सम्पादकीय

ओमीक्रॉन बीएफ.7 ने बढ़ाई चिंता, भारत में आ सकती है कोविड की चौथी लहर?

Triveni
25 Dec 2022 6:13 AM GMT
ओमीक्रॉन बीएफ.7 ने बढ़ाई चिंता, भारत में आ सकती है कोविड की चौथी लहर?
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फाइल फोटो 

चीन में कोविड की अब तक की सबसे बड़ी लहर फैल रही है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | चीन में कोविड की अब तक की सबसे बड़ी लहर फैल रही है। लगभग तीन सालों तक, चीन ने कड़े उपायों और कठोर प्रतिबंधों से - 'शून्य कोविड की रणनीति' अपनाई हुई थी। हालांकि ओमीक्रॉन वैरिएंट के आने के बाद, पिछले एक साल में यह बात साफ हो चुकी थी कि शून्य कोविड रणनीति कोविड के खिलाफ कारगर नहीं है और कई देशों ने इसे छोड़ दिया था, लेकिन चीन की सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही। इसके तहत कोविड का एक भी मरीज मिलने पर गंभीर प्रतिबंध और लॉकडाउन लगा दिए जाते रहे।

थक हारकर, जो लोग सरकार की सभी नीतियों का बिना किसी सवाल के पालन करते हैं, वे भी विरोध प्रदर्शन करने लगे। नागरिकों के विरोध और कुछ हिंसक प्रदर्शनों के बाद चीन की सरकार ने दिसंबर की शुरुआत में शून्य कोविड नीति को अचानक छोड़ दिया।
लगभग 35 महीनों तक शून्य-कोविड रणनीति का परिणाम यह हुआ कि लोगों को प्राकृतिक संक्रमण के माध्यम से प्रतिरक्षा विकसित नहीं हुई। दूसरा, हालांकि चीन ने आबादी के एक बड़े हिस्से का टीकाकरण कर लिया; लेकिन वहां लगाए गए टीके कम प्रभावकारी हैं। तीसरा, चीन ने करीब दो साल पहले कोविड-19 टीकाकरण की शुरुआत की थी और उसे तेज गति से पूरा किया, इसलिए टीके लगे हुए भी लंबा समय हो गया। चौथा, टीके से प्रेरित प्रतिरक्षा प्राकृतिक संक्रमण के बाद विकसित प्रतिरक्षा की तुलना में कम समय टिकती है।
ऐसे में, दिसंबर 2022 की शुरुआत में, जब चीन ने शून्य-कोविड रणनीति त्यागी और प्रतिबंधों में अचानक छूट दी, तो वहां पर संक्रमण का फैलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। साथ ही, चीन में कोविड फैलने से सारी दुनिया में चिंता फैल गई है। इसकी एक मुख्य वजह यह है कि चीन में क्या हो रहा है, इसकी विश्वसनीय जानकारी नहीं मिलती है।
महामारी विज्ञान से हम जानते हैं कि चीन में कोविड की लहर तो फैलेगी, लेकिन चूंकि उन्हें वैक्सीन लगी हुई है (कम प्रभावकारी ही सही), इसलिए, गंभीर बीमारी की आशंका तुलनात्मक रूप से कम है। फिर भी, कोविड वैश्विक महामारी है और ऐसे में दुनिया के किसी भी हिस्से में कोविड के उछाल पर हर अन्य देश को ध्यान देना चाहिए, भारत को भी। लेकिन, कई कारण हैं कि हमें भारत में चिंतित होने की बिलकुल जरूरत नहीं है। आइए, इसे समझते हैं।
कोविड महामारी के तीन साल बाद, कोई भी दो देश तुलनीय नहीं हैं। ऐसा प्राकृतिक संक्रमण की दर में अंतर, टीके की प्रभावकारिता और कवरेज में अंतर, और इस बात में अंतर कि टीके प्राकृतिक संक्रमण के पहले लगे थे या बाद में, साथ ही यह कि टीके लगने के बाद कितना समय बीत गया है, के कारण है।
चीन के विपरीत, भारत में उच्च प्राकृतिक संक्रमण (तीन चुनौती भरी लहरों के बाद), तुलनात्मक उच्च प्रभावकारिता वाले टीकों के साथ उच्च वयस्क टीका कवरेज, और 'हाइब्रिड प्रतिरक्षा' (जो टीका प्रेरित प्रतिरक्षा अकेली से कहीं बेहतर होती है) जैसी स्थिति है। चीन में ओमीक्रॉन का नया स्वरूप बीएफ.7 फ़ैल रहा है। भारत में ओमीक्रॉन से तीसरी लहर आ चुकी है और बीएफ.7 करीब तीन महीने पहले से ही है। चूंकि चीन में फैल रहा वायरस नया नहीं है, इसलिए भारत में इसके फैलने की आशंका न के बराबर है।
लेकिन चीन में अभी आ रही लहर याद दिलाती है कि दुनिया का कोई भी देश वायरस के खिलाफ निगरानी को बंद नहीं कर सकता। साथ ही, अब कोई भी कदम, पुराने तरीके से नहीं, बल्कि पिछले तीन सालों की वैज्ञानिक सीखों के आधार पर उठाने चाहिए। उदाहरण के तौर पर चूंकि बीएफ.7 वैरिएंट भारत में पहले से ही है, जिसमें चीन या किसी भी देश से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध या अन्य यात्रा प्रतिबंधों की कोई भूमिका नहीं है।
चीन में कोविड मामलों के उछाल ने भारत में कुछ भी नहीं बदला है, इसलिए भारत में कोविड-19 में मास्क, फिजिकल डिस्टेंसिंग और किसी तरह के प्रतिबंध की अभी आवश्यकता नहीं है। भारत में मास्क की अनिवार्यता तार्किक नहीं होगी। स्कूल भी खुले रहने चाहिए। फिलहाल सरकार के सामने एकमात्र बड़ी चुनौती गलत सूचना से निपटना है। केंद्र सरकार को चीन और अन्य देशों में कोविड की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। इसके साथ ही राज्य और केंद्र सरकारों को जीनोमिक निगरानी और कोविड के मरीजों में लक्षणों में किसी भी तरह के बदलाव पर नजर रखनी होगी।
भारत में आम लोगों के लिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन साठ साल से अधिक के लोगों ने बूस्टर खुराक नहीं लगवाई है, तो वे लगवा लें। भारत में कोविड की चौथी लहर फिलहाल तो नहीं आने वाली है। महामारी की प्रतिक्रिया के लिए सूक्ष्म, साक्ष्य निर्देशित रणनीतियों की आवश्यकता होती है जो चल रही सीख से प्राप्त होती है।
'जो बाघ की सवारी करता है, वह उतरने से डरता है' एक प्रसिद्ध कहावत है। चीन की जीरो-कोविड रणनीति बाघ की सवारी करने जैसी थी। चीन ने जैसे ही यह नीति छोड़ी अब उन्हें नपे-तुले कदम उठाने के साथ ही प्रतिबंधों को धीरे धीरे कम करना चाहिए था। फिलहाल यह महत्वपूर्ण है कि चीन की सरकार कोविड संबंधी डाटा (मामले, मौतें और जीनोमिक निगरानी की रिपोर्ट) दुनिया के साथ साझा करे, तभी हम मिलकर महामारी से मुकाबला कर पाएंगे।
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