सम्पादकीय

अर्थव्यवस्था को बल देते प्रवासी भारतीय, खास है माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ' रिपोर्ट

Gulabi
24 Dec 2021 9:58 AM GMT
अर्थव्यवस्था को बल देते प्रवासी भारतीय, खास है माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ रिपोर्ट
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अर्थव्यवस्था को बल देते प्रवासी भारतीय
डा. जयंतीलाल भंडारी। हाल में विश्व बैंक द्वारा जारी 'माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ' रिपोर्ट के मुताबिक विदेश में कमाई करके अपने देश में धन (रेमिटेंस) भेजने के मामले में भारतीय प्रवासी दुनिया में सबसे आगे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में प्रवासी भारतीयों ने 87 अरब डालर की धन राशि स्वदेश भेजी है। यह धन राशि पिछले वर्ष की तुलना में 4.6 फीसद अधिक है। इसमें सबसे अधिक 20 प्रतिशत धन राशि अमेरिका से प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई है। पिछले छह-सात वर्षो में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रवासी भारतीयों के लिए किए गए विशेष प्रयासों से प्रवासियों का भारत के लिए सहयोग और स्नेह लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
प्रवासियों द्वारा विदेश में काम करते हुए कमाई का कोई भाग अपने मूल देश को बैंक या आनलाइन ट्रांसफर से भेजा जाता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के प्रवासियों द्वारा 2021 में कुल 589 अरब डालर की राशि अपने-अपने देशों में भेजी गई है, जबकि 2020 में उनके द्वारा भेजी गई धनराशि 540 अरब डालर थी। प्रवासियों से धन प्राप्त करने में भारत के बाद चीन, मेक्सिको, फिलीपींस और मिस्न के नाम आते हैं। पिछले वर्ष कोरोना के कारण दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के शिथिल पड़ने के कारण भारतीय प्रवासियों की आमदनी में बड़ी कमी आई थी। फिर भी आर्थिक मुश्किलों के बीच प्रवासियों द्वारा पिछले वर्ष भेजी गई 83 अरब डालर की बड़ी धनराशि से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला था। चिंता और अनिश्चितता के दौर में फंसे देश को प्रवासी भारतीयों का हर तरह से साथ मिला था।
प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को फिर से ऊर्जावान बनाने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्हीं के प्रयासों द्वारा वर्ष 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस समारोह शुरू हुआ। प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश धन भेजने से जिस तरह बड़ी मात्र में विदेशी मुद्रा भारत आती है, वह सालाना प्राप्त होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की राशि से भी अधिक होती है। यह एक ऐसा बड़ा कारण भी है जिससे कोरोना काल में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दिया है। रिजर्व बैंक के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 637 अरब डालर से अधिक हो गया है। दुनिया के करीब 200 देशों में रह रहे प्रवासी भारतीय देश की महान पूंजी हैं। विश्व के समक्ष भारत का चमकता हुआ चेहरा हैं। ये विश्व मंच पर राष्ट्रीय हितों के हिमायती भी हैं।
जिस तरह प्रवासी भारतीय राजनेताओं और उद्यमियों ने भारत के साथ सहयोग के सूत्र आगे बढ़ाए हैं, उससे भी प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश की ओर धन प्रेषण और स्वदेश के साथ मैत्री में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे प्रभावी राजनेताओं में अमेरिका की पहली महिला और पहली अश्वेत उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, मारीशस में प्रविंद जगन्नाथ, राजकेश्वर पुरयाग, अनिरुद्ध जगन्नाथ, नवीनचंद्र राम गुलाम, गुयाना में भरत जगदेव, डोनाल्ड रविंद्र नाथ रामोतार, सूरीनाम में चंद्रिका प्रसाद संतोखी, दक्षिण अफ्रीका में अहमद कथराडा, सिंगापुर में प्रो. एस. जयकुमार, न्यूजीलैंड में प्रियंका राधाकृष्णन, डा. आनंद सत्यानंद, त्रिनिदाद एवं टोबैगो में कमला प्रसाद बिसेसर, कुराकाओ में यूजीन रघुनाथ, ब्रिटेन में ऋषि सुनक आदि नाम उभरकर दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह आइटी, कंप्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त आदि क्षेत्रों में दुनिया में ऊंचाइयों पर दिखाई दे रहे सुंदर पिचाई, सत्य नडेला, शांतनु नारायण, दिनेश पालीवाल और अजय बंगा आदि ने भारत के साथ स्नेह के सूत्र मजबूत बनाए हैं।
यदि हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय देश को मजबूत बनाने में अपनी सहभागिता और अधिक बढ़ाएं तो हमें भी उनके दुख-दर्द में अधिक सहभागी बनना पड़ेगा। उनके साथ सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना होगा। जिस तरह पिछले वर्ष कोरोना की चुनौतियों से परेशान प्रवासियों की घर वापसी के लिए सरकार ने वंदे भारत मिशन चलाया और 45 लाख प्रवासी भारतीयों को वापस लाया गया, उससे उनके मन में देश के लिए और अधिक आत्मीयता बढ़ी है। हालांकि अभी भी हमें प्रवासियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के निराकरण में अहम भूमिका निभानी होगी। वस्तुत: दुनिया के सभी प्रवासी भारतीय बहुत धनी नहीं हैं। खासतौर से विभिन्न खाड़ी देशों में लाखों कुशल-अकुशल भारतीय श्रमिक इस बात से त्रस्त हैं कि वहां पर उन्हें न्यूनतम वेतन और जीवन के लिए जरूरी उपयुक्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनकी वीजा संबंधी मुश्किलों को कम करने में भी मदद करनी होगी। विदेश में रोजगार की प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर देना होगा, ताकि भारतीय कामगारों को बेईमान बिचौलियों और शोषक रोजगारदाताओं से बचाया जा सके। कुछ देशों में भारतीय कामगारों को अभी भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
प्रवासी भारतीयों को भारत में पर्यटन के लिए उत्साहित करने पर अधिक ध्यान देना होगा, ताकि वे स्वदेश के प्रति अपनी निकटता बढ़ा सकें। हम उम्मीद करें कि जिस तरह प्रवासी चीनियों ने तकरीबन तीन दशक पहले अपनी कमाई हुई दौलत चीन में लगाकर चीन की चमकीली तस्वीर बनाने और उसे समृद्ध करने में अहम अहम भूमिका निभाई है, वैसी ही भूमिका अब प्रवासी भारतीयों की होगी। इसी भूमिका को देखते हुए भारतीय प्रवासी अपने ज्ञान और कौशल की शक्ति से भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय समाज को आगे बढ़ाने में अपना अमूल्य योगदान देने की दिशा में सक्रिय हैं।
(लेखक एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, इंदौर के निदेशक हैं)
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