सम्पादकीय

बीमार होते पशु

Subhi
21 Sept 2022 11:45 AM IST
बीमार होते पशु
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लंपी वायरस की बीमारी की चपेट में देश के करीब 12 राज्यों में एक लाख 20 हजार पशुधन संक्रमित हैं और 57,000 पशुधन काल ग्रसित हो चुके हैं। इसमें अधिकतर गाय और गोवंश हैं।

Written by जनसत्ता: लंपी वायरस की बीमारी की चपेट में देश के करीब 12 राज्यों में एक लाख 20 हजार पशुधन संक्रमित हैं और 57,000 पशुधन काल ग्रसित हो चुके हैं। इसमें अधिकतर गाय और गोवंश हैं। राजस्थान में इस बीमारी से करीब तीस हजार पशुधन की मृत्यु चिंता का विषय है। इसलिए राज्य सरकार को अविलंब कारगर कदम उठाने चाहिए।

भारत में पशुपालन गांव के लोगों की जिंदगी का एक हिस्सा है और पशुधन से भावनात्मक लगाव रहता है। अगर इस तरह से पशुधन अकाल मृत्यु होती है तो ग्रामीण इलाकों के निर्धन परिवारों की कमर टूट जाएगी। पशुधन से ही खेती-बाड़ी का काम और दूध का उत्पादन जीविका का एकमात्र जरिया है। पशुधन की अकाल मृत्यु भूमिहीन किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए भारी क्षति है, जिस पर सरकार को अविलंब काम करना होगा।

सभी राज्य सरकारों को इस संदर्भ में मुआवजा नीति अपनाकर ऐसे परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम करना चाहिए। केंद्र सरकार के द्वारा इस संक्रमण को रोकने के लिए टीका के प्रयोग की सलाह दी जा रही है, जिस पर राज्य सरकार को निशुल्क टीका उपलब्ध कराने की योजना बनानी चाहिए। एक जानकारी के अनुसार. इस बीमारी के कारण पंजाब में लगभग बीस फीसद दुग्ध उत्पादन घट गया है।

अगर उत्तर भारत के राज्यों में इस तरह से दुग्ध उत्पादन घटेगा तो निश्चित रूप से देशभर में दूध का एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा।

उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन के बैठक में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उब्जेकिस्तान, ईरान सहित भारत के सभी राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति पुतिन से आमने-सामने बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख साफ रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि किसी भी चीज का विकल्प युद्ध नहीं है। उन्होंने पुतिन से रूस -यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध को विश्व के लिए सही नहीं ठहराया।

युद्ध संवाद के जारिए ही खत्म किए जा सकते है। संवाद करना जरूरी है, क्योंकि रूस-यूक्रेन के चलते अव्यवस्था का खतरा पूरे विश्व पर मंडरा रहा है, क्योकि र्इंधन, प्राकृतिक गैस, लगभग पूरे विश्व में निर्यात पर असर पड़ रहा है। युद्ध के कराण दोनों देशो पर प्रतिबंध लगा हुआ है, जिससे भारत में गैस और तेल के दामों में वृद्धि हुई है।

यूक्रेन खाद का एक बड़ा निर्यातक देश है, जिससे भारत भी खाद का आयात करता है। लेकिन युद्ध के कारण भारत को महंगे दामों पर दूसरे देशों से आयात करना पड़ रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि युद्ध को जल्द से जल्द संवाद के जरिए रोका जाए, जिससे विश्व में शांति बनी रही रहे।


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