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1942 की फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ का पुराना किस्सा फिर चर्चा में

Ratna Netam
16 Jun 2026 7:15 PM IST
1942 की फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ का पुराना किस्सा फिर चर्चा में
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अभिनेत्री इस फिल्म में लीड रोल निभा रही थीं

Entertainment मनोरंजन : साल 1942 का समय था जब फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ की शूटिंग चल रही थी। यह दौर भारतीय सिनेमा के शुरुआती और बेहद संघर्षपूर्ण समय में से एक माना जाता है। उस समय की एक बेहद खूबसूरत अभिनेत्री इस फिल्म में लीड रोल निभा रही थीं, जबकि अभिनेता Bhagwan Dada मुख्य भूमिका में थे।

फिल्म की कहानी के अनुसार एक सीन शूट किया जाना था, जिसमें भगवान दादा को अभिनेत्री के गाल पर थप्पड़ मारना था। यह सीन स्क्रिप्ट का हिस्सा था और कैमरे के सामने इसे वास्तविकता के साथ फिल्माना था। जब शूटिंग शुरू हुई और डायरेक्टर ने “एक्शन” कहा, तो Bhagwan Dada ने सीन के मुताबिक अभिनेत्री को थप्पड़ मार दिया।

सीन के दौरान हुआ हादसा

बताया जाता है कि यह थप्पड़ स्क्रिप्ट के अनुसार था, लेकिन झटका इतना तेज था कि अभिनेत्री संतुलन खो बैठीं और जमीन पर गिर पड़ीं। सेट पर मौजूद लोग इस घटना से कुछ पल के लिए हैरान रह गए।

उस समय फिल्म सेट्स पर तकनीकी सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था आज जैसी नहीं होती थीं, इसलिए कई सीन वास्तविकता के बेहद करीब शूट किए जाते थे। यही कारण था कि ऐसे सीन कभी-कभी ज्यादा प्रभावशाली और कभी-कभी जोखिम भरे भी साबित होते थे।

पुराने दौर की फिल्में और शूटिंग का तरीका

उस दौर में फिल्म निर्माण बेहद सीमित संसाधनों के साथ होता था। एक ही सीन को कई बार बिना आधुनिक तकनीक के शूट करना पड़ता था। कलाकारों को अपने अभिनय में अधिक वास्तविकता लानी होती थी, जिससे दर्शकों को कहानी से जोड़ा जा सके।

Bhagwan Dada जैसे कलाकार उस समय अपनी सादगी और मेहनत के लिए जाने जाते थे। फिल्मों में भावनाओं को वास्तविक रूप में दिखाने के लिए कई बार सीन बहुत ही सीधे तरीके से फिल्माए जाते थे।

किस्से की फिर से चर्चा

यह पुराना किस्सा आज सोशल मीडिया और फिल्म इतिहास के चर्चित प्रसंगों में फिर से सामने आया है। लोग इसे भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर की कठोर और वास्तविक शूटिंग शैली के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।

फैंस का कहना है कि आज के समय में ऐसे सीन बेहद सावधानी और सुरक्षा के साथ फिल्माए जाते हैं, जबकि उस दौर में परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं।

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