सम्पादकीय

कहानी के लिए सबूत!

Gulabi
17 Feb 2021 5:23 AM GMT
कहानी के लिए सबूत!
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सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के समर्थक इको-सिस्टम ने किसान आंदोलन को लेकर यह कहानी शुरुआत से बनाई कि आंदोलनकारी असल में खालिस्तानी हैं।

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के समर्थक इको-सिस्टम ने किसान आंदोलन को लेकर यह कहानी शुरुआत से बनाई कि आंदोलनकारी असल में खालिस्तानी हैं। लेकिन ये अब तक ये कहानी लोगों के गले नहीं उतारने में उन्हें ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। तो उन्होंने पॉप स्टार रिहाना, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा टनबर्ग और अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के इस मामले में ट्विट कर समर्थन देने के बाद अपनी कहानी को फिर से उछाला। इस बार इसमें भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश का एंगल जोड़ा गया। आधार उस टूलकिट को बनाया गया, जिसमें सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय साजिश के सबूत हैं। जबकि कानून के कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय विशेषज्ञों का दावा है कि टूलकिट किसान आंदोलन को समर्थन देने के कार्यक्रमों का एक ब्योरा भर है। बहरहाल, इसी टूलकिट को आधार बना कर दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरु में 21 वर्षीय पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ्तार कर लिया। निकिता जैकब और शांतुनू नाम के दो और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की तैयारी कर ली गई है।


पुलिस का दावा है कि दिशा टूलकिट नाम के उस गूगल डॉक्यूमेंट के एडिटरों में से एक हैं, जिसे स्वीडन की पर्यावरण ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने एक बार ट्वीट कर फिर हटा लिया था। कई जानकारों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि टूलकिट मामले में हिंसा की साजिश स्पष्ट नहीं है, क्योंकि उसमें किसान आंदोलन के समर्थन में जो कदम उठाने के लिए कहा गया था उनमें सोशल मीडिया पर लिखने, सांसदों को ज्ञापन देने, कुछ निजी कंपनियों से अपने शेयर वापस लेने जैसे कदम शामिल हैं। क्या ऐसी बातें किसी की गिरफ्तारी का आधार बन सकती हैं? गौरतलब है कि दिशा की गिरफ्तारी का पर्यावरण कार्यकर्ताओं से ले कर राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी विरोध किया है। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई लोगों ने दिशा की गिरफ्तारी की आलोचना की है। इनमें अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस और ब्रिटेन की सांसद क्लॉडिया वेब शामिल हैं। क्या यह माना जा जाना चाहिए कि ये सभी लोग भारत के खिलाफ किसी बड़ी साजिश में शामिल हैं? या यह किसान आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष ने जो कहानी बनाई है, उसको अपने समर्थकों की निगाह में पुष्ट करने की एक कोशिश भर है?


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