सम्पादकीय

म्यांमार में फिर से सू ची

Gulabi
12 Nov 2020 8:41 PM IST
म्यांमार में फिर से सू ची
x
म्यांमार के चुनाव में आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की फिर जीत हुई है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। म्यांमार के चुनाव में आंग सान सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी की फिर जीत हुई है। एनएलडी ने कहा है कि उसने संसदीय चुनाव में अभूतपूर्व जीत दर्ज की है। म्यांमार में रविवार को संसदीय चुनाव हुए थे। 2015 के चुनाव में भी एनएलडी ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की थी। रविवार को हुए चुनाव में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों को मतदान के अधिकार से वंचित किया गया, जिसकी आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई। बहरहाल, एनएलडी का दावा है कि वह 322 से अधिक सीटें जीत रही है। देश की संसद में कुल 642 सीटें हैं। एनएलडी का लक्ष्य 377 से अधिक सीटें हासिल करने का रहा है, ताकि वो संविधान संशोधन कर पाए। चुनाव आयोग ने सोमवार को नतीजों का ऐलान करना शुरू किया, लेकिन नतीजे जारी होने तक एक हफ्ता लग सकता है।

शांति का नोबेल जीतने वाली सू ची की पार्टी ने 2015 चुनाव में जीत हासिल की थी और इसी के साथ देश से 50 साल के सैन्य शासन का अंत हुआ था। गौरतलब है कि संसद की 25 प्रतिशत सीटें म्यांमार की सेना के लिए आरक्षित हैं। 2008 के संविधान के अनुसार संसद की 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। इसी वजह से सरकार वहां संविधान में सुधार करने में नाकाम रहती हैं। देश में 3.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, जिसमें पांच लाख युवा हैं, जिन्होंने पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पीपुल्स एलायंस फॉर क्रेडिबल इलेक्शंस नाम की संस्था का कहना है कि चुनाव में हिंसा की आशंका के बावजूद मतदान शांतिपूर्ण रहा। एक समय में सू ची को क्षेत्र में लोकतंत्र की सबसे मजबूत नेता के तौर पर देखा जाता था। लेकिन रोहिंग्या मुस्लमानों के साथ देश में संकट को संभाल पाने में नाकाम होने पर उनकी साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरी है। 2020 के चुनावों में मुख्य चिंता का विषय उन रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर था, जिनको वोट देने के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए। फॉर्टिफाई राइट्स संगठन के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चुनावों का एक मुख्य सिद्धांत सार्वभौमिक और समान मताधिकार है और इस बार ऐसा नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रोहिंग्या और अन्य जातीय लोगों से अधिकार छीने जाने की निंदा करनी चाहिए और भविष्य में ऐसा ना हो इसको सुनिश्चित करना चाहिए। मगर एनएनडी की जीत का आधार शायद यही है कि उसने रोंहिग्य मुद्दे पर बहुसंख्यक समुदाय को ध्रुवीकृत कर लिया।म्यांमार में फिर से सू ची

Next Story