
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के कई ऐसे गीत हैं, जो रिलीज होने के दशकों बाद भी लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। इन गानों की खासियत सिर्फ इनके बोल या संगीत नहीं होते, बल्कि कलाकारों की अदाकारी और गायकों की आवाज इन्हें हमेशा के लिए यादगार बना देती है। ऐसा ही एक सदाबहार गीत है, जिसे 53 साल बाद भी दर्शक उतना ही पसंद करते हैं।
यह गाना साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘लोफर’ का है। फिल्म के मशहूर गीत ‘कोई शहरी बाबू दिल लहरी’ को अपनी शानदार आवाज दी थी महान गायिका आशा भोसले ने। यह गीत अपनी चुलबुली धुन, मस्तीभरे अंदाज और शानदार प्रस्तुति के कारण आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है।
इस गाने को अभिनेत्री मुमताज और फरीदा जलाल पर फिल्माया गया था। खासतौर पर मुमताज के डांस और उनके अनोखे अंदाज ने इस गाने को अलग पहचान दिलाई। उनकी अदाएं, एक्सप्रेशन और डांस स्टाइल ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। यही वजह है कि यह गाना आज भी मुमताज के यादगार गीतों में गिना जाता है।
आशा भोसले की आवाज की सबसे बड़ी खासियत उनका अलग अंदाज था। उन्होंने अपने करियर में रोमांटिक, भावुक और क्लासिकल गीतों के साथ-साथ कई पेपी और डांस नंबर भी गाए। उनकी आवाज में चंचलता और ऊर्जा साफ महसूस होती थी, जो इस गाने की सबसे बड़ी ताकत बनी।
जहां लता मंगेशकर की गायकी को शास्त्रीय संगीत की गहराई और मधुरता के लिए जाना जाता था, वहीं आशा भोसले ने वेस्टर्न म्यूजिक, जैज और कैबरे स्टाइल के गानों में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई ऐसे गीत दिए, जो अपने समय से आगे माने गए और आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।
‘कोई शहरी बाबू दिल लहरी’ भी उन्हीं गीतों में शामिल है, जिसने आशा भोसले की गायकी और मुमताज की अदाकारी को एक साथ यादगार बना दिया। गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई पीढ़ी के लोग भी इसे सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर सुनना पसंद करते हैं।
फिल्म ‘लोफर’ में धर्मेंद्र और मुमताज मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म के कई गाने लोकप्रिय हुए, लेकिन ‘कोई शहरी बाबू दिल लहरी’ ने अपनी अलग पहचान बनाई। इस गाने ने न सिर्फ फिल्म की लोकप्रियता बढ़ाई, बल्कि मुमताज के करियर के यादगार पलों में भी जगह बनाई।
बॉलीवुड में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो समय के साथ पुराने नहीं पड़ते बल्कि और ज्यादा खास बन जाते हैं। ‘कोई शहरी बाबू दिल लहरी’ ऐसा ही गीत है, जो आज भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाता है।
53 साल बाद भी इस गाने की लोकप्रियता साबित करती है कि अच्छे संगीत, बेहतरीन गायकी और शानदार अदाकारी का जादू कभी खत्म नहीं होता। आशा भोसले की आवाज और मुमताज के डांस ने इस गीत को हिंदी सिनेमा के यादगार गानों की सूची में हमेशा के लिए शामिल कर दिया है।





