सम्पादकीय

क्या लेफ्ट का आखिरी किला इस मंदिर के मुद्दे की वजह से धराशाई हो जाएगा?

Gulabi
1 April 2021 10:58 AM GMT
क्या लेफ्ट का आखिरी किला इस मंदिर के मुद्दे की वजह से धराशाई हो जाएगा?
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बचाने पर पूरा जोर दे रही है. लेकिन

बचाने पर पूरा जोर दे रही है. लेकिन जिस तरह का सियासी समीकरण पिनराई विजयन सरकार के खिलाफ केरल में बनता जा रहा है उसे देख कर लग रहा है कि इस बार लेफ्ट का आखिरी किला ढहने की कगार पर आ गया है. आपको याद होगा जब केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आंदोलन चल रहे थे, तब सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय आया था जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को किसी भी आधार पर सबरीमाला में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता. लगता है मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा लेफ्ट की सरकार के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित होने वाला है.


शुरुआत में पिनराई विजयन सरकार को लगा कि वह इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अपना वोट बैंक मजबूत कर सकती है. इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का खुलकर समर्थन किया और पुलिस प्रोटेक्शन का सहारा लेते हुए 2 जनवरी 2019 को सबरीमाला मंदिर में 2 महिलाओं को प्रवेश करा दिया. शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और पिनराई विजयन सरकार के कदम से बीजेपी और कांग्रेस भी संतुष्ट थी, लेकिन जैसे ही केरल के तमाम हिंदू संगठनों और लोगों ने इस फैसले का विरोध करना शुरू किया तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे पर जनता के साथ हो ली और वहीं से लेफ्ट सरकार को गिरने की मुहिम शुरू हो गई.

पिनराई विजन सरकार को इसका खमियाजा 2019 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला जब एलडीएफ (LDF)पूरे केरल में केवल 1 सीट ही जीत पाई. जबकि 20 में से 19 सीटों पर कांग्रेस समर्थित यूडीएफ (UDF) का परचम लहराया. भारतीय जनता पार्टी का वोट परसेंटेज जरूर बढ़ा लेकिन उसे एक भी सीट जीतने में सफलता नहीं मिली.

क्या हुआ था 2 जनवरी 2019 को
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर पर एक फैसला दिया जिसमें कहा गया कि इस मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाएं जा सकती हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर कोई प्रवेश करने से नहीं रोक सकता है. विजयन सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया और 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए पिनराई विजन ने 2 जनवरी 2019 को पुलिस प्रशासन की मदद से 40 साल के आसपास की दो महिलाओं बिंदु अम्मिनी और कनकदुर्गा को मंदिर में प्रवेश करा दिया. हालांकि, विजयन सरकार का यह पासा उल्टा पड़ गया और जनता इसका खुलकर विरोध करने लगी. विपक्ष ने भी लेफ्ट सरकार पर यह कहते हुए निशाना साधा के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन हिंदू मान्यताओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं उन्हें हिंदू मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए.

कांग्रेस और बीजेपी ने मुद्दे को भुना लिया
शुरुआत में जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला महिलाओं के हक में आया और यह कहा गया कि सबरीमाला मंदिर में हर आयु हर वर्ग की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं तब इस फैसले का स्वागत भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी समेत देश की ज्यादातर पार्टियों ने इसका समर्थन किया था. यहां तक की बीजेपी केरल के वरिष्ठ नेता राजगोपाल और राहुल गांधी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया था. लेकिन जैसे ही यह मुद्दा केरल में आंदोलन की शक्ल लेने लगा कांग्रेस और बीजेपी ने इस मुद्दे को लपक लिया.

सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी आंदोलनकारियों के समर्थन में आई और विजयन सरकार को यह कहते हुए घेरने लगी की मुख्यमंत्री पिनराई विजयन हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के लिए केरल में खतरा पैदा कर रहे हैं. तब केरल के कांग्रेस नेताओं को लगा कि भारतीय जनता पार्टी पूरे मुद्दे को हाईजैक कर लेगी और इसका पूरा-पूरा फायदा उठा लेगी. इसके बाद उन्होंने अपने केंद्रीय नेतृत्व से बात की और उन्हें समझाया कि कांग्रेस किस तरह इस मुद्दे के सहारे केरल की जनता को अपने पाले में कर सकती है.

इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलते ही केरल कांग्रेस ने खुलकर पिनराई विजयन सरकार की मुखालफत करने लगी और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन होने लगे. इसका फायदा भी कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला, जब वह केरल के 20 सीटों में से 19 सीटों पर जीतने में कामयाब रही. इन्हीं में से एक सीट राहुल गांधी की वायनाड सीट भी थी. आपको बता दें राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के अमेठी से हार गए थे.

लेफ्ट के नेता अब जता रहे हैं खेद
2019 में मिली करारी हार को देखकर लेफ्ट के नेताओं को यह अंदेशा हो गया है कि सबरीमाला का मुद्दा उन्हें 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भारी पड़ने वाला है. इसीलिए अब लेफ्ट के कई नेता इस मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रख रहे हैं और विजयन सरकार के उस फैसले पर खेद जता रहे हैं जिसकी वजह से सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं ने प्रवेश किया था. दरअसल विजयन सरकार में पर्यटन मंत्री रहे कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने हाल ही में कहा था कि 'सबरीमाला की घटना ने हम सभी को दुखी किया है, यह नहीं होना चाहिए था' इसके साथ ही उन्होंने जनता से वादा किया है कि जब सुप्रीम कोर्ट का इस मसले पर अंतिम फैसला आएगा तब सरकार उस पर धर्मगुरुओं और राजनीतिक दलों से चर्चा करेगी.

हालांकि, सीपीआईएम के बड़े नेता सीताराम येचुरी ने सुरेंद्रन के इस बयान की मुखालफत की और कहा कि उस वक्त केरल सरकार ने जो किया वही आज भी पार्टी की लाइन है. लेकिन केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 18 मार्च को सुरेंद्रन के बयान का समर्थन करते हुए कहा की जिस दिन भी कोर्ट का अंतिम फैसला आएगा उसके बाद सरकार धर्मगुरुओं और तमाम राजनीतिक दलों से इस पर चर्चा करेगी.

घर-घर जाकर लोगों को समझाने में जुटी CPI(M)
सीपीआईएम ने जहां सबरीमाला मंदिर में 2 जनवरी को हुए घटना को अपनी गलती बताया है, वहीं केरल में CPI(M) कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी थी जिसकी वजह से पिनराई विजयन को सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं को प्रवेश कराना पड़ा. हालांकि, राजनीति में इस तरह के माफ़ी नामें नहीं चलते. अगर देखा जाए तो चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े मुद्दे पर अपनी गलती स्वीकार कर लेना पिनराई विजयन सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे को फिर से जिंदा कर रही है और सुरेंद्रन के बयान पर जमकर राजनीति हो रही है.

विजयन सरकार ऐसा करके दोनों तरफ से घिर गई है, एक तो पहले से ही 2 जनवरी की घटना से नाराज लोगों ने विजयन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था, अब उसे अपनी गलती बता कर विजयन सरकार उन वोटों से भी हाथ धो बैठेगी जो उसके इस फैसले से खुश थे. खासतौर से केरल की कुछ महिला वोटर्स और पढ़ा लिखा युवा वर्ग जो समानता की बात करता है.


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