सम्पादकीय

National Cancer Awareness Day 2020: नेशनल कैंसर ग्रिड से जागी नई उम्मीदें

Gulabi
7 Nov 2020 3:24 PM GMT
National Cancer Awareness Day 2020: नेशनल कैंसर ग्रिड से जागी नई उम्मीदें
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देश में हर साल सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। देश में हर साल सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि कैंसर के लक्षणों और उपचार के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाई जा सके। यह दिवस पहली बार 2014 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा घोषित किया गया था। वास्तव में हमारे देश की बहुसंख्यक गरीब आबादी के पास कैंसर के प्रति जागरूकता का अभाव है। इसके अलावा, हमारे यहां कैंसर के अस्पतालों की कमी तो है ही, बड़े अस्पतालों तक गरीबों की पहुंच भी बड़ी मुश्किल है।

इन तमाम कारणों से अस्पतालों में पहुंचने से पहले या आधे-अधूरे इलाज से तमाम लोगों की मौत हो जाती है। इसे देखते हुए अब केंद्र सरकार ने कैंसर के सस्ते इलाज के लिए कुछ कदम उठाए हैं। इसके लिए एक नेशनल कैंसर ग्रिड (एनसीजी) बनाया गया है। दरअसल एनसीजी देशभर के सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों का समूह है, जिसने टाटा मेमोरियल अस्पताल की मदद से 'नव्या एप' का गठन किया है। यह मरीजों और उनके तिमारदारों के दरवाजों तक विशेषज्ञों की राय और इलाज के तौर-तरीकों को पहुंचाने में मदद कर रहा है।

नेशनल कैंसर ग्रिड में देश-विदेश के 170 कैंसर अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों के डॉक्टरों ने विशेष तौर पर भारत के कैंसर मरीजों के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं। इससे एक बार डॉक्टर को दिखा लेने के बाद मरीज को बार-बार डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ेगा। इस एप में मरीज का डाटा डालकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श हासिल किया जा सकेगा। फिलहाल गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए नाव्या की सेवाएं मुफ्त हैं। अन्य मरीजों के लिए 1,500 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का संचालन करने वाली संस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) भी गरीबों के कैंसर के इलाज के लिए नाव्या एप की सेवाएं लेने की तैयारी में है।

नव्या के संस्थापक और चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. नरेश रामाराजन का मानना है कि कैंसर से अर्थव्यवस्था पर दो तरह से प्रभाव पड़ता है। एक तो मरीजों के परिवार पर और दूसरा भारत के स्वास्थ्य बजट पर। अगर परिवार का एक सदस्य भी कैंसर से पीड़ित हो जाता है तो उसके इलाज के लिए करीब 50 प्रतिशत लोग कर्ज लेते या घर बेच देते हैं। करीब तीन से पांच फीसद लोग तो इलाज की वजह से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। सरकार की ऐसी योजनाओं का अभी बहुत प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है। जरूरत इस बात की है कि इन योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए, ताकि गरीबों को कैंसर से राहत मिल सके।

द ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (1990-2016) के अनुसार भारत में महिलाओं में सबसे ज्यादा स्तन कैंसर के मामले सामने आए हैं। इस अध्ययन के अनुसार महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर, पेट का कैंसर, कोलोन एंड रेक्टम और लिप एंड कैविटी कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। गांवों और शहरों में तुलना की जाए तो गांवों से सर्वाइकल और शहरों से स्तन कैंसर के मामले ज्यादा सामने आते हैं। पूरे भारत में महिलाओं में स्तन कैंसर का मुख्य कारण देर से शादियां होना, गर्भधारण में देरी, स्तनपान कम करवाना, बढ़ता तनाव, खराब जीवनशैली और मोटापा है। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि इस समय जहां स्तन कैंसर के मामलों की संख्या 3,77,830 है, जो साल 2025 तक बढ़कर 4,27,273 हो जाएगी। वर्तमान में भारत में कैंसर के कुल मामलों में से इसका प्रतिशत 14 है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में अगले पांच वर्षो में कैंसर के मामलों की संख्या में 12 प्रतिशत की वृद्धि होगी। साल 2025 तक भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या 15.69 लाख के पार हो सकती है, जो कि इस समय 14 लाख से भी कम है। पिछले कुछ वर्षो में दिल्ली जैसे महानगरों में कम उम्र के लोगों में स्टेज फोर कैंसर की पुष्टि होने की खबरें सामने आई थीं। इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दिल्ली में बच्चों में कैंसर के मामले सामने आने की संख्या बढ़ गई है। इसमें यह भी सामने आया है कि साल 2020 में तंबाकू की वजह से कैंसर ङोल रहे लोगों की संख्या 3.7 लाख है, जो कि कुल कैंसर मरीजों का 27.1 फीसद है। जाहिर है देश में तंबाकू वह सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है, जिसकी वजह से लोग अलग-अलग तरह के कैंसर का सामना कर रहे हैं।

देश में मिजोरम का आइजोल ऐसे जिले के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां पर कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। इतना ही नहीं, पूरे एशिया में महिलाओं में फेफड़े के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले भी आइजोल में ही देखे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर से बचने के लिए तंबाकू का इस्तेमाल बिल्कुल बंद करना चाहिए, और एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना चाहिए। कैंसर के प्रति लोगों का ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना चाहिए, क्योंकि जितनी जल्दी यह बीमारी पकड़ में आएगी, इसके इलाज की संभावना भी उतनी ही अधिक बढ़ जाएगी।

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