सम्पादकीय

सरस्वती पूजा और ज्ञान, विवेक व वाणी की शक्ति का गहरा अर्थ

nidhi
14 Oct 2026 1:58 PM IST
सरस्वती पूजा और ज्ञान, विवेक व वाणी की शक्ति का गहरा अर्थ
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सरस्वती का अर्थ है 'बहने वाली'। अगर किसी व्यक्ति के पास ज्ञान और समझ है, लेकिन वह दूसरों तक नहीं पहुँचती या उसका प्रवाह नहीं होता, तो उसका बहुत कम फ़ायदा होता है। जब यह ज्ञान बहता है और दूसरों के काम आता है, तभी यह बड़े दायरे में मदद करता है—यही समझ होनी चाहिए। व्यावहारिक रूप से, विद्या की देवी को सरस्वती के रूप में पूजा जाता है। अश्विन नवरात्रि के दौरान 'मूल नक्षत्र' वाले दिन सरस्वती पूजा की जाती है। पूजा स्थल के पास किताबें और पढ़ाई-लिखाई का सामान रखा जाता है और प्रार्थना की जाती है।
क्या हम ज्ञान की पूजा और सरस्वती पूजा को सिर्फ़ शरद नवरात्रि के एक दिन तक ही सीमित रखते हैं? क्या हम ज्ञान का सम्मान सिर्फ़ ज्ञान के लिए करते हैं? क्या हम समझदार लोगों की बातें सुनते हैं? या हम उन आवाज़ों की सलाह मान लेते हैं जिनका दबदबा होता है? बदलते समय के साथ यह अलग-अलग तरह से होता है। अक्सर जो हम देखते हैं, उससे हमें शांति नहीं मिलती।
सरस्वती को सम्मानपूर्वक सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की पत्नी कहा जाता है। कहा जाता है कि वह ब्रह्मा की जीभ पर विराजमान हैं। इसका क्या अर्थ है? किसी भी चीज़ की रचना की शुरुआत 'वाक' यानी वाणी या बोलने की शक्ति से होती है।
आप योजनाओं को शब्दों में ढालते हैं, डिज़ाइन और उसे लागू करने की तैयारी करते हैं, और अंत में वह काम सफल होता है और रचना साकार हो जाती है। ईश्वर को "शब्द-ब्रह्म" कहा गया है। हम 'मनसा, वाचा, कर्मणा' शब्द सुनते हैं। इसका अर्थ है—विचारों, शब्दों और कर्मों के माध्यम से। इस प्रकार, शब्दों का प्रवाह महत्वपूर्ण है। सरस्वती पूजा के इस अवसर पर यह याद रखना चाहिए कि वाणी में गंभीरता होनी चाहिए।
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