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भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय का हुआ अंत

Saba Naaz
27 Jun 2026 7:15 PM IST
भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय का हुआ अंत
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चेन्नई: भारतीय सिनेमा जगत, विशेषकर तमिल फिल्म उद्योग से एक बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, दिग्गज अभिनेता, कहानीकार और बेहतरीन निर्देशक के. भाग्यराज का चेन्नई में दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के कारण निधन हो गया है। उन्होंने महज 73 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे मनोरंजन जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर उनके चेन्नई स्थित निवास स्थान पर लाया गया, वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय तुरंत उनके आवास पर पहुंचे और दिवंगत अभिनेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस अत्यंत दुखद घड़ी में भाग्यराज के बेटे शांतनु भाग्यराज, पत्नी पूर्णिमा और बेटी सरन्या भाग्यराज का रो-रोकर बुरा हाल था, जिन्हें मुख्यमंत्री और वहां उपस्थित सिनेमा जगत की हस्तियों ने ढांढस बंधाया।

कृष्णास्वामी भाग्यराज था असली नाम, असिस्टेंट डायरेक्टर से की थी शुरुआत

तमिलनाडु के ईरोड जिले में जन्मे के. भाग्यराज का असली नाम कृष्णास्वामी भाग्यराज था। बचपन से ही सिनेमा के प्रति गहरा लगाव होने के कारण वे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने चेन्नई पहुंचे थे। उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत तमिल सिनेमा के महान और मशहूर निर्देशक भारतीराजा के सहायक (असिस्टेंट डायरेक्टर) के तौर पर की थी। भारतीराजा के साथ काम करते हुए उन्होंने फिल्म निर्माण, पटकथा लेखन और निर्देशन की बारीकियों को बेहद करीब से सीखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आगे चलकर एक्टर, राइटर और डायरेक्टर तीनों ही रूपों में अपनी अद्वितीय प्रतिभा का लोहा मनवाया।

शुरुआती संघर्ष और सबसे चर्चित फिल्में

करियर के शुरुआती दौर में भाग्यराज ने छोटे-छोटे किरदारों से अभिनय की शुरुआत की। उन्होंने ’16 वायथिनिले’ (1977) और ‘सिगप्पु रोजाक्कल’ (1978) जैसी प्रतिष्ठित फिल्मों में छोटी मगर यादगार भूमिकाएं निभाईं। इसके साथ ही, उन्होंने निर्देशक भारतीराजा के साथ ’16 वायथिनिले’ और ‘किझक्के पोगुम रेल’ में बतौर सहायक निर्देशक काम जारी रखा। उनकी लेखन क्षमता भी कमाल की थी; उन्होंने ‘किझक्के पोगुम रेल’ (1978) और सस्पेंस थ्रिलर ‘टिक टिक टिक’ (1981) की लाजवाब कहानियां लिखीं। एक स्वतंत्र निर्देशक और अभिनेता के रूप में उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में ‘अंधा 7 नाटकल’ (1981), ‘मुथानई मुडिचु’ (1983), ‘थूरल निन्नु पोचु’ (1982) और ‘इंद्रु पोई नालाई वा’ (1981) शामिल हैं। उन्होंने अपने शानदार करियर में 25 से अधिक फिल्मों का सफल निर्देशन किया और 75 से अधिक फिल्मों में मुख्य व विभिन्न किरदार निभाकर तमिल सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर 'आखिरी रास्ता' का किया था निर्देशन

के. भाग्यराज की लोकप्रियता सिर्फ दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) में भी अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई थी। साल 1986 में उन्होंने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अभिनीत ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आखिरी रास्ता’ का निर्देशन किया था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन डबल रोल (पिता और पुत्र) में नजर आए थे, और भाग्यराज के सधे हुए निर्देशन की बदौलत यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कल्ट क्लासिक साबित हुई।

इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में अभिनय का रुख भी किया। वह वर्ष 1996 में आई सुपरहिट फिल्म ‘मिस्टर बेचारा’ में अनिल कपूर और श्रीदेवी के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार में नजर आए थे। इसके बाद साल 2000 में उन्होंने ‘पापा द ग्रेट’ फिल्म में कृष्णा कुमार, नगमा और सत्य प्रकाश के साथ स्क्रीन शेयर की थी।

के. भाग्यराज का इस तरह अचानक चले जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से स्क्रीनप्ले और कॉपियों के जरिए इंसानी भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करने वाले एक महान युग का अंत हो गया है। सोशल मीडिया पर रजनीकांत, कमल हासन सहित देश भर के तमाम बड़े सितारों और राजनेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

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