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फ्लॉप फिल्मों के बाद Bobby Deol की शानदार वापसी

Saba Naaz
4 July 2026 3:55 PM IST
फ्लॉप फिल्मों के बाद Bobby Deol की शानदार वापसी
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मनोरंजन: बॉबी देओल ने 90 के दशक में बॉलीवुड में रोमांटिक हीरो के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी। ‘बरसात’, ‘सोल्जर’ और ‘हमराज’ जैसी फिल्मों से उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उस दौर में उन्हें एक चॉकलेटी हीरो के रूप में देखा जाता था, लेकिन समय के साथ उनका करियर उतार-चढ़ाव से गुजरता चला गया और एक समय ऐसा भी आया जब उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं।

फिल्मों की असफलता ने उनके करियर को गहरे संकट में डाल दिया। बड़े बैनर की फिल्मों में काम मिलना कम हो गया और धीरे-धीरे वे इंडस्ट्री से लगभग गायब से हो गए। खुद बॉबी देओल ने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि इस दौर में वह मानसिक रूप से टूट गए थे और काम से दूरी भी बना ली थी। यह समय उनके लिए बेहद कठिन था और ऐसा लगने लगा था कि उनका फिल्मी सफर लगभग खत्म हो चुका है।

लेकिन बॉबी देओल की असली वापसी उनकी सेकेंड इनिंग्स में देखने को मिली। साल 2000 की फिल्म ‘बादल’ और ‘बिच्छू’ जैसे किरदारों में उन्होंने पहली बार ग्रे शेड और डार्क रोल्स के साथ प्रयोग किया था। हालांकि असली बदलाव तब आया जब उन्होंने वेब सीरीज ‘आश्रम’ में बाबा निराला का किरदार निभाया। इस किरदार ने उन्हें नई पहचान दी और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता फिर से बढ़ गई।

‘आश्रम’ के बाद बॉबी देओल का करियर पूरी तरह बदल गया। उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ रोमांटिक हीरो ही नहीं, बल्कि गंभीर और खतरनाक किरदारों में भी उतने ही प्रभावी हैं। इसके बाद उन्हें फिल्मों में लगातार निगेटिव रोल मिलने लगे। संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ में अबरार हक के किरदार ने उन्हें पैन इंडिया स्टार विलेन बना दिया। बिना ज्यादा डायलॉग बोले उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया और सोशल मीडिया पर “लॉर्ड बॉबी” ट्रेंड करने लगा।

इसके बाद बॉबी देओल ने साउथ सिनेमा में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली। उन्होंने तमिल फिल्म ‘कंगुवा’ और तेलुगु फिल्म ‘डाकू महाराज’ में दमदार निगेटिव किरदार निभाए। इसके अलावा वे ओटीटी और वेब सीरीज में भी लगातार नए और चुनौतीपूर्ण रोल करते नजर आ रहे हैं।

आज बॉबी देओल की पहचान एक ऐसे अभिनेता के रूप में है, जो रोमांटिक हीरो से लेकर इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली विलेन तक का सफर तय कर चुका है। उनकी सेकेंड इनिंग्स इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, सही मौके और बदलाव की इच्छा से किसी भी कलाकार की किस्मत फिर से लिखी जा सकती है।

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