पुराने दौर की कमाल की Technology , बिना ड्रोन के शूट हुआ यादगार सीन

Entertainment मनोरंजन : फिल्ममेकिंग की दुनिया में अक्सर ऐसे किस्से सामने आते हैं जो यह दिखाते हैं कि पुराने दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद निर्देशक कितनी रचनात्मकता के साथ काम करते थे। ऐसा ही एक दिलचस्प उदाहरण 1995 में आई फिल्म ‘ला हाइने’ से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे लेकर आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा होती है।
कहा जाता है कि इस फिल्म में एक ऐसा शॉट शामिल है, जो देखने में बिल्कुल ड्रोन शॉट जैसा लगता है। खास बात यह है कि जिस समय यह फिल्म बनाई गई थी, उस समय न तो आधुनिक ड्रोन तकनीक उपलब्ध थी और न ही आज की तरह उन्नत VFX या ग्रीन स्क्रीन तकनीक का व्यापक इस्तेमाल होता था। ऐसे में दर्शक अक्सर हैरान रह जाते हैं कि आखिर यह दृश्य कैसे फिल्माया गया होगा।फिल्म ‘ला हाइने’ अपनी सख्त और यथार्थवादी कहानी के लिए जानी जाती है। इसमें तीन युवकों की कहानी दिखाई गई है, जो एक पुलिस अधिकारी को बंधक बनाकर अपने दोस्त को बचाने की कोशिश करते हैं। कहानी की शुरुआत उस घटना से होती है, जब एक युवा लड़के की पुलिस हिरासत में कथित टॉर्चर के कारण मौत हो जाती है। इस घटना के बाद शहर में तनाव और दंगे फैल जाते हैं।
आगे की कहानी में तीनों दोस्त एक पुलिस स्टेशन से खोई हुई बंदूक हासिल कर लेते हैं और इसी हथियार के दम पर एक पुलिस अधिकारी को बंधक बना लेते हैं। उनकी मांग साफ होती है कि अगर उनके दोस्त को नुकसान पहुंचा, तो वे उस अधिकारी की जान ले लेंगे। यह कहानी सामाजिक असंतोष, सिस्टम पर अविश्वास और युवाओं के गुस्से को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाती है।फिल्म की खासियत इसकी रियलिस्टिक अप्रोच और लोकेशन शूटिंग मानी जाती है। बताया जाता है कि कई सीन बेहद जोखिम भरे तरीके से शूट किए गए थे, जिससे दर्शकों को कहानी का असली प्रभाव महसूस हो सके। इसी कारण यह फिल्म समय के साथ एक कल्ट क्लासिक बन गई और फिल्म छात्रों तथा सिनेमा प्रेमियों के बीच आज भी चर्चा का विषय बनी रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने दौर की फिल्मों में तकनीक की कमी के बावजूद कहानी कहने की कला और सिनेमैटिक सोच बहुत मजबूत होती थी। यही कारण है कि ऐसे दृश्य आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं और यह सवाल उठाते हैं कि बिना आधुनिक तकनीक के इतने प्रभावशाली शॉट कैसे संभव हुए।‘ला हाइने’ जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि मजबूत कहानी और क्रिएटिव विजन के सामने तकनीकी सीमाएं बड़ी बाधा नहीं बनतीं। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी फिल्ममेकिंग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जाती है।





