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अमेरिकी सिंगर ने कॉपी किया लता का गाना फिर चुकानी पड़ी भारी कीमत
Ratna Netam
11 Sept 2026 8:55 PM IST

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मुंबई। स्वर कोकिला लता मंगेशकर के गानों की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। उनकी आवाज और भारतीय संगीत की धुनों ने दुनियाभर के संगीतकारों को प्रभावित किया। लेकिन एक ऐसा मामला भी सामने आया था, जब लता मंगेशकर के गाए एक पुराने हिंदी गाने का हिस्सा अमेरिकी गाने में इस्तेमाल होने के बाद कॉपीराइट विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बड़ा हुआ कि भारतीय म्यूजिक कंपनी Saregama India ने अमेरिका में **500 मिलियन डॉलर** का मुकदमा दायर कर दिया।
यह विवाद लता मंगेशकर के गाए **‘थोड़ा रेशम लगता है’** और अमेरिकी गायिका Truth Hurts के चर्चित गाने **‘Addictive’** से जुड़ा था। ‘थोड़ा रेशम लगता है’ साल 1981 की हिंदी फिल्म *ज्योति* का गाना है। बाद में इसी गाने के एक हिस्से का इस्तेमाल ‘Addictive’ में किया गया। समस्या तब खड़ी हुई जब इस सैंपल के इस्तेमाल के लिए अधिकार रखने वाली कंपनी से कथित तौर पर जरूरी अनुमति नहीं ली गई।
1981 में आया था ‘थोड़ा रेशम लगता है’
लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया ‘थोड़ा रेशम लगता है’ फिल्म *ज्योति* का हिस्सा था। उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि करीब दो दशक बाद इसकी आवाज अमेरिका के एक लोकप्रिय हिप-हॉप और R&B गाने में सुनाई देगी।
2002 में अमेरिकी गायिका Truth Hurts का गाना ‘Addictive’ रिलीज हुआ। इसके प्रोडक्शन से DJ Quik और Dr. Dre जैसे बड़े नाम जुड़े थे। गाने की धुन और बीट के बीच लता मंगेशकर की आवाज का सैंपल इस्तेमाल किया गया था।
गाना लोकप्रिय हुआ, लेकिन इसके साथ ही कॉपीराइट का विवाद भी शुरू हो गया।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
‘Addictive’ में इस्तेमाल किए गए भारतीय हिस्से की पहचान ‘थोड़ा रेशम लगता है’ के रूप में हुई। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इस गाने के अधिकार रखने वाली Saregama India ने आरोप लगाया कि सैंपल के इस्तेमाल के लिए उससे आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
इसके बाद मामला केवल संगीत की समानता या प्रेरणा की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कॉपीराइट विवाद बन गया।
Saregama ने पहले इस इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और बाद में अमेरिका में कानूनी कार्रवाई की। सितंबर 2002 में कंपनी ने Aftermath Entertainment और उसकी पैरेंट कंपनी Universal Music Group के खिलाफ **500 मिलियन डॉलर का मुकदमा** दायर किया।
उस समय की विनिमय दर से भी यह रकम हजारों करोड़ रुपये के बराबर थी। इसी आंकड़े को बाद की कई चर्चाओं में लगभग 4000 करोड़ रुपये बताकर पेश किया गया।
लेकिन यहां एक बड़ा अंतर समझना जरूरी है—**500 मिलियन डॉलर मुकदमे में मांगी गई रकम थी, यह साबित नहीं होता कि अमेरिकी गायिका या कंपनी को वास्तव में इतनी रकम हर्जाने के रूप में चुकानी पड़ी।**
अमेरिकी गायिका नहीं बल्कि कंपनियों पर था मुकदमा
इस कहानी को अक्सर इस तरह बताया जाता है कि किसी अमेरिकी गायिका ने लता मंगेशकर का गाना चुरा लिया और उसे हजारों करोड़ रुपये देने पड़े। वास्तविक मामला इससे थोड़ा अलग था।
विवाद Truth Hurts के ‘Addictive’ गाने से जरूर जुड़ा था, लेकिन 500 मिलियन डॉलर की कानूनी कार्रवाई मुख्य रूप से गाने के पीछे मौजूद रिकॉर्ड और प्रोडक्शन कंपनियों के खिलाफ थी।
इसलिए इसे सीधे तौर पर “गायिका को 4000 करोड़ का जुर्माना देना पड़ा” कहना भ्रामक होगा।
यह मामला म्यूजिक इंडस्ट्री में **सैंपल क्लियरेंस** के महत्व का बड़ा उदाहरण बन गया। किसी पुराने गाने की रिकॉर्डिंग का हिस्सा नए गाने में इस्तेमाल करने से पहले उससे जुड़े अधिकारों की अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
‘Addictive’ में साफ सुनाई देती है लता की आवाज
‘Addictive’ को सुनने पर भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए लता मंगेशकर की आवाज पहचानना मुश्किल नहीं था। पुराने हिंदी गाने के हिस्से को आधुनिक अमेरिकी R&B और हिप-हॉप प्रोडक्शन के साथ मिलाया गया था।
यही सैंपल ‘Addictive’ की सबसे अलग पहचान में से एक बन गया।
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय संगीत का अमेरिकी पॉप और हिप-हॉप पर प्रभाव केवल इसी मामले तक सीमित नहीं रहा।
Britney Spears के ‘Toxic’ का भी भारत से कनेक्शन
लता मंगेशकर से जुड़ा एक और अंतरराष्ट्रीय संगीत कनेक्शन अक्सर चर्चा में आता है। Britney Spears के सुपरहिट गाने **‘Toxic’** में 1981 की फिल्म *एक दूजे के लिए* के गाने **‘तेरे मेरे बीच में’** के स्ट्रिंग हिस्से का सैंपल इस्तेमाल हुआ।
‘तेरे मेरे बीच में’ को लता मंगेशकर और एसपी बालासुब्रह्मण्यम ने गाया था। इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था और गीत आनंद बख्शी ने लिखा था।
‘Toxic’ बाद में Britney Spears के करियर के सबसे मशहूर गानों में शामिल हुआ और इसे Grammy Award भी मिला।
हालांकि ‘Toxic’ और ‘Addictive’ के मामलों को आपस में मिलाना नहीं चाहिए। **500 मिलियन डॉलर वाला कॉपीराइट मुकदमा ‘Addictive’ और ‘थोड़ा रेशम लगता है’ से संबंधित था, Britney Spears के ‘Toxic’ से नहीं।**
क्यों जरूरी है सैंपल की अनुमति?
आधुनिक संगीत में पुराने गानों के छोटे हिस्से को नए ट्रैक में इस्तेमाल करना सामान्य है। इसे संगीत की भाषा में ‘sampling’ कहा जाता है।
लेकिन किसी रिकॉर्डिंग का छोटा हिस्सा इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं कि वह स्वतः मुफ्त हो जाता है। उस रिकॉर्डिंग और संगीत रचना पर अलग-अलग कॉपीराइट हो सकते हैं।
इसीलिए बड़े रिकॉर्ड लेबल किसी पुराने गाने का सैंपल इस्तेमाल करने से पहले अधिकार रखने वाले व्यक्ति या कंपनी से अनुमति लेते हैं। कई मामलों में इसके बदले फीस या रॉयल्टी भी तय होती है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तो विवाद अदालत तक पहुंच सकता है। ‘Addictive’ का मामला इसी जोखिम का चर्चित उदाहरण बना।
लता मंगेशकर की आवाज का वैश्विक प्रभाव
इस विवाद से अलग एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि 1980 के दशक में रिकॉर्ड हुआ भारतीय फिल्म संगीत दो दशक बाद अमेरिकी मुख्यधारा के संगीत में जगह बना रहा था।
लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हजारों गानों को आवाज दी। उनकी आवाज भारतीय सिनेमा की कई पीढ़ियों का हिस्सा बनी और बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में उनके पुराने गाने नई वैश्विक ऑडियंस तक पहुंचे।
‘थोड़ा रेशम लगता है’ और ‘तेरे मेरे बीच में’ जैसे गानों का दशकों बाद अंतरराष्ट्रीय पॉप संगीत से जुड़ना भारतीय फिल्म संगीत की वैश्विक पहुंच का उदाहरण है।
4000 करोड़ के दावे की असली कहानी
सोशल मीडिया या मनोरंजन से जुड़ी कई खबरों में इस किस्से को सनसनीखेज तरीके से बताया जाता है कि लता मंगेशकर का गाना चोरी करने के बाद अमेरिकी सिंगर को लगभग 4000 करोड़ रुपये देने पड़े।
उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक सही तथ्य यह है कि **Saregama ने 500 मिलियन डॉलर का कॉपीराइट मुकदमा दायर किया था।** इसे वास्तविक रूप से भुगतान किया गया हर्जाना बताने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
इसलिए इस कहानी को लिखते समय “4000 करोड़ रुपये का हर्जाना देना पड़ा” की जगह “500 मिलियन डॉलर का मुकदमा दायर हुआ” कहना ज्यादा तथ्यपरक है।
करीब चार दशक बाद भी यह किस्सा याद दिलाता है कि भारतीय फिल्म संगीत की धुनें कितनी दूर तक पहुंची हैं और डिजिटल संगीत के दौर में किसी पुराने गाने के कुछ सेकंड भी करोड़ों के कॉपीराइट विवाद की वजह बन सकते हैं।
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