सम्पादकीय

Monsoon And Urban Floods : क्या मानसून से निपटने के लिए तैयार हैं हमारे बड़े शहर?

Rani Sahu
14 May 2022 12:21 PM GMT
Monsoon And Urban Floods : क्या मानसून से निपटने के लिए तैयार हैं हमारे बड़े शहर?
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बेंगलुरू, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद और मुंबई में कौन सी बात कॉमन है?

श्रीनिवास अलाविलि - बेंगलुरू, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद और मुंबई में कौन सी बात कॉमन है? ये सभी राज्यों की राजधानियां हैं? ये सभी प्रमुख आर्थिक केंद्र हैं? हेरिटेज सिटी हैं? बिलकुल यह तीनों बातें सही हैं. लेकिन एक और फैक्टर है जो इन सभी शहरों को जोड़ता है और वह है – शहरी बाढ़. इन सभी शहरों ने बाढ़ (Urban Flood)का अनुभव किया है. इनमें से कुछ शहरों को इसका बहुत ज्यादा अनुभव है और कुछ शहर इस लिस्ट में नए शामिल हुए हैं. ट्रैफिक, वायु प्रदूषण की तरह ही बाढ़ भी अब इन बड़े शहरों का हिस्सा बन गई है. ऐसा क्यों होता है और क्या किया जा सकता है?

सरल शब्दों में कहें तो शहरी बाढ़ इसलिए आती है क्योंकि बारिश के पानी को निकलने की कोई जगह नहीं होती. भारतीय अर्थव्यवस्था में आई उछाल ने हमारे शहरों को इतना पक्का कर दिया है कि हमारे शहरों के जल निकासी के मार्ग, नालियां तेजी से गायब हो रही हैं. इन नालों का एक ही काम होता है सतही बारिश के पानी को पास के झील, तालाब, नदी या समुद्र तक ले जाना. लेकिन पिछले कुछ दशकों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण की वजह से यह नाले गायब होते जा रहे हैं और जहां वे मौजूद हैं वहां बारिश के पानी को जमा करने के लिए कोई जल निकाय नहीं है क्योंकि झीलों पर भी अतिक्रमण हो रहा है.
बारिश के पानी को भूजल में मिल जाना चाहिए
कई निचले इलाकों को लेआउट में बदल दिया गया है और भोले-भाले खरीदारों को इस बात का अंदाजा तक नहीं है कि खूबसूरत तस्वीर वाले भविष्य के उनके घरों में साल के कुछ दिनों में शायद केवल नावों द्वारा ही पहुंचा जा सकेगा और उनके महंगे फर्नीचर और कारें किसी दिन पानी में तैरती दिख सकती हैं. बिल्डिंग के प्लान में उल्लंघन सभी शहरों में बड़े पैमाने पर होते हैं और उन अधिकारियों को इसका कोई परिणाम भी नहीं भुगतना पड़ता जो टोपोलॉजी और अंतर्निहित जोखिमों को अच्छी तरह से जानते हुए भी हस्ताक्षर करते हैं. बिल्डर भी इससे साफ बच निकलते है और हमेशा की तरह इसका खामियाजा घर खरीदार को उठाना पड़ता है. जो ऐसी स्थिति में फंसकर खुद को बहुत ही असहाय महसूस करते हैं.
बारिश का पानी निकलने की दूसरी जगह है जमीन. बारिश के पानी को भूजल में मिल जाना चाहिए. लेकिन हर गली, घर और अपार्टमेंट कॉम्पलेक्स को पार्किंग लॉट और खेल के मैदानों के लिए कंक्रीट का बना दिया गया है जिस वजह से बारिश का पानी सतह के ऊपर ही रहता है जमीन के नीचे नहीं जा पाता. इसका परिणाम भी साफतौर से नजर आता है जब पानी के लिए बोरवेल की गहरी खुदाई करनी पड़ती है. क्योंकि भूजल का स्तर नीचे गिर रहा है.
अन्य शहरों की तुलना में बेंगलुरु में गड्ढे बड़ी समस्या है लेकिन यह गड्ढे हर शहर में मौजूद हैं. गड्ढे क्यों बनते हैं? इसके दो कारण रोड की खराब क्वालिटी और सड़कों पर बारिश के पानी का जमा होना. पहला कारण आपके शहर में फैले भ्रष्टाचार पर निर्भर करता है और बाद वाला कंक्रीट और नालियों पर निर्भर करता है. जब कहीं जाने की जगह नहीं है तो बारिश का पानी कहां जाएगा? कहीं भी नहीं. यह पानी सड़कों पर तब तक रहता है जब तक वाष्पित न हो जाए. सरल भाषा में कहें तो सूख न जाए. जब बारिश का पानी सूख जाता है तो हर जगह हजारों गड्ढे दिखाई देने लगते हैं जैसे चांद पर गड्ढे नजर आते हैं. कुछ साल पहले गड्ढों के बारे में बात करना अजीब लगता था लेकिन अब नहीं. क्योंकि उनके कारण निर्दोष लोग मर रहे हैं और अनगिनत लोग गड्ढों के कारण हादसों में घायल हुए हैं.
क्या किया जा सकता है?
जैसा कि एक प्रसिद्ध कहावत है आप एक बार तो गलती कर सकते हैं लेकिन इसे दोहराएं नहीं. अब तक ज्यादातर लोग समझ चुके हैं कि बाढ़ क्यों आती है, कब आती है और क्या करने की जरूरत है. जल निकायों को तरफ एक बार फिर से पुनर्जीवित करें. सीवेज के प्रवाह को रोकें और सुनिश्चित करें कि सभी कनेक्टिंग ड्रेन मलबे, सीवेज और कचरे से साफ हैं. बारिश का पानी इकट्ठा करें. इसकी हर एक बूंद बहुत कीमती है. घरेलू स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रोत्साहित करें. नियमों का सख्ती से इस तरह पालन हो कि एक मिसाल बन सके. सभी गवर्नमेंट बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग हो और ऐसे कुओं का निर्माण कराया जाए जो बारिश में फिर से भर सकें.
उन सभी स्थानों का ऑडिट करें जहां हर साल बाढ़ आती है. एक तकनीकी सर्वेक्षण करें और समस्या क्षेत्रों की पहचान करें. फिर स्थानीय समुदाय की मदद से माइक्रो सॉल्यूशन डिजाइन करें. और सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहें क्योंकि हमारे अधिकांश शहरों में भारी बारिश अब एक नियमित मामला बन गया है. नियमों का उल्लंघन करने वाले रियल एस्टेट डेवलपर्स और अधिकारियों पर भारी नकद जुर्माना लगाया जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए ताकि बाकी के डेवलपर और अधिकारियों तक यह मैसेज पहुंचे.
शहरों को डोमेन एक्सपर्ट और कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट की लिस्ट बनाने की जरूरत है जो एक साथ आकर सभी स्टेकहोल्डर, खासतौर से नागरिकों को बाढ़ के कारणों और उन कदमों के बारे में बता सकें जो वे दैनिक आधार पर उठा सकते हैं भले ही जब बारिश न हो. हमें इन समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत सिस्टम की जरूरत है. इस सिस्टम में कानून, प्रक्रियाएं, निर्माण क्षमता, नागरिकों की भागीदारी शामिल है जो पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं.
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