सम्पादकीय

किसका विकास

Subhi
22 April 2022 5:56 AM GMT
किसका विकास
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भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में हर तरफ से विकास के लिए नित नए कदम उठाए जाते दिख रहे हैं। सुविधाओं में उन्नति के साथ-साथ देश की जनसंख्या में हर वर्ष या कहें कि प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है।

Written by जनसत्ता; भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में हर तरफ से विकास के लिए नित नए कदम उठाए जाते दिख रहे हैं। सुविधाओं में उन्नति के साथ-साथ देश की जनसंख्या में हर वर्ष या कहें कि प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। अगर ध्यान से समझा जाए तो यह बहुत गंभीर समस्या है। सच यह है कि देश में सुख-सुविधाओं के संसाधन कुछ लोगों तक ही सिमट कर रह गए हैं। अगर देश को 'सबका साथ सबका विकास' के चश्मे से देखा जाए तो देश का एकतरफा हिस्सा ही रोशन नजर आएगा, बाकी सब धुंधला प्रतीत होगा। वास्तव में जिन लोगों को कुछ सुविधाओं की जरूरत है, वे समय रहते उन तक पहुंच ही नहीं पातीं। ऐसे में जन्म लेती हैं अनैतिक भावनाएं, एक दूसरे के प्रति घृणा, नफरत और अनात्मविश्वास।

आज जैसे-जैसे भारत डिजिटल इंडिया की सीढ़ियों पर चढ़ रहा है, वैसे-वैसे महंगाई के पैरों तले गरीबों को दबाता जा रहा है। कहा जाता है कि देश की एक पीढ़ी भावी पीढ़ी के भविष्य के निर्माण में योगदान करेगी। पर क्या कभी हमने जानने की कोशिश की है कि इस बढ़ते भारत में ऐसे कितने बच्चे हैं, जो स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते? उन्हें देश के बारे में तो क्या, अपने आसपास के वातावरण तक के बारे में नहीं पता होता। ऐसे में क्या आप उन बच्चों को दोषी ठहराना चाहेंगे, जिन्हेंं इसका ज्ञान नहीं? या सुविधाओं के नाम पर उनके साथ जो छल हो रहा है उसे?

देश के विकास के लिए हर वर्ष हजारों योजनाएं बनाई जाती हैं, जिनमें से कुछ ही सफल होती हैं, बाकियों का सिर्फ नाम चल रहा है। जमीनी स्तर पर न तो लोगों को उनका लाभ मिल रहा है और न ही विकास हो रहा है। भारत पर कुल 42.5 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज है। इस हिसाब से हर भारतीय करीब 30,776 रुपए के कर्ज के नीचे दबा है। सरकारें आती हैं, जाती हैं। नई योजनाएं आती है, पर कुछ नहीं बदलता है तो वह है निम्नवर्गीय लोगों की स्थिति। देश का गरीब व्यक्ति राजनीति में दिलचस्पी लेता ही नहीं, क्योंकि उसे पता है कि उनकी स्थिति में कोई बदलाव करने वाला नहीं है।

'आत्मनिर्भर भारत' में रोजगार योजना का आरंभ किया गया, जिसका उद्देश्य भारत में नए रोजगार को बढ़ावा देना था। पर आज भारत में बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हैं और प्रतिदिन एक मामूली नौकरी के लिए भी प्रयत्न कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत देश के निम्न व पिछड़े वर्गों के कच्चे मकान को पक्का बनाने की बात कही गई, पर उन लोगों का क्या, जिनके पास घर ही नहीं है और जो ठंड हो या गर्मी, फुटपाथ पर सोने को मजबूर है। हमारे देश में ऐसी हजारों योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन जिन गरीब वर्गों के लोगों का नाम लेकर प्रारंभ की जाती है, आज वही वर्ग इनके तले दबा हुआ है।

इन योजनाओं को अमल में लाने के लिए हर तरह के वादे किए जाते हैं। सुविधाओं के बारे में ज्ञान दिया जाता है। पर इन योजनाओं के होते हुए भी देश में आज क्या स्थिति है? आज जरूरत है आवाज उठाने की कि आखिर ऐसा कब तक चलेगा!


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