सम्पादकीय

भगवंत मान ही क्यों बने पंजाब में AAP के CM उम्मीदवार?

Gulabi
18 Jan 2022 11:50 AM GMT
भगवंत मान ही क्यों बने पंजाब में AAP के CM उम्मीदवार?
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आम आदमी पार्टी ने आखिरकार भगवंत मान को ही पंजाब के लिए अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया
आम आदमी पार्टी ने आखिरकार भगवंत मान को ही पंजाब के लिए अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया. खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसकी घोषणा की. हालांकि केजरीवाल ने पंजाब की जनता की राय का हवाला देकर भगवंत मान को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के लिए सबसे उपयुक्त बताया लेकिन भगवंत मान रायशुमारी से पहले ही आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल की पहली पसंद बन गए थे, जिसका जिक्र अरविंद केजरीवाल ने 13 जनवरी की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी किया था.
आइए जानते हैं कि आखिर कैसे भगवंत मान आम आदमी पार्टी का पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरा बने.
1. इकलौते लोकसभा सांसद
भगवंत मान लोकसभा में आम आदमी पार्टी के इकलौते सांसद हैं. 2019 में जब आम आदमी पार्टी और कहीं पर भी सीट नहीं जीत पाई तो भगवंत मान ने पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट लगातार दूसरी बार जीतकर आम आदमी पार्टी को देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में जगह दिलाई. 2019 में भगवंत मान ने संगरूर लोक सभा सीट एक लाख से ज्यादा वोटों से जीती थी.
2. केजरीवाल के करीबी
भगवंत मान पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाते हैं. भगवंत मान 2014 में आम आदमी पार्टी से जुड़े और संगरूर से लोकसभा चुनाव जीते. 2014 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 4 लोकसभा सीटें जीतीं जो सभी पंजाब से थीं. आगे चलकर चार में से दो सांसद मनमुटाव के चलते पार्टी से अलग हो गए लेकिन भगवंत मान के बारे में कभी ऐसी कोई खबर नहीं आई.
2017 में पंजाब में विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद आम आदमी पार्टी में बहुत उथल-पुथल हुई, बहुत से लोगों ने पार्टी छोड़ी लेकिन भगवंत मान हमेशा अरविंद केजरीवाल के साथ बने रहे.
2022 के विधानसभा चुनावों के लिए भी अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान को बिल्कुल अपने साथ रखा और हर मंच पर दोनों साथ ही दिखाई दिए. सबसे खास तस्वीर तब नजर आई जब पटियाला में हो रही शांति यात्रा के दौरान पार्टी के सभी नेता कार्यकर्ता और समर्थक अरविंद केजरीवाल के आगे पीछे कुछ दूरी बनाकर चल रहे थे लेकिन केवल भगवंत मान ही थे जो अरविंद केजरीवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे.
यही नहीं, यात्रा पूरी होने के बाद जब अरविंद केजरीवाल ट्रक पर भाषण देने के लिए चढ़े तो उनके साथ बाकी और कोई नेता नहीं था केवल भगवंत मान थे. अरविंद केजरीवाल के अलावा अगर किसी ने पटियाला की शांति यात्रा में भाषण दिया तो वह भगवंत मान थे. जबकि इससे पहले होता यह रहा था कि जब भी अरविंद केजरीवाल पंजाब में कहीं कोई प्रचार का कार्यक्रम करते थे तो पंजाब आम आदमी पार्टी की टॉप लीडरशिप, प्रभारी और सह प्रभारी समेत तमाम नेता अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द होते थे.
3. मालवा में अच्छी लोकप्रियता
भौगोलिक दृष्टि से पंजाब तीन क्षेत्रों में बंटा हुआ है. मालवा, दोआबा और माझा. दोआबा इलाके में विधानसभा की 23 सीटें हैं, जबकि माझा इलाके में 25. वहीं मालवा इलाके में इलाके में 69 सीटें हैं. मालवा पंजाब का सबसे बड़ा इलाका है और कुछ अपवाद छोड़ दें तो पंजाब का मुख्यमंत्री परंपरागत रूप से मालवा इलाके से ही बनता है क्योंकि यह माना जाता है कि जो मालवा जीतता है वही पंजाब भी जीतता है.
मालवा इलाके में भगवंत मान की अच्छी पकड़ मानी जाती है. आम आदमी पार्टी को 2017 के विधानसभा चुनावों में पंजाब में जो 20 सीटें मिली थीं उनमें से 18 सीटें मालवा इलाके से आई थीं. खुद भगवंत मान की लोकसभा सीट संगरूर मालवा इलाके में आती है.
4. सकारात्मक और आक्रामक प्रचार
आम आदमी पार्टी इस बार पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए बेहद आक्रामक प्रचार कर रही है. इस आक्रामक प्रचार में आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष भगवंत मान सकारात्मक प्रचार पर फोकस कर रहे हैं. सकारात्मक प्रचार यानी आम आदमी पार्टी ने अभी तक दिल्ली में गवर्नेंस का क्या मॉडल दिया है और कैसे वहां पर आम लोगों को राहत देने के लिए मुफ़्त बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं देने का काम किया है और पंजाब में सरकार बनने पर किस तरह से उस मॉडल को यहां पर लागू करेंगे इस पर ज़्यादा बात कर रहे हैं. भगवंत मान 'केजरीवाल की गारंटी' यानी आम आदमी पार्टी के बड़े चुनावी वादे अपने भाषण के जरिए लोगों को बताते हैं.
जब अरविंद केजरीवाल पंजाब के दौरे पर होते हैं तो जो बात अरविंद केजरीवाल हिंदी में बोलते हैं लगभग उन्हीं बातों को भगवंत मान पंजाबी भाषा में लोगों को उन्हें के अंदाज़ में समझाते हैं. कुल मिलाकर भगवंत मान का पंजाब में चुनाव प्रचार बिल्कुल उसी तर्ज पर नजर आता है जैसा दिल्ली में अरविंद केजरीवाल करते दिखते हैं, जबकि पहले भगवंत मान अपने भाषण में और प्रचार में विरोधियों पर हमले या कटाक्ष ज्यादा किया करते थे.
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि भगवंत मान इस बार अपने विरोधियों या विपक्षी पार्टियों पर कटाक्ष या हमले नहीं कर रहे. लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार विपक्षी या विरोधी पर कटाक्ष या हमले बहुत कम हैं और इस पर फोकस ज्यादा है कि अगर आम आदमी पार्टी की पंजाब में सरकार बनी तो पंजाब के लोगों को क्या मिलेगा.
5. मान का नया अंदाज़
भगवंत मान को लगातार ट्रैक और फॉलो करने वाले लोग इस बार उनमें पहले से ज्यादा परिपक्वता देख रहे हैं. भगवंत मान ने अपने लुक्स पर काफ़ी काम किया है, जिसके चलते पिछले चुनाव तक जहां भगवंत मान युवा या राजनीति में नौसिखिया नज़र आते थे वहीं अब एक युवा होने के साथ उनमें परिपक्वता भी नजर आती है.
(शरद शर्मा एनडीटीवी इंडिया में वरिष्ठ विशेष संवाददाता हैं.)
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