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EV ट्रांज़िशन में ज़रूरी वर्कफ़ोर्स की कमी
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। सरकार से लेकर वाहन निर्माता कंपनियां तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य के परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही हैं। इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया वाहनों, बसों और कमर्शियल वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी से जुड़े उद्योग भी तेजी से विकसित हो रहे हैं।
लेकिन इस बदलाव के सामने एक बड़ी चुनौती सिर्फ बैटरी, चार्जिंग स्टेशन या वाहनों की उपलब्धता नहीं है। असली चुनौती उन लोगों की भी है जो इन नई तकनीकों को डिजाइन, तैयार, बेच, सर्विस और सुरक्षित तरीके से संचालित कर सकें। भारत के EV ट्रांजिशन को गति देने के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी एक महत्वपूर्ण बाधा बन सकती है।
पारंपरिक ऑटो सेक्टर से अलग हैं EV की जरूरतें
पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की तकनीक से परिचित मैकेनिकों की संख्या देश में बड़ी है। लेकिन EV में पावरट्रेन, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, मोटर कंट्रोलर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसलिए केवल इंजन और मैकेनिकल पार्ट्स की जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। नए जमाने के ऑटोमोबाइल तकनीशियनों को इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के साथ-साथ डिजिटल डायग्नोस्टिक्स की समझ भी विकसित करनी होगी।
बैटरी एक्सपर्ट्स की बढ़ेगी मांग
EV की पूरी तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बैटरी है। बैटरी सेल से लेकर बैटरी पैक, थर्मल मैनेजमेंट और Battery Management System तक कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
बैटरी से जुड़े काम में सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है। हाई-वोल्टेज सिस्टम पर काम करने वाले कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है, क्योंकि गलत तरीके से मरम्मत या रखरखाव करने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
भविष्य में भारत में बैटरी इंजीनियर, सेल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, BMS विशेषज्ञ, EV सर्विस तकनीशियन और बैटरी सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग बढ़ सकती है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी चाहिए प्रशिक्षित कर्मचारी
EV की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी बढ़ाना होगा। इसके लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों, इंस्टॉलेशन तकनीशियनों, नेटवर्किंग विशेषज्ञों और चार्जिंग सिस्टम के रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों की जरूरत होगी।
चार्जिंग स्टेशन केवल बिजली का कनेक्शन लगाने तक सीमित नहीं हैं। आधुनिक चार्जिंग नेटवर्क में सॉफ्टवेयर, भुगतान प्रणाली, रिमोट मॉनिटरिंग और डेटा मैनेजमेंट भी शामिल हैं।
इसलिए आने वाले समय में EV सेक्टर में इलेक्ट्रिकल + डिजिटल स्किल्स वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है।
सर्विस सेंटरों को बदलना होगा अपना तरीका
EV में पारंपरिक वाहनों की तुलना में कई अलग तरह की सर्विस जरूरतें होती हैं। इंजन ऑयल या एग्जॉस्ट सिस्टम जैसी चीजें यहां नहीं होतीं, लेकिन बैटरी, मोटर, इन्वर्टर, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इस बदलाव के कारण मौजूदा ऑटो मैकेनिकों को नए कौशल की ट्रेनिंग देना जरूरी होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो EV की बिक्री बढ़ने के बावजूद ग्राहकों को सर्विस और रिपेयर नेटवर्क की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीण और छोटे शहरों में चुनौती ज्यादा
भारत में EV ट्रांजिशन सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दोपहिया और तीनपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।
लेकिन छोटे शहरों में प्रशिक्षित EV तकनीशियनों की उपलब्धता अभी बड़ी चुनौती हो सकती है। यदि किसी वाहन में तकनीकी खराबी आती है और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध नहीं होता, तो ग्राहक को वाहन दूर स्थित सर्विस सेंटर तक ले जाना पड़ सकता है।
इसलिए EV इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट बेहद जरूरी है।
ITI और स्किल सेंटरों की भूमिका
EV सेक्टर की वर्कफोर्स तैयार करने में ITI, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज और स्किल डेवलपमेंट संस्थानों की भूमिका अहम हो सकती है।
पाठ्यक्रमों में केवल पारंपरिक ऑटोमोबाइल तकनीक के बजाय EV से जुड़े विषयों को अधिक व्यावहारिक तरीके से शामिल करने की जरूरत होगी। छात्रों को बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, हाई-वोल्टेज सुरक्षा, चार्जिंग सिस्टम और वाहन डायग्नोस्टिक्स पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
ऑटोमोबाइल कंपनियों और शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी भी इस दिशा में मददगार हो सकती है।
महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर
EV सेक्टर में बदलाव रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों में कई प्रक्रियाओं के लिए सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा और डिजाइन जैसे कौशल की जरूरत होती है।
इससे महिलाओं और युवाओं के लिए पारंपरिक ऑटोमोबाइल भूमिकाओं से अलग टेक्निकल, डिजिटल और सर्विस आधारित नौकरियों के नए रास्ते खुल सकते हैं।
सिर्फ वाहन बनाना पर्याप्त नहीं
भारत के लिए EV ट्रांजिशन की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि देश में कितने इलेक्ट्रिक वाहन बिक रहे हैं। इसके लिए पूरी वैल्यू चेन में कुशल लोगों की जरूरत होगी।
बैटरी निर्माण से लेकर वाहन असेंबली, चार्जिंग, सर्विस, रिसाइक्लिंग और सॉफ्टवेयर तक हर स्तर पर प्रशिक्षित वर्कफोर्स जरूरी होगी।
खास तौर पर बैटरी रिसाइक्लिंग और पुराने EV पार्ट्स के सुरक्षित निपटान के क्षेत्र में भी भविष्य में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार और उद्योग के सामने बड़ी जिम्मेदारी
EV ट्रांजिशन को सफल बनाने के लिए सरकार, ऑटो कंपनियों, बैटरी निर्माताओं और प्रशिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। सिर्फ नई तकनीक में निवेश करने के बजाय मानव संसाधन में निवेश भी उतना ही जरूरी है।
यदि समय रहते पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित तकनीशियन और इंजीनियर तैयार नहीं किए गए, तो स्किल गैप EV सेक्टर की वृद्धि को धीमा कर सकता है।
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