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- अतीत को भूले बिना...

राजा राममोहन राय (1772-1833) ने पश्चिमी विचार और संस्कृति की सकारात्मक चीजें अपनाकर हमारे समाज और धर्म में सुधार लाने की कोशिश की थी। इस अर्थ में उनकी भूमिका वैसी ही थी, जैसी कि पश्चिमी संदर्भ में मार्टिन लूथर (1483-1546) की थी। लूथर ने जिस तरह मध्यकालीन गिरावट और भ्रष्टाचार के खिलाफ बाइबल को मानक बनाया, उसी तरह राममोहन ने वेद को मानक माना, क्योंकि उन्होंने पाया कि यह प्राचीनतम हिंदू धर्मग्रंथ पवित्र और मिलावट रहित है। लेकिन लूथर से वह इस अर्थ में अलग थे कि उन्होंने दूसरी सभ्यताओं, संस्कृतियों और धर्मों में जो कुछ श्रेष्ठ और उपयोगी पाया, उसे हिंदू धर्म और विचार में शामिल किया। उदाहरण के लिए, मुस्लिमों से मेलजोल के कारण उन्हें एकेश्वरवाद ने आकर्षित किया, तो ईसाइयत की नैतिक शिक्षा से भी वह प्रभावित थे और मानते थे कि आध्यात्मिक चिंतन के लिए संन्यास या वैराग्य जरूरी नहीं है।





