
Entertainment मनोरंजन : फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने थिएटरों में विदेशी फिल्मों को अधिक शो मिलने और भारतीय फिल्मों को सीमित समय स्लॉट दिए जाने पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी फिल्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भारतीय सिनेमा को बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिल सके।
अनुराग कश्यप ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा करते हुए हाल ही में रिलीज़ हुई हॉलीवुड फिल्म ‘ऑब्सेशन’ को अधिक शो दिए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस वजह से कई भारतीय फिल्मों को पर्याप्त स्क्रीन टाइम नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि पिछले सप्ताह बॉबी देओल अभिनीत उनकी फिल्म ‘बंदर’ को अपेक्षित संख्या में शो नहीं मिले। इसके अलावा, इम्तियाज़ अली की ‘मैं वापस आऊंगा’, सिंगीतम श्रीनिवास राव की ‘सिंग गीथम’ और मनोज बाजपेयी की ‘गवर्नर’ जैसी फिल्मों को भी सीमित स्क्रीनिंग स्लॉट दिए जा रहे हैं।
कश्यप ने लिखा कि वे यह समझते हैं कि दर्शक बड़े पैमाने पर ‘ऑब्सेशन’ जैसी फिल्में देखना चाहते हैं, लेकिन उनका मानना है कि ऐसी फिल्मों को सीमित शो के साथ भी लंबे समय तक चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय फिल्मों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तो इंडस्ट्री आगे कैसे बढ़ेगी, यह एक बड़ा सवाल है।
उनका कहना था कि थिएटरों को संतुलन बनाते हुए स्थानीय फिल्मों को भी उचित अवसर देना चाहिए, ताकि विविध प्रकार की फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिल सके।
फिल्म उद्योग में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि मल्टीप्लेक्स और बड़े थिएटरों में विदेशी और बड़े बजट की फिल्मों को अधिक स्क्रीन मिलती है, जबकि मध्यम बजट और क्षेत्रीय फिल्मों को सीमित अवसर मिलता है।
अनुराग कश्यप के इस बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है कि क्या भारतीय फिल्मों को अपने ही बाजार में पर्याप्त प्राथमिकता मिल रही है या नहीं।
कुल मिलाकर, उनके बयान ने थिएटर वितरण प्रणाली और फिल्मों के प्रदर्शन संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें भारतीय सिनेमा के हितों को प्राथमिकता देने की मांग एक बार फिर सामने आई है।





