सम्पादकीय

क्या कांग्रेस पार्टी को आंदोलनों से मिलेगी सत्ता की चाबी

Gulabi
11 Nov 2021 6:44 AM GMT
क्या कांग्रेस पार्टी को आंदोलनों से मिलेगी सत्ता की चाबी
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आंदोलनों से मिलेगी सत्ता की चाबी

अजय झा.

अगर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है, तो सफलता एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी का कदम चूमने वाली है और राहुल गांधी जल्द ही देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे. पर ज़रा रुकिए. प्रयत्न अगर सही दिशा में हो तब ही सफलता हाथ लगती है और अगर वह प्रयास गलत दिशा में हो तो सफलता कोसों दूर ही रह जाती है. कांग्रेस पार्टी ने कल घोषणा की कि पार्टी में परिवारवाद के जनक जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन यानि 14 नवम्बर से पार्टी के पखवाड़े पर एक जन जागरण आन्दोलन की शुरुआत करेगी.


योजना काफी महत्वाकांक्षी है. पार्टी के नेता टोपी पहन कर जनता के बीच जाएंगे और उन्हें टोपी पहनाने का प्रयास करेंगे. यह आंदोलन महात्मा गांधी के डांडी मार्च के तर्ज पर आयोजित किया जाएगा, पार्टी के नेता पैदल चल कर जनता के बीच जायेंगे और भारत बीजेपी मुक्त और मोदी मुक्त हो जाएगा. इस आंदोलन का लोगो यानि प्रतिक चिन्ह डांडी मार्च के थीम पर होगा. जिसे 12 नवम्बर को जारी किया जाएगा. जो परिवार गांधी और नेहरु के नाम की रोटी आज तक सेंक रही है, वह एक बार फिर से गांधी और नेहरु के नाम को जनता के बीच भुनाएगी.

प्रयास सही दिशा में हो तभी सफलता हाथ लगती है
अगर प्रयास करने का ही अंक दिया जाए तो कांग्रेस पार्टी को पूरे दस में से दस अंक मिलेगा और पप्पू पास हो जाएगा. पर समस्या यह है कि इस आंदोलन पर भी नेहरु-गांधी परिवार की वही सोच है जिसके कारण पार्टी विनाश के कगार पर पहुंच चुकी है. इसमें नया सिर्फ इतना है कि दिल्ली में बैठ कर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए जनता के बीच पहुंचने के बजाय पार्टी के नेता अब जनता के बीच जाएंगे, भाषण देने की बजाय जानता से सीधी बात होगी, नुक्कड़ सभा होंगी. जनता को जागरूक किया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि उनकी कमर टूटी पड़ी है, क्योंकि मोदी सरकार के शासनकाल में महंगाई ने जनता की कमर तोड़ दी है.

महंगाई का असली जिम्मेदार कौन है?
सच है कि भारत में इनदिनों महंगाई बेलगाम होती जा रही है. फल, सब्जी, खाने का तेल, गैस, पेट्रोल, डीजल आदि की कीमतें आसमान चूमने लगी हैं, जिससे आम जनता परेशान है. पर सुना है कि कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व में महंगाई बढ़ गयी है. तो क्या, भारत इसका अपवाद नहीं हो सकता था. अगर पेट्रोल उत्पादक देश कच्चे तेल की कीमत बढ़ा रहे हैं तो गलती मोदी की है. अगर चीन ने खाद में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की कीमत बढ़ा दी है तो गलती मोदी की ही है. अगर असमय बारिश के कारण टमाटर की फसल ख़राब हो गयी और अब टमाटर और सेब की कीमत एक जैसी हो गयी है तो भी गलती मोदी सरकार की है. मोदी सजा के हकदार हैं क्योंकि उन्होंने नेहरु-गांधी परिवार को बेरोजगार जो बना दिया है और जिस कुर्सी पर उनका खानदानी हक़ था उस पर मोदी बैठे हुए हैं.

दिग्विजय सिंह के हाथों में है आंदोलनों की बागडोर
पर यह कहना भी अनुचित होगा कि भारत का प्रमुख विपक्षी दल सरकार की आलोचना ना करे और चुपचाप बैठा रहे. अगर पिछले लगभग एक साल से चल रहे किसान आंदोलन के बावजूद सरकार अडिग है तो कांग्रेस पार्टी को उससे भी कुछ बड़ा करना होगा, और वह महंगाई के विरोध में जन जागरण आंदोलन है. कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गयी है जिसका पूर्णकालिक काम ही होगा लगातार एक के बाद एक आंदोलन करना. दिग्विजय सिंह ने कल ही विधिवत घोषणा भी कर दी कि महंगाई पर आन्दोलन के बाद बेरोजगारी के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन होगा और उसके बाद कृषि के मुद्दे पर.

योजना बहुत अच्छी है कि पार्टी अब जनता के बीच जाएगी. पर इससे सफलता मिलेगी इसकी गारंटी नहीं है. कारण, जनता बेवकूफ नहीं है, उसे सब पता है कि मोदी सरकार की खामियां क्या हैं. नेगेटिव सोच के साथ चलना ही कांग्रेस पार्टी की गलती रही है, जिससे मोदी और बीजेपी को बल मिलता रहा है. जरूरत थी कि कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जा कर मोदी सरकार की विफलताओं से जनता को अवगत कराने की जगह यह बताती कि इस परिस्थति में अगर उसका शासन होता तो वह क्या करती. पार्टी के भविष्य के लिए सरकारी खजाना लुटाने और भारत को पाकिस्तान की तरह कंगाल बनाने के अलावा उनकी और क्या योजना है?

सबसे महत्वपूर्ण बात कि कैसे राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में गांधी का राम राज्य स्थापित कर पाएंगे और किस तरह वह अपने परदादा, दादी और पिता से अलग और बेहतर शासक साबित होंगे. यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निगेटिव सोच के साथ राजनीति करने के कारण हासिये पर पहुंच चुकी पार्टी अब उसी मानसिकता से साथ जन आंदोलन चला कर क्या सफल हो पाएगी?
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