सम्पादकीय

बिखरा हुआ है खतरों पर नजर रखने वाला तंत्र

nidhi
31 Aug 2026 12:09 PM IST
बिखरा हुआ है खतरों पर नजर रखने वाला तंत्र
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खतरों पर नजर रखने वाला तंत्र
डॉ. आनंद शर्मा।
हमें समझना होगा कि हिमालय में ग्लेशियर, चट्टान और मिट्टी सब कुछ है। एक तरह से यह काफी कमजोर है। यह दिन में गर्म होता है और रात में ठंडा होता है। इसमें दरारें आती हैं। दूसरा पानी कई बार पहाड़ में रास्ता बनाता है तो इससे भी पहाड़ अस्थिर होता है।
भूकंप का असर भी पहाड़ों पर होता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की वजह से भी हिमस्खलन होता है। अहम बात यह है कि कोई भी भूस्खलन होगा, हिमस्खलन होगा या किसी ग्लेशियर का हिस्सा टूटेगा तो उसके लिए ट्रिगर चाहिए। भूकंप ट्रिगर बन सकता है, बारिश भी ट्रिगर बन सकती है। तिब्बत में हिमस्खलन के लिए भूकंप ट्रिगर बना और बारिश पहले से हो रही थी और इससे हाड्रोलिक प्रेशर बना।
इससे चट्टान का बड़ा हिस्सा नीचे खिसक गया और इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ भी नीचे आ गई। इससे जो फ्लैश फ्लड आया उसमें समय बहुत कम मिला। भूस्खलन, भूकंप, हिमस्खलन, ग्लेशियर टूटना, ये सब पहाड़ के खतरे हैं। अब बात आती है निगरानी की तो भारत में कई संस्थाएं हैं जो झीलों की निगरानी करती है। कई झीलों को खतरे की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन झीलों की लगातार निगरानी हो रही है।
बात होती है कि सेटेलाइट से निगरानी हो रही है लेकिन सेटेलाइट से आज तक कोई अनुमान आया नहीं है। सेटेलाइट से घटना के बाद उसका पोस्टमार्टम होता है। सवाल यह है सेटेलाइट पिक्चर पहले भी थी तो आपने पहले क्यों नहीं बताया। देश में बाढ़ की निगरानी कोई और संस्था करती है और हिमस्खलन की कोई और। भूकंप पर मौसम विज्ञान नजर रखता है।
इस तरह से हमारा निगरानी तंत्र बहुत बिखरा हुआ है। इसकी निगरानी के लिए एक यूनीफाइड सिस्टम चाहिए, जिसमें जमीन पर काम करने वाले और इस तरह के काम का अनुभव रखने वालों की टीम हो। यह काम 24 गुणे 7 और 365 तक लगातार करना होता है। भारत में अभी इसके लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल लोगों की टीम नहीं है। पूरे इलाके में नजर रखन के लिए ड्रोन चाहिए जो लाइव फीड भेज सकें और इसका टीमें इसका विश्लेषण करें। तब भी अलर्ट के लिए 30 मिनट का समय ही मिलेगा।
हालांकि यह समय कम नहीं होता है और अगर नेपाल में आई बाढ़ के मामले में लोगों को 30 मिनट पहले ही अलर्ट किया गया होता तो बहुत से लोगों की जान बच सकती थी। प्राकृतिक आपदा के क्षेत्र में काम करने वाले ज्यादातर लोग शोध कर्ता हैं। हमें आपरेशनल लोग चाहिए और पैशन के साथ काम करें। तभी हम देश में एक मजबूत और प्रभावी निगरानी तंत्र बना पाएंगे।
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