सम्पादकीय

अमरिंदर की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाकर कांग्रेस अपनी लुटिया बचा सकेगी?

Rani Sahu
19 Sep 2021 4:13 PM GMT
अमरिंदर की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाकर कांग्रेस अपनी लुटिया बचा सकेगी?
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पंजाब में सीएम कोई भी बने लेकिन कांग्रेस ने खुद ही अपने गोलपोस्ट में गोल दाग कर विपक्ष के हाथों बड़ा मुद्दा सौंप दिया है

पंकज कुमार। पंजाब में सीएम कोई भी बने लेकिन कांग्रेस ने खुद ही अपने गोलपोस्ट में गोल दाग कर विपक्ष के हाथों बड़ा मुद्दा सौंप दिया है. मोदी लहर में पार्टी को 13 में आठ सीटें जिताने वाला और पिछले दो बार से विधानसभा चुनाव में विजयी रहने वाले अमरेन्दर सिंह ने अपमानित सीएम पद से किनारा कर लिया . ज़ाहिर है अमरिन्दर सिंह सरीखे नेता का हाशिए पर धकेले जाने से पार्टी का भविष्य बेहतर होने वाला है इसकी गुंजाइश नहीं के बराबर ही दिखाई पड़ता है . . ज़ाहिर है कांग्रेस के अंदर मची घमासान कमजोर पड़ी अकाली दल ,आम आदमी पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकती है.

जरा सोचिए मोदी लहर में 13 लोकसभा सीटों में 8 और दो लगातार विधानसभा चुनाव अपने दम पर जिताने वाला नेता चुनाव से ठीक 6 महीने पहले हाशिए पर धकेल दिया गया. इसकी एक मात्र वजह अमरिन्दर सिंह की अपनी लोकप्रियता और दमदार व्यक्तित्व था जो पार्टी हाईकमान को रास नहीं आ रहा था. अमरिन्दर सिंह ने बीजेपी के दिग्गज अरुण जेटली को अमृतसर से लोकसभा चुनाव में पटकनी देकर साबित किया था कि मोदी लहर में भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है. लेकिन अमरिन्दर सिंह की लोकप्रियता उनके गले की फांस बन गई. कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी खुद अमेठी से चुनाव हारकर दक्षिण के केरल से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने में कामयाब हुए. वहीं उनके नेतृत्व में पार्टी 50 सीटों का आंकड़ा छूने में नाकामयाब रही .लेकिन युवराज की सफलता और विफलता की ऑडिट करने का दम भला पार्टी में कौन कर सकता है.
कांग्रेस में राहुल गांधी कोई गलती नहीं कर सकते
राहुल कांग्रेस के युवराज हैं और महाराज भी तभी तो महज सांसद रहते हुए उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के कैबिनेट मसौदे को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था. इसलिए किंग कैन डू नो रॉंग (King Can do no wrong) वाली बात यहां पूरी तरह चरितार्थ होती है. चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के दिग्गज और लोकप्रिय नेता को बदल कर कांग्रेस ने अपने सबसे मजबूत समझे जाने वाले गढ़ को खुद व खुद हाशिए पर धकेल दिया है. पंजाब कांग्रेस में अब एक नहीं बल्कि कई धरा होगा जो एक दूसरे को विफल दिखाने का प्रयास करेगा और ऐसे में कमजोर अकाली और बीएसपी सत्ता में वापसी करे या फिर आप को दबदबा बनाने का मौका मिले तो इसका क्रेडिट अकाली, बीएसपी और आप को नहीं बल्कि कांग्रेस हाईकमान के फैसले को ही जाएगा. जिन्हें पार्टी की जीत से ज्यादा लोकप्रिय नेता को हटाकर उसका कद छोटा करना पसंद था .
चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम चुने जाने का मतलब क्या है ?
चन्नी सीएम होंगे और ये फैसला पार्टी हाईकमान को मजबूरी में लेना पड़ा है. पार्टी हाईकमान सिद्धु कैंप के समर्थन में है लेकिन अमरिन्दर फ्लोर टेस्ट में मुश्किल पैदा कर सकते थे इसलिए चन्नी को सीएम के तौर पर चुना गया जो दलित जाति से आते हैं. ज़ाहिर है रंधावा के नाम का विरोध कर सिद्धु ने उन्हें रोक दिया ताकि चुनाव के बाद उनकी संभावना बरकरार रहे. लेकिन फिलहाल चन्नी के लिए सिद्धु और अमरिन्दर के बीच संतुलन बनाकर चलना सबसे बड़ी चुनौती होगी वहीं 6 महीने बाद चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करना कहीं ज्यादा मुश्किल होगा .
पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव से लगातार हाथ पैर मारकर सत्ता तक पहुंचने की कोशिश करने वाली आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढ़ा कहते हैं कि कांग्रेस को जनता ने सत्ता निजी हितों के लिए राजनीतिक घमासान करने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा करने के लिए दिया था.
राघव चड्ढ़ा कहते हैं कि कांग्रेस द्वारा साढ़े चार साल तक किए गए कुशासन का जवाब जनता ज़रूर मांगेगी और इसके लिए कांग्रेस पार्टी सीएम बदलकर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती.
ज़ाहिर है आप और शिरोमणि अकाली दल के लिए कांग्रेस के भीतर मचा घमासान एक अवसर जैसा है जिसे भुनाने का प्रयास दोनों पार्टियां अपने अपने तरीके से करेंगी. ध्यान देने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने किसान आंदोलन को खाद पानी देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी इसलिए पंजाब में अमरिंदर सिंह के हटने के बाद उनकी ताकत को कम आंकना राजनीतिक भूल के अलावा कुछ नहीं होगा.
फिलहाल कांग्रेस चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बना कर एक तरफ 32 फीसदी दलितों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है वहीं अमरिन्दर सिंह के विरोधी रहे चन्नी को सत्ता सौंप कांग्रेस हर हाल में अमरिन्दर सिंह को बदलना चाहती थी ये साबित कर दी है. इसलिए दो महीने में तीन बार कांग्रेस विधायक दल की मीटिंग बुलाकर अमरिन्दर सिंह को हटाना उनका एकमात्र मकसद था.
कांग्रेस के लिए पंजाब चुनाव जीतना आसान नहीं रहने वाला है ?
कांग्रेस के लिए जट सिख सीएम को हटा दलित सिख को सीएम पद देना काउंटर प्रोडक्टिव हो सकता है. सिख बाहुल्य प्रदेश में दलित का सीएम बनाना कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है. खास तौर पर जट सिख की आबादी 25 फीसदी से ज्यादा है और पंजाब की राजनीति पर उनका दबदबा रहा है. ऐसे में अमरिन्दर सिंह के अलावा रंधावा को सीएम नहीं बनने देने से पंजाब की सियासत में अलग समीकरण बन सकता है जो कांग्रेस पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर मचे घमासान के दरमियान दो बड़े नेताओं ने एक दूसरे पर आईएसआई से सांठगांठ का आरोप लगाकर बैठे बिठाए विपक्ष को बड़ा मुद्दा थमा दिया है.
आईएसआई से संबंध रखने के आरोपों से कैसे बचेगी कांग्रेस?
बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते आई है और पंजाब कांग्रेस के दो दिग्गजों द्वारा एक दूसरे पर आईएसआई और पाकिस्तान के साथ सांठगांठ को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताना विपक्ष के लिए सुनहरा अवसर प्रदान करना है. बीजेपी पूरे मसले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर उठाने लगी है वहीं कांग्रेस के लिए इसका काट ढ़ूंढ़ना आसान नहीं रहने वाला है. क्योंकि आरोप लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि पार्टी के दो कद्दावर नेता हैं जिनमें एक अमरिन्दर सिंह हैं जो साढ़े नौ साल पंजाब के सीएम रहे हैं.
चरणजीत सिंह को सीएम बनने के बाद भी अमरिन्दर सिंह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चन्नी सीएम के पद पर पंजाब को सुरक्षित रखेंगे.
ज़ाहिर है निशाना नवजोत सिंह सिद्धु पर है जिन्हें पाकिस्तान आर्मी चीफ बाजवा और पीएम इमरान खान का दोस्त बताकर अमरिन्दर उन्हें देश और पंजाब के लिए गंभीर खतरा बता चुके हैं. अमरिन्दर सिंह कह चुके हैं कि पंजाब में 35 हजार लोगों की मौत आतंकवाद की भेंट चढ़ चुका है वहीं 1700 सिपाही इसकी चपेट में आ चुके हैं. इसलिए पंजाब और देश की सुरक्षा के लिए सिद्धु को सीएम नहीं बनने देंगे इसके लिए अमरिन्दर अनवरत लड़ते रहेंगे.
सवाल अमरिन्दर सिंह द्वारा लगाए गए आरोप का है जिसका जवाब कांग्रेस के लिए निकट भविष्य में ढ़ूंढ़ना मुश्किल होने वाला है. सिद्धु खुद अभी तक इन आरोपों पर चुप हैं लेकिन उनके सहायक और पूर्व आईपीएस मुहम्मद मुस्तफा ने कैप्टन को करारा जवाब देते हुए कहा है कि कैप्टन चौदह सालों तक आईएसआई एजेंट के संपर्क में थे.
ज़ाहिर है पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य के दो बड़े कांग्रेसी नेता एक दूसरे पर आईएसआई से सांठ गांठ का आरोप लगा रहे हैं जिसका जवाब बीजेपी के दिग्गज नेता मांगना शुरू कर चुके हैं. बीजेपी पंजाब में चल रहे हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद कांग्रेस को मुद्दे पर चारों तरफ घेरेगी और कहेगी कि कांग्रेस पार्टी के सीएम और प्रदेश अध्यक्ष आईएसआई से संबंध रखते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है .
ज़ाहिर है पंजाब में मचे हाई वोल्टेज ड्रामा से हाईकमान और उनके कुछ चहतों के इगो संतुष्ट हुए हों लेकिन कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी की फज़ीहत प्रदेश सहित राष्ट्रीय फलक पर भी पुरजोर तरीके से हुई है.


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