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- इसका क्या जवाब है?

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के प्रति बेरहमी दिखाने और आंदोलन को बदनाम करने के लिए प्रचार अभियान छेड़ने वाली केंद्र सरकार के
पास क्या इस बात कोई जवाब है कि किसानों के लिए बनाई गई योजनाओं को पूरा करने में उसने वैसी ही तत्परता क्यों नहीं दिखाई है? इस हाल में अगर किसान सरकार की नीयत पर शक करते हैं, तो क्या इसका दोष उन्हें दिया जाना चाहिए? इस बात पर गौर कीजिए। कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) मंडियों की पहुंच से दूर कई किसानों, खास कर छोटे एवं सीमांत कृषकों को लाभ पहुंचाने के लिए ग्रामीण हाटों को कृषि बाजार में परिवर्तित करने की योजना खुद सरकार ने बनाई थी। लेकिन वह अब भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। एक वेबसाइट ने इस बारे में आरटीआई के जरिए सूचना हासिल की। इसके मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के 22,000 हाटों को ग्रामीण कृषि बाजार बनाना का लक्ष्य रखा था।





