सम्पादकीय

यूक्रेन पर निर्लज्ज हमला : खुद को पीड़ित बताने के रूसी मिथक का सच, गवाही देता है इतिहास

Neha Dani
3 April 2022 1:45 AM GMT
यूक्रेन पर निर्लज्ज हमला : खुद को पीड़ित बताने के रूसी मिथक का सच, गवाही देता है इतिहास
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जिस पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। - कन्वर्सेशन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के लोगों के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को जायज ठहराने के लिए अपने देश के इतिहास का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने लंबे समय से इतिहास का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के हथियार के तौर पर किया है। यूक्रेन पर हमले से ठीक पहले दिए गए अपने भाषण में उन्होंने दावा किया था कि यूक्रेन की स्वतंत्रता ने 'ऐतिहासिक रूप से रूसी भूमि' को काटकर अलग कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि 'वहां रहने वाले लाखों लोगों से किसी ने नहीं पूछा कि वे क्या चाहते हैं।'

खुद पुतिन इस बात के लिए नहीं जाने जाते कि वह अपने शासित लोगों की राय का खयाल रखते हैं। फिर भी, रूसी इतिहास के बारे में उनकी प्रवृत्त दृष्टि लाखों रूसियों द्वारा साझा की जाती है। पुतिन के मुताबिक, रूस विदेशी आक्रमण का पीड़ित रहा है, उसने उसे बर्बाद करने आए हमलावरों और विदेशी ताकतों को साहसिक ढंग से जवाब दिया है। अक्सर वह इस क्रम में 1612 में क्रेमलिन पर पोलैंड और लिथुआनिया के कब्जे; 1708-9 में स्वीडन के चार्ल्स बारहवें के हमले और 1812 के नेपोलियन के हमले; क्रीमिया युद्ध और हिटलर के 1941 के ऑपरेशन बारबरोसा का जिक्र करते हैं।
आखिरी उदाहरण से हमें इतिहास के रूसी पाठ के प्रति अनेक पश्चिमी हलकों में व्याप्त सहानुभूति को समझने में मदद मिलती है। हिटलर को हराने में सोवियत संघ की निर्णायक भूमिका को अनेक कम्युनिस्ट लोगों के साथ ही उस पीढ़ी के कई लोगों द्वारा कृतज्ञता के साथ याद किया जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध से गुजरे थे। नतीजतन, चेचन्या, जॉर्जिया और क्रीमिया में पुतिन के हमले के बावजूद, ऐसे प्रभावशाली टिप्पणीकारों की कोई कमी नहीं है, जो यह आग्रह करते हैं कि हमें रूस की नजर से चीजों को देखना चाहिए और पुतिन के हमले के डर को समझना चाहिए।
रूसी इतिहास का यह नजरिया एकतरफा और अत्यंत पक्षपाती है। ऊपर जिन मामलों का जिक्र किया गया है, उनमें से प्रत्येक में यह तर्क दिया जा सकता है कि ये हमले खुद रूसी हमले का जवाब थे। पुतिन ने बार-बार जैसा कि रूसी कहते हैं, 'कीवियाई रूस' का जिक्र किया, जो कि यूक्रेन की राजधानी कीव को घेरे हुए एक मध्ययुगीन राज्य था। रूस के लोग समकालीन रूसियों, यूक्रेनियाइयों और बेलारूसियों के पूर्वज थे। अनेक रूसियों की तरह पुतिन भी मानते हैं कि ये तीनों राष्ट्र एक हैं, जिसमें यूक्रेनियाई और बेलारूसी रूसियों के छोटे भाइयों की तरह हैं।
द ग्रैंड डची ऑफ मस्कोवी (मॉस्को) कीवियाई रूस की उत्तराधिकारी रियासतों की एकमात्र रियासत थी और यह सबसे लंबे समय तक मंगोल आधिपत्य में रही। इवान तृतीय (1462-1505) के शासन में जब उसने मंगोल के प्रभुत्व को त्याग दिया, उसके बाद से रूसी शासकों ने वृहत सामंती दृष्टिकोण अपना लिया। वे दावा करते थे कि वे कीवियाई रूस के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं, जिसे 13 वीं सदी में मंगोलों ने नष्ट कर दिया था। इवान तृतीय ने जब पहली बार सारे रूस यानी कीवियाई रूस का शासक होने का दावा किया, तब उस क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में ग्रैंड ड्यूक ऑफ लिथुआनिया का शासन था। उन्होंने मंगोल विजय के बाद कीव और अधिकांश रूसी रियासतों पर अपनी सुरक्षा और शासन बढ़ाया था।
इवान तृतीय और उसके उत्तराधिकारियों के विपरीत, जिन्होंने निर्दयी निरंकुशता स्थापित कर ली थी, मूर्तिपूजक गेडिमिनिड राजवंश ने शासन की एक अकेंद्रीकृत प्रणाली संचालित की। कनिष्ठ राजकुमारों को रूसी रियासतों को सौंपा गया, जिन्होंने चर्च को रूढ़िवादी चर्च में परिवर्तित कर दिया, स्थानीय राजकुमारियों से शादी की और रूसी संस्कृति को आत्मसात कर लिया। स्वशासन की यह प्रणाली मस्कोवी निरंकुशता की तुलना में कीवियाई रूस की राजनीतिक परंपरा में कहीं अधिक थी, जबकि रूसी भाषा ही आधुनिक बेलारूसी और यूक्रेनी की पूर्वज है।
जब इवान तृतीय ने 1492 और 1537 के बीच लड़े गए पांच मस्कोवी-लिथुआनियाई युद्धों में से पहला शुरू किया, तो उन्होंने लिथुआनिया के रूढ़िवादी निवासियों से यह नहीं पूछा कि वे क्या सोचते हैं। रूसियों ने इवान के शासन की भारी कीमत चुकाई, जिसने देश की आर्थिक और सैन्य प्रणालियों को नष्ट कर दिया, और क्रेमलिन पर कब्जे को एक मस्कोवाई गृहयुद्ध के चरम के दौरान अंजाम दिया गया, जब पर्याप्त संख्या में बोयार्स (सामंतों) ने पोलैंड के राजा के बेटे को अपना जार चुन लिया।
क्रीमिया का युद्ध भी ओटोमान साम्राज्य के खिलाफ रूसी हमले की प्रतिक्रिया थी। अंत में, 1941 में हिटलर का हमला स्टालिन के 1939-1940 में पोलैंड, लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड के अकारण किए गए आक्रमणों से पहले हुआ था। यूक्रेन पर पुतिन का हमला रूसी शासकों द्वारा देश के पड़ोसियों के खिलाफ निर्लज्ज हमले के कृत्यों की एक शृंखला की ताजा कड़ी है, जिसे भारी सामंती दावों के जरिये सही ठहराया जा रहा है और सुविचारित ढंग से फैलाए गए कथानक के जरिये खुद को पीड़ित बताया जा रहा है, जिस पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। - कन्वर्सेशन

सोर्स: अमर उजाला

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