सम्पादकीय

पहली तिमाही में जीडीपी की रिकॉर्डतोड़ ग्रोथ, पर क्यों ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं

Gulabi
1 Sep 2021 1:38 PM GMT
पहली तिमाही में जीडीपी की रिकॉर्डतोड़ ग्रोथ, पर क्यों ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं
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पहली तिमाही में कोरोना की दूसरी लहर से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थी इसके बावजूद भी वृद्धि दर बेहतर रही थी

संयम श्रीवास्तव।

चालू वित्त वर्ष (Current Financial Year) की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था (Economy) में 20.1 फ़ीसदी की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई है. अपनी सफलता पर जहां सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं उसके समर्थक भी इसे बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं. लेकिन यह उतनी ज्यादा खुश होने वाली बात नहीं है. क्योंकि 2019-20 की पहली तिमाही की तुलना में यह अभी भी 9.2 फ़ीसदी कम है. जबकि अगर हम पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में जीडीपी (GDP) की बात करें तो उसमें 25.4 फ़ीसदी की कमी आई थी. लेकिन पहली तिमाही में कोरोना की दूसरी लहर से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थी इसके बावजूद भी वृद्धि दर बेहतर रही थी.

वहीं अगर इस वृद्धि दर को तिमाही के आधार पर देखें तो अप्रैल-जून 2021-22 तिमाही में वृद्धि दर पिछले वर्ष की चौथी तिमाही से 16.9 फ़ीसदी कम है. हां यह बात जरूर सही है की 2020 की पहली तिमाही की तुलना में वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 2.4 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. जीडीपी में वृद्धि के आंकड़ों से सरकार और उसके समर्थक भले ही खुश हों लेकिन वित्त मामलों के जानकार फिलहाल इन आंकड़ों से ज्यादा खुश नजर नहीं आते हैं. उनका मानना है कि सरकार ने खर्च की बड़ी-बड़ी घोषणाएं भले ही कर दी हैं, लेकिन आंकड़ों में यह कहीं नहीं नजर आता है.
2019-20 की पहली तिमाही की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है
आने वाले कुछ समय में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में जीडीपी में 20.1 फीसदी की वृद्धि सरकार के खाते में प्लस प्वाइंट है. हालांकि वित्त मामलों के जानकार इन आंकड़ों से इतना ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक खबर के अनुसार पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन मानते हैं कि सरकार ने खर्च की बड़ी-बड़ी घोषणाएं भले ही की लेकिन आंकड़ों में यह बातें नजर नहीं आती हैं. वहीं अगर कृषि और सहायक गतिविधियों तथा बिजली और संबंधित गतिविधियों को छोड़ दिया जाए तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सभी चीजों में 2019-20 की पहली तिमाही की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है.
इन क्षेत्रों में अभी भी सुधार की जरूरत है
कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर क्षेत्रों में 2019-20 की पहली तिमाही की तुलना में अभी भी गिरावट है. जैसे निर्माण के क्षेत्र में इस वित्त वर्ष में 68.3 फ़ीसदी की तेजी दर्ज की गई है, लेकिन अगर इसकी तुलना हम 2020 की समान अवधि से करें तो इसमें 15 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वैसे ही होटल, परिवहन क्षेत्र, व्यापार में जहां इस वित्त वर्ष में 34.3 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और पिछले वित्त वर्ष के समान तिमाही में इन क्षेत्रों में 48.1 फ़ीसदी गिरावट दर्ज की गई थी. लेकिन इसके बावजूद भी 2019-20 की तुलना में अब भी इस सेक्टर में 30.22 फ़ीसदी की गिरावट है. सबसे बड़ी गिरावट वित्तीय, रियल स्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में हुई है. चालू वित्त वर्ष में जहां इन क्षेत्रों में 3.7 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है. वहीं अगर इसकी तुलना हम 2020 की पहली तिमाही से करें तो इसमें 115 फ़ीसदी की कमी आई है.
राजकोषीय घाटे में सुधार हुआ है
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत में 3.21 लाख करोड़ रुपए रहा जो इस वर्ष के पूरे बजट का 21.3 फ़ीसदी है. हालांकि इसके बावजूद भी अगर हम इस वित्त वर्ष के राजकोषीय घाटे की तुलना पिछले वित्त वर्ष से करें तो यह आंकड़े काफी बेहतर हैं. क्योंकि पिछले वित्त वर्ष में इस अवधि में वार्षिक अनुमान के मुकाबले इस घाटे में 103.1 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि उस दौरान कोरोनावायरस से निपटने के लिए सरकार ने ताबड़तोड़ खर्च किए थे. 2020-21 का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 9.3 फीसदी रहा था.
जीडीपी के ग्रोथ में निजी क्षेत्रों का रहा योगदान
चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की 20.1 फीसदी ग्रोथ में निजी क्षेत्रों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है. आगामी महीनों में निजी निवेश कम हो सकता है क्योंकि निजी अंतिम खपत व्यय पहली तिमाही में 19.3 फ़ीसदी बढ़ा है. जिसमें पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 26.2 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. यही नहीं कोर इंडस्ट्रीज ने भी जीडीपी के मोर्चे पर सरकार का बढ़िया साथ दिया है. इस सेक्टर का उत्पादन जुलाई में 9.4 फ़ीसदी बढ़ा है. जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसी महीने में बुनियादी उद्योग का उत्पादन 7.6 फ़ीसदी घटा था.
2020-21 में जीडीपी ग्रोथ रेट -7.3 फ़ीसदी थी
किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समय के भीतर तैयार सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी कहते हैं, जिसकी स्थिति कोरोना की दोनों लहरों के दौरान खस्ताहाल रही. जहां वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फ़ीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. जबकि तीसरी तिमाही में 4 फ़ीसदी और चौथी तिमाही में ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी दर्ज की गई थी. इस तरह से अगर हम कहें तो 2020-21 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट माइनस -7.3 फ़ीसदी रही.
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