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बिसात भी लेकिन खेला अपनी शर्त पर
यूं ही नहीं कोई बनता पुष्कर , मैं ये बात इसलिए नहीं कहता कि पुष्कर मेरे मित्र हैं या मैं चाटुकारिता कर रहा , हालांकि सबसे ज्यादा दिक्कत सरकार और भाजपा को हमारे चैनल से ही रहती है ।
मौन मुस्कुराते देखा
खैर ये बात इसलिए कही कि पिछले 5 सालों में धीरे धीरे हमने पुष्कर को पकते हुए देखा ,तपते हुए देखा , सहते हुए देखा और खुद को गढ़ते हुए देखा , राजनीति में खुद को पुष्कर तालाब की गहराई की तरह तलहटी में रहकर ऊपर की लहरों में कंकड़ मार कर लहर उठाने वालों की कोशिश पर मौन मुस्कराते देखा ।
जब हवा अंदरूनी काले ढोंगी उड़वाते…
राजनीति की बिसात में पुष्कर को खत्म विपक्ष ( ये बात अलग कि विपक्ष को कैसे मित्र बनाकर जेब ने रखना है और कब अमित शाह की तरह विपक्ष को जेब में डालना है ) की जगह अपनी ही पार्टी के खुंदकी लोगों की शतरंजी चालों को ज्यादा झेलना पड़ता है । और वो खुंदकी बार बार हारने के बाद भी पुष्कर की गहराई नहीं पा पाते । जब वो हवा उड़ाते है कि देखिए प्रधानमंत्री उत्तराखंड के हर नेता से मिल रहे और पुष्कर को टाइम नहीं दे रहे तो पुष्कर 3 महीने में 3 बार प्रधानमंत्री से मिलने वाले पहले भाजपाई मुख्यमंत्री होते हैं । जब हवा अंदरूनी काले ढोंगी उड़वाते है कि अमित शाह जी पुष्कर से बहुत नाराज़ हैं तभी अमित शाह सरकार की उपलब्धियां गिनाने चुनावी बिगुल फूंकने पुष्कर की उपलब्धियों के साथ आ जाते हैं । जब हवा उड़ती है कि पूरा मंत्रिमंडल मुख्यमंत्री समेत ही बदला जाएगा तब हवा निकल कर पंचर साइकिल ही विरोधियों को खींचनी पड़ती है । जब सारे कयास भाग दौड़ को अफवाहों का जामा पहनाया जाता है तब पुष्कर मुस्कुराता है और जब कहा जाता है कि अब बस ऐसे ही कर जाएगा साल तो बिना सुन्न पटाक पुष्कर कर देता है कमाल और चुपचाप हो जाता है मंत्रिमंडल विस्तार ।
यहां भी पुष्कर का कौशल सामने आता है जब कहा जाता है कि मदन कौशिक निगलेक्ट हैं तो पुष्कर मदन को मंत्री बनाते हैं, गढ़वाल को साधना हो या दलित समाज ,पुष्कर की इंजीनियरिंग को अब आप परिपक्व राजनीति के रूप में समझ सकते हैं ।
उत्तराखंड में खड़ा किया तंत्र
दरअसल पुष्कर ने नरेंद्र मोदी के कदमों पर चलते हुए अमित शाह की बुद्धि लेकर उत्तराखंड में वो तंत्र खड़ा किया है जहां चुनाव की मशीनरी से लेकर जमीनी लोगों तक व्यक्तिगत जुड़ाव शामिल है । और हाइकमान को पता है कि चुनाव जिताऊ नेता पुष्कर के अलावा को हो भी नहीं सकता उत्तराखंड में जो हैट्रिक लगवाने की क्षमता रखता हो तमाम एंटी इंकमबेसी के बावजूद भी ,उसका नाम पुष्कर सिंह धामी है । तो फिर बात को समाप्त यहीं से कि यूं ही नहीं कोई बनता पुष्कर ।
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