सम्पादकीय

गरीबी और अशिक्षा बना काल, दुनिया में रोज 60 बालिका वधु गंवा रहीं जान

Gulabi
14 Oct 2021 4:27 PM GMT
गरीबी और अशिक्षा बना काल, दुनिया में रोज 60 बालिका वधु गंवा रहीं जान
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गरीबी, बेरोजगारी व अशिक्षा प्रमुख वजह

बाल विवाह के कारण दुनिया में रोजाना 60 बेटियां मौत की शिकार होती हैं। इसमें से छह दक्षिण एशिया से हैं. सालाना 22 हजार बाल वधुओं की कम उम्र में गर्भावस्था और डिलीवरी के दौरान मौत होती है. यह खुलासा 'सेव द चिल्ड्रन इंटरनेशनल' रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी एशिया व प्रशांत महासागर क्षेत्र में प्रतिवर्ष 650 और लैटिन अमरीकी-कैरेबियाई देशों में सालाना 560 बाल वधुओं की असमय मौत होती है. दुनिया में सबसे अधिक मौत पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों में होती है. वहां करीब 9,600 बेटियों की हर साल मौत हो जाती है.


तीन में से एक बालिका वधू भारत में
05 देश बांग्लादेश, ब्राजील, इथियोपिया भारत व नाइजीरिया में 50 फीसदी से ज्यादा संख्या
15 से 19 वर्ष की लड़कियों में डिलीवरी के दौरान सबसे ज्यादा मौतें होतीं
65 करोड़ लड़कियों का विवाह बचपन में हुआ दुनिया में अब तक
03 में से एक बालिका वधू भारत में, दुनिया की कुल संख्या में
गर्भावस्था व प्रसव के दौरान हर साल 22,000 बालिका वधू की मौत
2030 में एक करोड़ बाल विवाह की आशंका

गरीबी, बेरोजगारी व अशिक्षा प्रमुख वजह

रिपोर्ट के अनुसार, 25 साल में आठ करोड़ बाल विवाह रोके गए हैं। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं की मुश्किलें,
बेरोजगारी और गरीबी बढ़ने से घरेलू हिंसा बढ़ी है। इससे लड़कियों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ा है। इससे बाल विवाह के मामले बढ़ गए।
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