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- लक्ष्य को हासिल करने...

एक ऐसे समय जब केंद्र सरकार यह चाह रही है कि टीकाकरण अभियान युद्धस्तर पर चले, तब कुछ राज्यों की ओर से टीकों की कमी का सवाल खड़ा किया जाना असमंजस पैदा करता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि टीकाकरण पर संकीर्ण राजनीति होने लगी है या फिर उनकी आपूर्ति में वांछित तेजी न आ पा रही हो? सच जो भी हो, टीकाकरण अभियान को गति देना तभी संभव होगा, जब टीकों की कमी का कोई मसला सामने न आए। हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसे आंकड़े जारी कर दिए कि कितने टीकों की आपूर्ति की जा चुकी है और अभी तक कितनों का उपयोग हुआ है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि आपूर्ति किए गए और इस्तेमाल में लाए गए टीकों की संख्या में कोई बहुत अंतर नहीं है। इन स्थितियों में एक तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि राज्यों को पर्याप्त मात्रा में टीकों की आपूर्ति होती रहे और दूसरे यह कि प्रतिदिन कम से कम 50 लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य अवश्य हासिल हो। इस सबके बीच टीकों के खराब होने के कारणों का भी निवारण किया जाना चाहिए। इसका कोई मतलब नहीं कि कुछ राज्यों में टीकों के खराब होने की दर 15-16 प्रतिशत से भी अधिक बनी रहे।





