। इस तरह दर्शक उन्हें एक अभिनेता के रूप में भी पहचानते थे। उनके निधन के बाद शो से जुड़ी यादों में निर्देशन और अभिनय, दोनों भूमिकाओं का उल्लेख हो रहा है।
‘आहट’ के जरिए भी दर्शकों से जुड़ाव
क्राइम की दुनिया से अलग ‘आहट’ ने डर, रहस्य और अलौकिक घटनाओं पर आधारित कहानियां प्रस्तुत कीं। वर्ष 1995 में शुरू हुआ यह शो भी लंबे समय तक टेलीविजन दर्शकों के बीच जाना-पहचाना नाम रहा। दोनों धारावाहिक अलग विधाओं के थे, लेकिन उनमें कहानी के रहस्य और दर्शकों की उत्सुकता को बनाए रखने का महत्व था। सिंह की यात्रा में कैमरे और दृश्य निर्माण का अनुभव महत्वपूर्ण रहा। वह पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान से जुड़े रहे और दूरदर्शन के लिए काम कर चुके थे। उनके साथ काम करने वाले कलाकारों ने जिस तकनीकी समझ की प्रशंसा की है, वह उनके लंबे अनुभव को रेखांकित करती है। बी.पी. सिंह के निधन पर सामने आई श्रद्धांजलियों में उनके शो की लोकप्रियता के साथ उनका मानवीय पक्ष भी याद किया जा रहा है। शिवाजी साटम के लिए वह दोस्त और शिक्षक थे, जबकि दयानंद शेट्टी ने उनके काम के प्रति जुनून को रेखांकित किया। उनके बनाए किरदार और कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन की स्मृतियों में उनकी पहचान बनाए रखेंगे।
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