सम्पादकीय

West Bengal: सिर्फ एक भूल नहीं है भ्रष्टाचार, ममता की इशारा किस ओर?

Rounak Dey
15 Dec 2022 8:40 AM IST
West Bengal: सिर्फ एक भूल नहीं है भ्रष्टाचार, ममता की इशारा किस ओर?
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पुलिस और सीआईडी सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है। क्या ये लोग उन्हें भ्रष्ट मंत्रियों की गतिविधियों के बारे में नहीं बताते होंगे?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आजकल अपनी प्रशासनिक बैठकों और दूसरे मौकों पर एक बात बार-बार दोहरा रही हैं कि सरकार से भूल हो सकती है, उसे सुधारने का मौका देना चाहिए। उनका इशारा शिक्षा सहित उन घोटालों की चल रही जांच की ओर होता है। यह बयान देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटाले के कारण सरकार की तेजी से गिरती साख को बचाने की कोशिश लगता है, मगर आम बंगाली मतदाता भूल और भ्रष्टाचार के अंतर को पूरी तरह समझ रहा है। मुख्यमंत्री ने भी वकालत की पढ़ाई की है और वह भारतीय दंड संहिता की धाराओं से पूरी तरह अवगत होंगी। पूर्व शिक्षा मंत्री की महिला मित्रों के फ्लैटों से 55 करोड़ की नकदी, गहने, फ्लैटों और जमीन के कागजातों की बरामदगी को पार्थ चटर्जी की महज एक भूल नहीं कहा जा सकता। चार-पांच सुनवाइयों के बाद भी उन्हें जमानत इसलिए नहीं मिल रही है कि सीबीआई के मुताबिक वह बहुत प्रभावशाली हैं और बाहर जाकर सबूतों को नष्ट कर सकते हैं।
कोलकाता के मेयर और राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम ने तो वीरभूम में जाकर पशु तस्करी मामले में जेल में बंद अणुब्रत मंडल के संबंध में कहा कि रायल बंगाल टाइगर को कोई कितने दिन पिंजरे में बंद रख सकता है? उसके दो दिन बाद हुई सुनवाई में यही तर्क सीबीआई ने अदालत को दिया कि बाघ को अगर पिंजरे से खोला गया, तो क्या अंजाम हो सकता है! सही है, बाघ शाकाहारी तो नहीं ही होता है। अपनी भूल वाली सफाई के दौरान ममता बनर्जी जब यह कहती हैं कि वह राज्य में किसी की नौकरी नहीं जाने देंगी, तो वह एक और भूल दिन-दहाड़े दोहराती दिखती हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कह दिया है कि जो लोग घूस देकर शिक्षक पद पर बैठे हैं, वे अपनी इच्छा से तुरंत पद छोड़ दें, नहीं तो गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें।
बीते नवंबर महीने में न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने स्कूल सर्विस कमीशन को वर्ष 2016 की परीक्षा के बाद अवैध तरीके से नौकरी पाने वाले सारे लोगों के नाम प्रकाशित करने का आदेश दिया। पहली खेप में नौवीं-दसवीं के छात्रों को पढ़ा रहे 183 लोगों के नाम उजागर हुए। इसके बाद 40 और लोगों का पता लगा। हालांकि सीबीआई के मुताबिक, अवैध भर्तियों की कुल संख्या 952 है। चोरी छिपाने के लिए बहुत सारे खेल हुए। एसएससी के कोलकाता कार्यालय से ओएमआर शीट पहले ही गायब कर दी गई थी। सीबीआई ने गाजियाबाद की उस एक निजी संस्था की मदद ली, जहां शीट्स का मूल्यांकन हुआ था। कई मामलों में ऐसी आशंका है कि माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और टेट परीक्षा में अच्छे अंक पाने वाले अभ्यर्थियों के मौखिक और एप्टीच्यूट टेस्ट में नंबर कम दिए गए।
सत्य छिपाने के लिए चली गई ये चालें क्या भूल की श्रेणी में आती हैं? कलकत्ता हाईकोर्ट ने 23 नवंबर को सीबीआई से यह जांच करने के लिए कहा कि किसके इशारे पर पश्चिम बंगाल एसएससी ने अवैध रूप से अतिरिक्त पद सृजित करके फर्जी शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नौकरी बचाने के लिए याचिका दायर की थी? जब एसएससी के मौजूदा चेयरमैन ने कहा कि इसका फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ, तो जज अभिजीत गंगोपाध्याय बिफर पड़े। उन्होंने यहां तक कि ढाकी (पूजा के ढोल बजाने वालों) सहित विसर्जन और चुनाव आयोग से तृणमूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश करने की धमकी दे दी। सरकार के सामने कुआं है, तो पीछे खाई। अगर नौकरी से हटाए गए लोग अपनी घूस की रकम वापस मांगने लगें, तो सोचिए, राज्य में कैसे अराजक हालात पैदा हो जाएंगे। हालांकि नौकरी से हटाने के आदेश पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन दे रखा है, पर अदालत ने जांच पर कोई रोक नहीं लगाई है। ममता बनर्जी की व्यक्तिगत ईमानदारी पर शक किसी को नहीं है। पुलिस और सीआईडी सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है। क्या ये लोग उन्हें भ्रष्ट मंत्रियों की गतिविधियों के बारे में नहीं बताते होंगे?

सोर्स: अमर उजाला

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