सम्पादकीय

जब किसी का घर टूटता है

Subhi
19 Jun 2022 3:42 AM GMT
जब किसी का घर टूटता है
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बदले की भावना से किसी का घर नहीं तोड़ा जाना चाहिए। ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने कहा पिछले सप्ताह। मगर तब तक उत्तर प्रदेश के कई निवासियों के लिए बहुत देर हो चुकी थी।

तवलीन सिंह: बदले की भावना से किसी का घर नहीं तोड़ा जाना चाहिए। ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने कहा पिछले सप्ताह। मगर तब तक उत्तर प्रदेश के कई निवासियों के लिए बहुत देर हो चुकी थी। मेरा खासतौर पर ध्यान प्रयागराज के नागरिक जावेद मोहम्मद पर रहा, जब योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर इस शहर की गलियों में घूमने लगे थे, इसलिए कि उनकी बेटी ने अपना घर टूटने से एक दिन पहले अपनी दलील विडियो रिकार्ड करके सोशल मीडिया पर डाल दी थी। आफरीन फातिमा, छात्रा है जेएनयू की और जिस रात उनके पिता-माता और बहन की गिरफ्तारी हुई थी, वह अपने घर में थी अपनी भाभी के साथ।

विडियो में इस छात्रा ने बताया कि उसके मां-बाप और बहन को गिरफ्तार करने के बाद देर रात उसके घर में पुलिस आई, यह कहने कि अच्छा होगा कि वे घर को खाली करके चली जाएं कहीं। यह भी इत्तला दी कि बुलडोजर उसके घर के आसपास घूम रहे थे और उसको डर था कि जिस घर में उसका परिवार रहता था, उसको गिराने की योजना बन रही थी।

अगले दिन जब इस घर को तोड़ा गया तो हैरानी से मैंने उसको मलबे में तब्दील होते हुए देखा। वह घर कोई कच्ची झुग्गी नहीं था, एक दो-मंजिला पक्का मकान था, जिसको देख कर ऐसा लगा कि किसी ने इसको बहुत प्यार से बनाया था। शाम को मलबे में दिखीं कुर्सियां, मेज, पलंग और वाशिंग मशीन।

इन चीजों के बीच पड़े हुए थे रंगीन कपड़े। जाहिर था कि जावेद मोहम्मद के परिवार को घर से निकलने के लिए इतना कम समय दिया गया था कि वे अपने साथ सिर्फ जरूरी चीजें लेकर जा सके। जो नगरपालिका के अफसर आए थे इस घर को तोड़ने के लिए उन्होंने कहा कि घर अवैध था और इसके टूटने का नोटिस एक महीना पहले भेज दिया था, जिसका जवाब जावेद मोहम्मद ने दिया नहीं।


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