सम्पादकीय

कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति के लिए पार्टी का कामचलाऊ रवैया जिम्मेदार, जून में मिलेगा नया अध्यक्ष

Neha Dani
23 Jan 2021 1:52 AM GMT
कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति के लिए पार्टी का कामचलाऊ रवैया जिम्मेदार, जून में मिलेगा नया अध्यक्ष
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इस वर्ष मई में होने वाला कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अब हर हाल में जून में कराने की घोषणा की गई है |

इस वर्ष मई में होने वाला कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अब हर हाल में जून में कराने की घोषणा की गई है, लेकिन कोई जरूरी नहीं कि ऐसा हो ही। यह इसलिए, क्योंकि कांग्रेस का नेतृत्व इसके लिए तत्पर नहीं दिखता कि कामचलाऊ व्यवस्था खत्म हो और पार्टी को नया अध्यक्ष मिले। राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही यह कहते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था कि अब अन्य कोई और खासकर परिवार से बाहर का पार्टी की कमान संभाले, लेकिन इसकी संभावना तभी क्षीण पड़ गई, जब सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बन गईं। माना जा रहा था कि यह व्यवस्था कुछ ही समय के लिए की गई है, लेकिन एक साल बीत गया और कुछ नहीं हुआ और राहुल गांधी पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के फैसले लेते रहे। यह लगभग तय है कि यदि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेता नेतृत्व को लेकर कामचलाऊ व्यवस्था खत्म करने की जरूरत नहीं जताते तो अध्यक्ष के लिए चुनाव की पहल आगे नहीं बढ़ती।

यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि पार्टी नेताओं का एक समूह नेतृत्व के मामले में कामचलाऊ व्यवस्था को बनाए रखना चाहता है। यह समूह उन नेताओं का विरोध भी कर रहा है, जो संगठन के साथ अध्यक्ष के चुनाव जल्द से जल्द चाह रहे हैं। गत दिवस इस समूह के नेताओं ने उन नेताओं को खरी-खोटी भी सुनाई, जो आंतरिक चुनावों पर जोर दे रहे थे। साफ है कि कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व यानी गांधी परिवार चाटुकारों से घिर गया है। ये चाटुकार अपने स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए यथास्थिति कायम रखना चाह रहे हैं, इसकी पुष्टि इससे होती है कि कांग्रेस कार्य समिति ने कोई फैसला खुद लेने के बजाय हमेशा की तरह सब कुछ सोनिया गांधी पर छोड़ दिया। क्या यह संभव है कि सोनिया गांधी यथास्थिति को दूर करना चाहें और फिर भी ऐसा न हो? चूंकि यह स्पष्ट हो रहा है कि गांधी परिवार को भी यथास्थिति रास आ रही है इसलिए यह कहना कठिन है कि कांग्रेस नेतृत्व के सवाल को कब और कैसे सुलझाएगी? समस्या केवल यह नहीं है कि नेतृत्व के सवाल को टाला जा रहा है, बल्कि यह भी है कि उन मुद्दों का कहीं कोई समाधान होता नहीं दिखता, जो 23 नेताओं ने अपनी चिट्ठी में उठाए थे। नि:संदेह कांग्रेस के लिए गांधी परिवार मजबूरी भी है और जरूरी भी, लेकिन यह भी सही है कि राजनीतिक दल का संचालन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह नहीं किया जा सकता। बेहतर हो कि कांग्रेस नेतृत्व यह समझे कि कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति के लिए उसका रवैया ही जिम्मेदार है।


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