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सम्पादकीय

मोदी सरकार के 'सरदार' अमित शाह

Gulabi
7 April 2021 4:45 PM GMT
मोदी सरकार के सरदार अमित शाह
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चुनावों में भाजपा को विजयी बनाने में माहिर गृहमंत्री अमित शाह सियासत में चाणक्य के तौर पर ताे पहले ही स्थापित हो

जनता से रिश्ता वेबडेस्क।Aditya Chopra | चुनावों में भाजपा को विजयी बनाने में माहिर गृहमंत्री अमित शाह सियासत में चाणक्य के तौर पर ताे पहले ही स्थापित हो चुके हैं। जिस राजनीतिक और रणनीतिक कौशल से उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटा कर अपनी बोल्डनेस का परिचय दिया उससे उनकी छवि एक नए लौह पुरुष के रूप में उभरी। जिन लोगों ने सियासत को करीब से देखा है उनका यही कहना है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कश्मीर मसले को अपने हाथों में लेकर 1947 में बड़ी खता कर दी थी, अगर यह मामला सरदार बल्लभ भाई पटेल के पास होता तो चंद लम्हों में कश्मीर मामला खत्म हो जाता।


सरदार पटेल के सामने क्या महाराजा हरि सिंह और क्या उनके वजीर मायने रखते थे। जिन्होंने निजाम हैदराबाद की अकड़ को आधी रात को ही पानी पिला दिया था। अमित शाह ने एक ही झटके में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त कर न केवल भाजपा के वर्ग में चले आ रहे एजैंडे को पूरा किया, वहीं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के ​लिए सुरक्षा बलों को फ्री हैंड दिया, ​उसके सकारात्मक परिणाम नजर आने लगे हैं। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर के निकट नक्सलियों ने मुठभेड़ में 22 जवानों को मार गिराया।

गृहमंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल में इस हमले की सूचना मिली तो उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से फोन पर बातचीत की और चुनावी दौरा छोड़ कर दिल्ली आ गए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की और दूसरे दिन ही उन्होंने राज्य का दौरा किया। उन्होंने सीआरपीएफ कैम्प जाकर जवानों से मुलाकात की और उनकी हौसला अफजाई की। उन्होंने जवानों के साथ बैठकर भोजन भी किया। उन्होंने अस्पताल जाकर घायल जवानों से मुलाकात भी की। गृहमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उन्होंने बीजापुर की जमीन पर खड़े होकर नक्सलियों को चेतावनी दे डाली कि जो लोग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है लेकिन अगर उन्होंने हथियार नहीं छोड़े तो फिर सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, हम इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। अमित शाह ने जवानों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाया है। गृहमंत्री की चेतावनी से नक्सलियों के खिलाफ किसी बड़े एक्शन के संकेत मिले हैं। अब नक्सलियों पर निर्णायक प्रहार की तैयारी है।

देश को वर्षों बाद ऐसा गृहमंत्री मिला है जो किसी भी स्थिति में तेजी से कार्रवाई करते हैं। गृहमंत्री का पद प्रधानमंत्री के बाद सबसे शक्तिशाली पद होता है। इस पद पर रहते हुए सम्पूर्ण भारत के अन्दर सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही देश को एक सूत्र में बांधने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी होती है। गृहमंत्री का दायित्व होता है कि वह राज्य सरकार से सामंजस्य बैठाते हुए घटना पर त्वरित कार्यवाही करे जिससे माहौल पर नियंत्रण किया जा सके। नक्सली हमले के बाद अमित शाह ने गृहमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सामंजस्य स्थापित किया और उन्होंने नक्सलियाें से लड़ाई में हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। गृहमंत्री ने देश को दिखा दिया कि राजनीति में वैचारिक मतभिन्नता हो सकती है लेकिन नक्सलवाद से लड़ाई में हम सभी एकजुट हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जवानों का मनोबल बढ़ाने के ​लिए दीवाली की रात सीमा क्षेत्रों में जाकर जवानों के साथ दीवाली मनाते हैं। देश पहले 32 गृहमंत्री देख चुका है। इस पद पर बल्लभ भाई पटेल, सी. राजगोपालचारी, गोविन्द बल्लभ पंत, लाल बहादुर शास्त्री भी रहे, जिन्होंने इस पद की प्रतिष्ठा को बनाए रखा लेकिन एक दौर ऐसा भी आया जब इस पद की प्रतिष्ठा को आंच पहुंचाई गई। मुफ्ती मुहम्मद सैयद ने वी.पी. सिंह शासन काल में गृह मंत्रालय सम्भाला तो उनकी बेटी रुबिया का जम्मू-कश्मीर के आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया। रुबिया की रिहाई की एवज में आतंकवादियों को छोड़ दिया गया। इस अपहरण कांड को आतंकवादियों की रिहाई के लिए नाटक करार दिया गया था। बूटा सिंह का अपना इतिहास रहा। मुम्बई में हुए 26/11 अटैक के समय तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल के कपड़ों ने भी खूब चर्चाएं बटोरी थीं। आतंकी हमले के समय गृह मंत्रालय में बुलाई गई आपात बैठक में वे देर से इसलिए पहुंचे थे क्युकी वे सूट बदलने में व्यस्त थे। उन्हें बार-बार बाल संवारने, दिन में पांच बार कपड़े बदलने आैर सफेद जूते पहनने का शाेक था। वे अपने कार्यालय में एक बाबा की वभूति भी रखते थे। दिल्ली में ​सीरियल बम धमाकों में पूरे महानगर में तबाही का आलम था तब भी शिवराज पाटिल का पूरा ध्यान अपने सूट-बूूट पर था। दिल्ली रो रही थी तब पाटिल ने एक नहीं बल्कि तीन जोड़ी कपड़े बदल डाले थे। मैं यहां इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि लोगों की यादाश्त बड़ी कमजोर होती है जो यह तथ्य भुला देती है कि ब्लास्ट की दिल दहला देने वाली घटनाओं के बावजूद शिवराज पाटिल जैसे गृहमंत्री को अपने सूट-बूट की चिंता रहती थी। वहीं अमित शाह जैसे लौह पुरुष गृहमंत्री भी हैं जो जवानों की शहादत को सलाम करने के ​लिए बीजापुर जाते हैैं, इसे नैतिकता, कर्त्तव्यपरायण्यता और मानवीय नजीर कहते हैं, जो उन गृहमंत्रियों में नहीं जिनका उल्लेख इस कलम से करना पड़ा। इसीलिए अमित शाह सबसे अलग महान और अतुलनीय हैं।

अमित शाह भाजपा संगठन की खामियों को दूर कर जेम्सबांड की भूमिका में नजर आए तो कभी मृदुभाषी राजनेता के रूप में नजर आए, जो परायों को भी अपना बना लेते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए बेस्ट हासिल करने में उनका कोई सानी नहीं। चुनाव प्रबंधन में माहिर अमित शाह ने संगठन में ऐसी जान फूंकी कि भाजपा का विस्तार होता ही गया। वे होटलों की बजाय कार्यकर्ताओं के बीच रहना पसंद करते हैं। पांच राज्यों के चुनाव में अमित शाह ने विजय हासिल करने के लिए दिन-रात एक कर रखा है।

राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए देश को ऐसे ही गृहमंत्री की जरूरत थी। अब भाजपा का एक मात्र एजैंडा 'कामन सिविल कोड' ही बचा है। भाजपा के लिए कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं माना जा सकता क्योंकि राजनीति की दिशा अब बदल चुकी है। अमित शाह, नरेन्द्र मोदी सरकार के 'सरदार पटेल' बन चुके हैं।


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