
Entertainment मनोरंजन : इस साल कान फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के दौरान अभिनेत्री आलिया भट्ट को रेड कार्पेट पर देखा गया, जहाँ उनकी स्टाइल और लुक्स ने लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर उनके फोटो और वीडियो वायरल हुए, जिन पर प्रतिक्रिया भी तेजी से देखने को मिली। कई लोगों ने उनकी तारीफ की और उनके लुक की प्रशंसा की, तो वहीं कुछ ने उन्हें ट्रोल भी किया। इस ट्रोलिंग को लेकर अब फिल्म क्रिटीक अनुपमा चोपड़ा ने हैरान करने वाला दावा किया है।
अनुपमा चोपड़ा का कहना है कि आलिया भट्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर पेड कैंपेन चलाया गया था, जिसके चलते उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसी ट्रोलिंग या नकारात्मक टिप्पणियां स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं होतीं, बल्कि किसी की छवि या काम को प्रभावित करने के लिए योजना बद्ध तरीके से अभियान चलाया जाता है। चोपड़ा ने यह भी कहा कि पेड कैंपेन का उद्देश्य दर्शकों और फॉलोअर्स के मन में नकारात्मक प्रभाव डालना होता है, जिससे सेलिब्रिटी को आलोचना और नकारात्मकता का सामना करना पड़े।
कान फिल्म फेस्टिवल जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपस्थित होना किसी भी कलाकार के लिए गर्व की बात होती है। हालांकि, सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच के कारण कलाकारों को कई बार असामयिक और अनुचित टिप्पणियों का सामना भी करना पड़ता है। आलिया भट्ट की ट्रोलिंग के मामले ने यह सवाल उठाया कि क्या सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचनाएं हमेशा स्वाभाविक होती हैं या उनके पीछे कोई योजना होती है।
अनुपमा चोपड़ा ने यह भी कहा कि पेड कैंपेन अक्सर समय, पैटर्न और लक्षित ऑडियंस के आधार पर चलाए जाते हैं। ऐसे अभियान किसी एक घटना, तस्वीर या वीडियो को फैलाकर बड़ी संख्या में नकारात्मक प्रतिक्रियाएं जुटाते हैं। इसके जरिए एक आम धारणा बनाई जाती है कि सेलिब्रिटी के काम या सार्वजनिक व्यवहार पर आलोचना हो रही है, जबकि वास्तविकता में यह किसी एजेंडा का हिस्सा होती है।
इस दावे के बाद फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले प्लेटफॉर्म्स और उनके नियमों पर भी ध्यान देने लगे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और पेड कैंपेन की वजह से कलाकारों को मानसिक और भावनात्मक दबाव झेलना पड़ सकता है। कई बार इस तरह की ट्रोलिंग से कलाकारों की छवि और उनके प्रोफेशनल करियर पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, आलिया भट्ट ने इस मामले पर सीधे तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। उनकी टीम ने केवल इतना कहा कि सोशल मीडिया पर होने वाली टिप्पणियों से उनका काम प्रभावित नहीं होता और वे अपने प्रोजेक्ट्स और फैंस पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इसके बावजूद अनुपमा चोपड़ा का दावा चर्चा का विषय बन गया है और इससे यह मुद्दा उभरकर सामने आया है कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और पेड कैंपेन कैसे एक-दूसरे से जुड़े हैं।
कुल मिलाकर, कान फिल्म फेस्टिवल में आलिया भट्ट की ट्रोलिंग मामले ने सोशल मीडिया और पेड कैंपेन के प्रभाव को फिर से उजागर किया है। फिल्म क्रिटीक अनुपमा चोपड़ा का दावा दर्शाता है कि कई बार कलाकारों के खिलाफ आलोचना स्वाभाविक नहीं होती, बल्कि उसे योजनाबद्ध तरीके से फैलाया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आज के समय में सेलिब्रिटी होने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सुरक्षा और सतर्कता भी जरूरी हो गई है।





