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मिस सुप्रानेशनल 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर लौटीं अवनी गुप्ता छलका दर्द

nidhi
10 Aug 2026 12:00 PM IST
मिस सुप्रानेशनल 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर लौटीं अवनी गुप्ता छलका दर्द
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मिस सुप्रानेशनल का ताज नहीं जीत पाईं अवनी गुप्ता बोलीं यादों के साथ घर लौट रही हूं
एंटरटेनमेंट: अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना हर मॉडल और ब्यूटी क्वीन का सपना होता है। आगरा की रहने वाली अवनी गुप्ता ने भी इस सपने को जिया, जब उन्होंने मिस सुप्रानेशनल 2026 में भारत की ओर से हिस्सा लिया। पोलैंड में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में दुनिया के अलग-अलग देशों से आई प्रतिभागियों के बीच अवनी ने अपनी पहचान बनाई और टॉप-12 में जगह बनाकर भारत का गौरव बढ़ाया।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने और वहां भारत का प्रतिनिधित्व करने के पीछे सिर्फ ग्लैमर और कैमरों की चमक नहीं थी। इसके पीछे लंबे समय की मेहनत, मानसिक दबाव, अनुशासन, खुद को लगातार बेहतर बनाने की चुनौती और अपने सपने के लिए सुरक्षित करियर छोड़ने का बड़ा फैसला भी था।
अवनी का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया था। वह डेलॉयट में ऑडिटर के तौर पर काम कर चुकी हैं। एक तरफ नौकरी की स्थिर जिंदगी थी और दूसरी तरफ बचपन का वह सपना, जिसे वह अपनी मां के साथ घर पर रैंप वॉक की प्रैक्टिस करते हुए देखा करती थीं। आखिरकार उन्होंने जोखिम उठाया और अपने सपने को चुना।
टॉप-12 में बनाई जगह
31 जुलाई 2026 को पोलैंड के नोवी सॉंच में आयोजित मिस सुप्रानेशनल 2026 के ग्रैंड फिनाले में 67 देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में फिलीपींस की कैटरीना लेगाडो ने खिताब अपने नाम किया, जबकि भारत की अवनी गुप्ता टॉप-12 तक पहुंचीं।
यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की ओर से उतरने वाली प्रतिभागी के लिए केवल खूबसूरती ही पर्याप्त नहीं होती। मंच पर आत्मविश्वास, संवाद क्षमता, व्यक्तित्व, प्रस्तुति, फिटनेस और अलग-अलग देशों की प्रतिभागियों के बीच अपनी पहचान बनाना भी बड़ी चुनौती होती है।
अवनी ने इस चुनौती का सामना किया और टॉप-12 में जगह बनाकर साबित किया कि भारतीय प्रतिभा अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है।
बचपन से देखा था रैंप वॉक का सपना
अवनी की कहानी की शुरुआत किसी बड़े फैशन शो या मॉडलिंग एजेंसी से नहीं हुई थी। उनका सपना घर के छोटे से माहौल में पनपा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बचपन में वह अपनी मां के साथ घर पर रैंप वॉक की प्रैक्टिस किया करती थीं। उनकी मां खुद भी कभी मिस इंडिया बनकर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। बेटी के सपने को उन्होंने जरूर पूरा समर्थन दिया।
अवनी के लिए यह केवल व्यक्तिगत सपना नहीं रहा। उनकी मां का अधूरा सपना भी कहीं न कहीं उनके सफर का हिस्सा बन गया। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रहा।
कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ना सबसे बड़ा फैसला
अवनी का सफर इसलिए भी युवाओं को प्रेरित करता है क्योंकि उन्होंने मॉडलिंग में आने के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी।
मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में आने से पहले वह डेलॉयट में ऑडिटर के रूप में काम कर रही थीं। उनके पास एक सुरक्षित और पेशेवर करियर था। लेकिन बचपन का सपना उन्हें लगातार अपनी ओर खींच रहा था।
कॉर्पोरेट नौकरी के साथ पेजेंट की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। दिनभर ऑफिस का काम और उसके बाद रैंप वॉक, फिटनेस, ग्रूमिंग और प्रतियोगिता की तैयारी—यह सब एक साथ संभालना मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण था।
आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह अपने सपने को समय देने का फैसला किया। यह फैसला उनके लिए जोखिम भरा जरूर था, लेकिन इसी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता दिया।
ग्लैमर के पीछे छिपी मेहनत
ब्यूटी पेजेंट को अक्सर बाहर से देखने पर केवल खूबसूरत कपड़े, मेकअप, फोटोशूट और रैंप वॉक का मंच माना जाता है। लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी इससे कहीं ज्यादा कठिन होती है।
प्रतिभागियों को अपने शरीर और फिटनेस पर काम करने के साथ-साथ बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग, स्टेज प्रेजेंस और इंटरव्यू राउंड के लिए भी तैयार रहना पड़ता है।
इसके अलावा अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आने वाले प्रतियोगियों के बीच अपनी राष्ट्रीय पहचान को प्रस्तुत करना भी बड़ी जिम्मेदारी होती है।
अवनी ने इस पूरी प्रक्रिया में खुद को लगातार तैयार किया। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचने के पीछे कैमरे के सामने दिखाई देने वाले कुछ मिनटों से कहीं ज्यादा लंबी तैयारी होती है।
'दर्द' सिर्फ हार या जीत का नहीं
अवनी की कहानी में दर्द का पहलू केवल प्रतियोगिता में ताज न जीत पाने तक सीमित नहीं है। एक सपने को हासिल करने के लिए जिस तरह उन्होंने अपनी पुरानी जिंदगी से दूरी बनाई, वह भी इस सफर का हिस्सा है।
एक स्थिर कॉर्पोरेट करियर से निकलकर अनिश्चित और प्रतिस्पर्धी पेजेंट की दुनिया में आना आसान फैसला नहीं था। यहां हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ता है।
कभी तैयारी उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, कभी परिणाम मनचाहा नहीं मिलता और कभी खुद की तुलना दुनिया के बेहतरीन प्रतिभागियों से होने लगती है। ऐसे समय में मानसिक मजबूती सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है।
अवनी का टॉप-12 तक पहुंचना बताता है कि इन तमाम चुनौतियों के बीच उन्होंने खुद को संभाला और प्रतियोगिता में मजबूती से आगे बढ़ीं।
परिवार बना सबसे मजबूत सहारा
अवनी ने अपने सफर में परिवार के समर्थन को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनके पिता और बड़ी बहन लगातार उनका हौसला बढ़ाते रहे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता उनकी उपलब्धियों को गर्व के साथ सोशल मीडिया और WhatsApp स्टेटस के जरिए साझा करते हैं। उनकी बड़ी बहन भी उनके फैसलों में उनके साथ खड़ी रही हैं।
किसी भी ऐसे करियर में जहां लगातार लोगों की नजरें बनी रहती हैं, परिवार का भावनात्मक समर्थन काफी मायने रखता है। खासकर तब, जब व्यक्ति पारंपरिक करियर छोड़कर बिल्कुल अलग क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा हो।
अवनी के लिए परिवार का भरोसा उस समय सबसे बड़ा सहारा बना, जब उन्होंने अपने सपने को प्राथमिकता देने का फैसला किया।
भारत की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाया
मिस सुप्रानेशनल 2026 में अवनी ने केवल अपने व्यक्तित्व का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारत की संस्कृति और फैशन को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड में उन्होंने डिजाइनर अमरीन खान के तैयार किए आउटफिट को पहना। गहरे लाल रंग के रॉ सिल्क और ऑर्गेंजा से तैयार इस लहंगे के जरिए भारतीय हस्तकला और शिल्प कौशल को प्रस्तुत किया गया।
ग्रैंड फिनाले के लिए उन्होंने डिजाइनर भावना राव का तैयार किया हुआ मेरलॉट शेड का कस्टम गाउन पहना।
इन लुक्स के जरिए अवनी ने भारतीय फैशन और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने रखने की कोशिश की।
सिर्फ ताज नहीं, एक उद्देश्य भी
अवनी की पहचान केवल ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं है। वह सामाजिक मुद्दों को लेकर भी काम करना चाहती हैं।
कॉलेज के दौरान दृष्टिबाधित छात्रों के साथ काम करने का अनुभव उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ बना। इसके बाद उन्होंने 'Beyond Sight, Beyond Limits' नाम से एक पहल शुरू की। इसका उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों को करियर गाइडेंस, काउंसलिंग और बेहतर अवसरों की दिशा में मदद करना है।
यही वजह है कि अवनी के लिए पेजेंट का मंच केवल ताज जीतने का माध्यम नहीं है। वह चाहती हैं कि उन्हें मिलने वाली पहचान का इस्तेमाल समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए किया जाए।
युवाओं को दिया कम्फर्ट जोन छोड़ने का संदेश
अवनी की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश युवाओं के लिए है। उन्होंने अपने अनुभव से यह साबित किया कि करियर का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता।
कई बार हमारे सामने एक सुरक्षित रास्ता होता है और दूसरी तरफ वह सपना होता है, जिसे पूरा करने का कोई निश्चित रास्ता नहीं दिखाई देता। ऐसे में फैसला लेना मुश्किल होता है।
अवनी ने सुरक्षित कॉर्पोरेट नौकरी से निकलकर अपने सपने का रास्ता चुना। उनका मानना है कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने के लिए कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने का साहस भी जरूरी है।
उनकी कहानी खास तौर पर उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो अपने वर्तमान करियर और पुराने सपनों के बीच उलझे हुए हैं।
क्या टॉप-12 तक पहुंचना सफलता है?
किसी भी प्रतियोगिता में अंतिम ताज सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर टॉप-12 में पहुंचना भी कम उपलब्धि नहीं है।
मिस सुप्रानेशनल 2026 में 67 देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ऐसे में टॉप-12 तक पहुंचना बताता है कि अवनी ने प्रतियोगिता के अलग-अलग चरणों में अच्छा प्रदर्शन किया और जजों के सामने अपनी मजबूत पहचान बनाई।
उनकी उपलब्धि को केवल ताज के नजरिए से देखने के बजाय उस पूरे सफर के संदर्भ में देखना जरूरी है, जिसने उन्हें आगरा से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
लौटने के बाद क्या है अगला लक्ष्य?
मिस सुप्रानेशनल 2026 का सफर पूरा होने के बाद अवनी के सामने अब अपने अनुभवों को आगे बढ़ाने का मौका है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले अनुभव उन्हें मॉडलिंग, फैशन और सामाजिक पहलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही उनकी 'Beyond Sight, Beyond Limits' पहल को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का अवसर भी उनके पास है।
उनका लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं दिखता। वह अपने मंच का इस्तेमाल समाज के उन लोगों के लिए करना चाहती हैं, जिन्हें अवसर और समर्थन की जरूरत है।
अवनी की कहानी क्यों खास है?
अवनी गुप्ता की कहानी में कई ऐसे पहलू हैं, जो इसे सामान्य पेजेंट कहानी से अलग बनाते हैं।
एक लड़की जो बचपन में अपनी मां के साथ घर पर रैंप वॉक की प्रैक्टिस करती थी, आगे चलकर कॉर्पोरेट सेक्टर में ऑडिटर बनी। फिर उसी सुरक्षित करियर को छोड़कर उसने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और अंततः भारत की प्रतिनिधि बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची।
इस सफर में असफलता का डर भी रहा होगा, अनिश्चितता भी रही होगी और खुद को लगातार साबित करने का दबाव भी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने सपने का पीछा करना जारी रखा।
उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सफलता केवल ताज मिलने का नाम नहीं है। कभी-कभी अपनी पहचान बनाना, अपने डर से आगे निकलना और दुनिया के सामने अपने देश को प्रस्तुत करना भी बड़ी उपलब्धि होती है।
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