
मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे नहीं गाड़तीं, बल्कि एक पूरे दौर की पहचान बन जाती हैं। साल 1990 में रिलीज हुई निर्देशक महेश भट्ट की कल्ट क्लासिक फिल्म 'आशिकी' (Aashiqui) एक ऐसी ही मिसाल है। इस फिल्म की रिलीज को 36 साल पूरे हो रहे हैं और इस खास मौके पर फिल्म के दिग्गज व मशहूर गीतकार समीर अंजान ने फिल्म के निर्माण, इसके प्रतिष्ठित पोस्टर और इसकी ऐतिहासिक महासफलता को लेकर कई ऐसे हैरान करने वाले खुलासे किए हैं, जिन्हें आज से पहले बहुत कम लोग जानते थे। समीर अंजान ने भावुक होते हुए कहा, "आशिकी मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि मेरे पूरे करियर का मील का पत्थर (Milestone) है। इस फिल्म के संगीत ने जो रिकॉर्ड बनाया है, उसे तोड़ पाना आज के दौर में किसी के लिए भी नामुमकिन के बराबर है।"
फिल्म नहीं, पहले एक म्यूजिक एल्बम के रूप में शुरू हुआ था सफर
समीर अंजान ने एक बेहद दिलचस्प वाकया साझा करते हुए बताया कि 'आशिकी' शुरुआत में कोई फिल्म थी ही नहीं। यह सफर एक साधारण म्यूजिक एल्बम के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने बताया, "उस दौर में नदीम-श्रवण और मैं संघर्ष कर रहे थे। एक बार मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल जी नदीम-श्रवण का एक कंपोजिशन (गाना) गाने आईं। गाना सुनने के बाद वह इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने हमसे कहा कि आप लोग टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार जी से क्यों नहीं मिलते? इस पर नदीम-श्रवण ने बड़ी लाचारी से कहा कि दीदी, गुलशन जी बहुत बड़े आदमी हैं और हम बिल्कुल नए हैं, उन तक पहुंचना हमारे लिए नामुमकिन है।"
इसके बाद अनुराधा पौडवाल खुद इन तीनों को गुलशन कुमार से मिलवाने ले गईं। गुलशन कुमार को वे धुनें और गाने इतने पसंद आए कि उन्होंने तुरंत एक सिंगल म्यूजिक एल्बम तैयार करने का फैसला कर लिया। इस तरह एल्बम के गाने पहले रिकॉर्ड कर लिए गए।
जब गानों से प्रेरित होकर महेश भट्ट ने खड़ी कर दी फिल्म की कहानी
जब यह म्यूजिक एल्बम बनकर तैयार हुआ, तो गुलशन कुमार ने इसके शानदार गानों को मशहूर निर्देशक महेश भट्ट को सुनाया। महेश भट्ट गानों की रूह और समीर अंजान के लिखे शब्दों से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने गुलशन कुमार से कहा, "ये सिर्फ एक एल्बम नहीं है, इन गानों के भीतर एक पूरी फिल्म छुपी हुई है। मैं इन गानों को आधार बनाकर एक मुकम्मल लव स्टोरी (फिल्म) डायरेक्ट करना चाहता हूं।" इसके बाद महेश भट्ट ने उन गानों के इर्द-गिर्द 'आशिकी' की स्क्रिप्ट तैयार की। यह बॉलीवुड के इतिहास का एक अनोखा उदाहरण है जहां कहानी के लिए गाने नहीं बने, बल्कि गानों से प्रेरित होकर पूरी फिल्म का निर्माण किया गया।
मुंह छिपाकर पोस्टर बनाने की क्या थी अनोखी रणनीति?
समीर अंजान ने फिल्म के उस आइकॉनिक पोस्टर के पीछे का राज भी खोला, जिसमें राहुल रॉय और अनु अग्रवाल एक कोट के अंदर अपना मुंह छिपाए हुए नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि उस दौर में यह एक बेहद साहसी और अनोखी मार्केटिंग रणनीति थी। फिल्म के मुख्य कलाकार बिल्कुल नए थे और बॉलीवुड में कोई उन्हें नहीं जानता था। महेश भट्ट और गुलशन कुमार चाहते थे कि दर्शक सिनेमाघरों में कलाकारों का चेहरा देखकर नहीं, बल्कि फिल्म के जादुई संगीत और सस्पेंस से आकर्षित होकर आएं। कोट के पीछे चेहरा छिपाने वाले इस पोस्टर ने दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता पैदा कर दी और जब फिल्म रिलीज हुई, तो इसने इतिहास रच दिया। समीर अंजान ने अंत में कहा कि वह एक ऐसा दौर था जब गीत-संगीत को फिल्मों की आत्मा माना जाता था और 'आशिकी' की महासफलता इस बात का सबसे बड़ा सबूत है।





