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मुंबई: Entertainment,मनोरंजन- बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल ने हाल ही में अपने बड़े बेटे आर्यमन देओल और उनकी बॉलीवुड एंट्री को लेकर कुछ अहम बातें साझा की हैं। उन्होंने न सिर्फ डेब्यू की योजना पर अपने विचार बताए, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में मचा “नेपोटिज्म” विवाद पर भी अपनी राय रखी।
आर्यमन के डेब्यू की तैयारी
बॉबी देओल ने स्वीकृति दी है कि आर्यमन को फिलहाल कई फिल्म ऑफर्स मिल रहे हैं और लोग उन्हें जल्द पर्दे पर देखना चाहते हैं। लेकिन उन्होंने साफ किया कि वे अभी जल्दबाजी नहीं करना चाहते। बॉबी ने कहा कि आर्यमन को पहले क्राफ्ट (अभिनय कला) सीखने की जरूरत है — “मैं उसको समंदर के बीच अभी नहीं फेंक सकता, क्योंकि मैं जानता हूँ कि उसका अभी तैरना नहीं आता है।”
वे यह भी मानते हैं कि सिर्फ खूबसूरत लुक या स्टार परिवार से होना, सफलता की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि “जब फिल्म इंडस्ट्री में सफल होने की बात आती है, तो ये कोई गारंटी नहीं होती”
इसके अलावा बॉबी ने यह भी कहा कि डेब्यू से पहले आर्यमन को सही समझ, अनुभव और तैयारी समय देना आवश्यक है — “उसको पहले सीखना होगा कि…”
नेपोटिज्म पर बॉबी देओल की बात
जब नेपोटिज्म (परिचितों या परिवार के लाभ पर आधारित उन्नति) की चर्चा होती है, बॉबी देओल ने एक संतुलित नजरिया पेश किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्होंने खुद इंडस्ट्री में संघर्ष किया है और सफलताओं और असफलताओं से गुज़रे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता धर्मेंद्र भी कभी “आउटसाइडर” थे — यानी उन्होंने भी शुरुआत में संघर्ष किया।
उनका कहना है कि हर पिता चाहता है कि उनका बेटा ज़िंदगी में बेहतर राह चुनें — “देखो, हर पिता अपने बेटे की जिंदगी को आरामदायक बनाना चाहता है” — और नेपोटिज्म की आलोचना अक्सर उन लोगों द्वारा होती है, जो सफलता नहीं पाते। (यह विचार अन्य सेलेब्रिटीज़ जैसे सनी देओल ने भी व्यक्त किया है)
बॉबी ने यह भी माना है कि इंडस्ट्री की चुनौतियाँ गंभीर हैं और केवल परिवार का नाम होने से ही सफलता नहीं मिलती। उन्होंने यह ज़ोर दिया कि कला की समझ, मेहनत और आत्मविश्वास बहुत महत्वपूर्ण हैं।
ऑडियंस का नजरिया और बदलता ट्रेंड
बॉबी ने यह बात भी उठाई कि आज की ऑडियंस ज़्यादा जागरूक है। उन्हें सिर्फ नाम या रिश्ते से प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि दर्शक अब लिटी और कंटेंट पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, और अगर डेब्यू अच्छा नहीं होगा तो परिवार का नाम कारगर नहीं रहेगा।
यह भी देखा गया है कि आर्यमन को हाल ही में कई इवेंट्स में ध्यान मिला — जैसे ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ की स्क्रीनिंग में वह पिता–माँ के साथ दिखे और चर्चा में आये।
बॉबी देओल की यह सफाई और दृष्टिकोण इस बात पर प्रकाश डालती है कि जब स्टार परिवार के बेटे/बेटियां पर्दे पर कदम रखें, उन्हें दबाव, तुलना और आलोचना से गुजरना पड़ता है। वे खुद कहते हैं कि आर्यमन जल्दबाजी नहीं करना चाहता — पहले सीखना, अपनी कला निखारना, और फिर डेब्यू करना — और गारंटी नहीं कि नाम ही सब कुछ तय कर दे।
नेपोटिज्म को नकारते हुए उन्होंने यह मान्यता दी कि संघर्ष और प्रयास ही अंत में मायने रखेंगे, और आज की ऑडियंस नाम या पहचान से ज़्यादा कंटेंट को प्राथमिकता देती है।
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