सम्पादकीय

फिर पलायन को मजबूर प्रवासी मजदूर

Subhi
8 April 2021 5:21 AM GMT
फिर पलायन को मजबूर प्रवासी मजदूर
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देश में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। बुधवार को दूसरी बार कोरोना के नए मामले आंकड़ा पार कर गए।

आदित्य नारायण चोपड़ा: देश में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। बुधवार को दूसरी बार कोरोना के नए मामले आंकड़ा पार कर गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अगले चार सप्ताह काफी खतरनाक होंगे। यदि कोरोना के संक्रमण की रफ्तार नहीं रुकी तो हालात फिर पिछले वर्ष जैसे हो जाएंगे। अमेरिका के बाद भारत दूसरा ऐसा देश बन गया है, ​जहां एक दिन में एक लाख से अधिक संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। राजधानी दिल्ली में बढ़ते मामलों को देखते हुए रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। सबसे चिंताजनक पहलु यह है कि महाराष्ट्र और दिल्ली से फिर मजदूरों का पलायन शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं। महाराष्ट्र के रेलवे स्टेशनों पर प्रवासी मजदूरों की भीड़ नजर आने लगी है।

महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, पंजाब के हालात देखकर तो पलायन का संकट दोबारा उत्पन्न होने की आशंकाएं जोर पकड़ने लगी हैं। पिछले वर्ष जो तस्वीरें हमने देखी थीं, वे फिर से दिमाग में उतरने लगी हैं। लॉकडाउन के चलते जब यातायात सेवाएं ठप्प हो गई थीं तो प्रतिबंधों के चलते मजदूर पैदल ही हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घरों को लौटने शुरू हो गए थे। मजदूरों के पलायन की ऐसी ​तस्वीरें सामने आई थीं जिन्होंने मन को झकझोर दिया था। कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसमे एक व्यक्ति बैल के साथ खुद बैलगाड़ी को खींच रहा था और ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसमें दिल्ली से महोबा के लिए निकले मजदूर के परिवार में शा​मिला बच्चा जब पैदल चलता-चलता थक गया तो वह सूटकेस पर ही सो गया और उसकी मां सूटकेस खींचते हुए ​दिखी थी। कई मजदूरों की घर लौटते समय मृत्यु हो गई। इन तस्वीरों ने महामारी के दौरान व्यवस्था और श्रमिकों की लाचारगी पर बहुत से सवाल खड़े कर दिए थे। विभाजन के बाद भारत में हुआ यह सबसे बड़ा विस्थापन था। सिर पर बैग रखे, कमर पर बच्चों को टिकाए, यही जीवन भर की कमाई लेकर मजदूर शहरों से गांव लौट रहे थे तो प्रख्यात कवि और गीतकार गुलजार ने एक सामयिक कविता लिखी थी-



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