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- आक्सीजन के बाद वैक्सीन...

कोरोना संक्रमण की विभीषिका के दौर में आज जिस स्थिति से देश गुजर रहा है उसकी कल्पना भारत के संवैधानिक ढांचे के भीतर इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि हमारे दूरदर्शी संविधान निर्माताओं ने भारत को ऐसा राज्यों का संघ (यूनियन आफ इंडिया) बनाया जिसमें राज्यों के सत्वाधिकारों का संरक्षक केन्द्र सरकार को बनाया गया। संविधान में यह काम इतनी बारीकी और शास्त्रीय कशीदाकारी से किया गया कि कोई भी राज्य किसी भी सूरत में कैसी भी विषम परिस्थिति में स्वयं को अकेला खड़ा न पाये और भारतीय संघ की सरकार का सुरक्षात्मक छाता खुल जाये परन्तु इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि राज्य आपस में इस तरह मिलजुल कर रहें जिस तरह एक ही फलदार 'वृक्ष' पर विभिन्न आकार के 'फल' रहते हैं। हमारे पुरखे हमें जो यह व्यवस्था सौंप कर गये थे उसका मन्तव्य यही था कि हर हालत में भारत की एकता और संप्रभुता बनी रहे किन्तु कोरोना संकट के दौरान जिस तरह पहले आक्सीजन युद्ध चला और अब वैक्सीन युद्ध शुरू हुआ है उससे कुछ गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पहला और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि देश की 139 करोड़ की आबादी को देखते हुए क्या हमारे पास पर्याप्त मात्रा में कोरोना वैक्सीन है? दूसरा सवाल इन वैक्सीनों के वितरण का है।





