सम्पादकीय

सेहतमंद देश का लक्ष्य: सेहतमंद नागरिक देश की एक बड़ी पूंजी होती है, स्वास्थ्य की चिंता प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए

Rounak Dey
24 Feb 2021 7:20 AM IST
सेहतमंद देश का लक्ष्य: सेहतमंद नागरिक देश की एक बड़ी पूंजी होती है, स्वास्थ्य की चिंता प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए
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यह बाधा दूर करने के लिए कोई अभियान छेड़ा जाना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमण का डटकर मुकाबला करने के बाद सेहत के मोर्चे पर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने की जो जरूरत जताई, उसे पूरा करने के लिए सभी को आगे आना होगा। यह सही है कि देश कोरोना संकट का सही तरह सामना कर रहा है, लेकिन केवल इससे ही यह साबित नहीं हो जाता कि सेहत के मोर्चे पर सब कुछ ठीक है। इसी तरह इस बार बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अधिक धन के आवंटन से भी यह सुनिश्चित नहीं होता कि देश को सेहतमंद बनाने का अभियान आसानी से पूरा हो जाएगा। लोगों को सेहतमंद बनाने के लिए मोदी सरकार बीमारियों को रोकने और गरीबों को सस्ता एवं प्रभावी इलाज देने समेत जिन कई मोर्चों पर काम कर रही है, उनमें राज्य सरकारों की भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए और साथ ही निजी क्षेत्र की भी। यह समझने की भी जरूरत है कि स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अभी बहुत कुछ करना शेष है। लोगों के स्वास्थ्य की चिंता इसलिए प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए, क्योंकि सेहतमंद नागरिक किसी भी देश के लिए एक बड़ी पूंजी होते हैं।

इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि भारत तमाम बीमारियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है। जहां कई बीमारियां जीवनशैली के चलते सिर उठाए रहती हैं, वहीं कई सेहत के प्रति जागरूकता के अभाव के कारण। सेहत के मोर्चे पर देश जिन तमाम समस्याओं से जूझ रहा है, उनमें एक पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों की अनुपलब्धता या फिर उनके बारे में सही जानकारी न होना भी है। गरीब तबका जैसे-तैसे अपना पेट अवश्य भर लेता है, लेकिन वह सही पोषण नहीं ले पाता। यह भी आवश्यक नहीं कि समर्थ वर्ग सेहत के अनुकूल आहार ले रहा हो। इस पर सोचा जाना चाहिए कि कमजोर और सक्षम, दोनों ही वर्गों को पर्याप्त पोषणयुक्त आहार कैसे मिले? यह सही है कि कुपोषण की समस्या से पार पाने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं और इसकी भी चिंता की जा रही है कि दाल, सब्जियां, दूध आदि सभी लोगों और खासकर गरीबों को कैसे आसानी से उपलब्ध हों, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत काम किया जाना है। इसके साथ खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता के अभाव को भी दूर किया जाना बहुत आवश्यक है। हमारे नीति-नियंताओं को इससे अवगत होना चाहिए कि मिलावटी अथवा मानकों की अनदेखी कर तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थ देश को सेहतमंद बनाने के लक्ष्य में एक बड़ी बाधा हैं। यह बाधा दूर करने के लिए कोई अभियान छेड़ा जाना चाहिए।


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