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- सरसों के उत्पादन पर...

अधिकतर खाद्यान्न के उत्पादन में हमारा देश न केवल आत्मनिर्भरता को प्राप्त कर चुका है, अपितु वैश्विक बाजार में भी अपना दबदबा बनाये हुए है, लेकिन दलहन व तिलहन में हम दूसरे देशों पर निर्भर हैं. इसका मुख्य कारण इन फसलों के क्षेत्रफल का कम होना है. दलहनी एवं तिलहनी फसलों पर अपेक्षित शोध भी नहीं किया गया है. अब सरकार ने इस दिशा में कोशिश प्रारंभ की है. इसी पहल के तहत इन फसलों पर भी समर्थन मूल्य देने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. कृषि वैज्ञानिकों ने अपना शोध भी तसल्ली से प्रारंभ किया है. इसका लाभ भी दिखने लगा है. विगत कुछ वर्षों में तिलहन उत्पादन में काफी प्रगति हुई है. सरसों की खेती में कम लागत के साथ कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है. आजकल सरसों की खेती में किसान रुचि भी दिखा रहे हैं, क्योंकि इसमें नकदी फसलों की तरह मुनाफा होता है. आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष लगभग 21.70 किलोग्राम तेल की आवश्यकता होती है. इस मांग की पूर्ति के लिए देश को प्रतिवर्ष लगभग 33.20 मिलियन टन खाद्य तेल की जरूरत पड़ती है. देश में 2021-22 में प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोत के द्वारा लगभग 17.03 मिलियन टन तेल का उत्पादन हुआ था, जबकि 16.13 मिलियन टन आयात करना पड़ा था. इस अंतर को कम करना बहुत जरूरी है.
सोर्स: prabhatkhabar





