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सम्पादकीय: हिमाचली लोकसाहित्य में लोक देवी-देवताओं के स्तुति मंत्र

Gulabi
5 Sep 2021 4:44 AM GMT
सम्पादकीय: हिमाचली लोकसाहित्य में लोक देवी-देवताओं के स्तुति मंत्र
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देवी-देवताओं के स्तुति मंत्र

दिव्याहिमाचल.

हिमाचली लोकसाहित्य में देवी-देवताओं की स्तुति का अपना अलग-अलग विधि-विधान है। बात चाहे पूजा-अर्चना की हो या रोग निवारण की, और तो और घर में कलह-कलेश व अपराशक्तियों के प्रभाव को दूर करने के लिए भी लोग देवी-देवताओं, चेलों और योगियों का सहारा लेते हैं। इसके अलावा पशुओं के रखरखाव में भी देवपूजन अहम माना जाता है। हिमाचली लोकसाहित्य में थान, मड़ी, पंचपीरी और अन्य देवताओं के पूजन स्थल भी लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। कई लोक गायकों, साहित्यकारों और लेखकों ने लोक देवी-देवताओं की स्तुतियों व मंत्रों का बखान किया है और ये सब बातें हिमाचली लोगों के जनजीवन का हिस्सा हैं। हिमाचली लोकसाहित्य में देवी-देवताओं के स्तुति मंत्रों में भोलेनाथ, गोरखनाथ, गूगा, अजियापाल, नृसिंह, अर्जन-सर्जन, क्यालू महाराज, दियोट सिद्ध, कालिया व दुधिया नाग, लखदाता, देवियों में काली, मल माता, काछला, वाछला, बुई, वामणी, कुलेहा आदि की कारकें शामिल हैं जिन्हें गायन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यहां कुछ उदाहरण शामिल किए गए हैं, जैसे दियोटसिद्ध की कारकें : 'चलदे नी पले, बाबा रमते पले, चलदे पले सिद्ध योगी। लौंगां-लाचियां धूनिया लाइयां, सिद्ध बेई जांदे आसनां लाई।।
बिन खेले नी जांदे सिद्ध बांबरिया। लौंगां-लाचियां दियां धूनियां सिद्ध बाबा।। अजियापाल की कारक : 'तेरिया अका पर्वत कम्बै, शेषनाग कम्बै पाताला। पताला छत्तरधारी राजै।। मल माता की कारक : 'वणा-वाडिय़ां दी चली मल राणी। आसनां ते वौंदी मेरी मल।। केड़ी दिशा दी चली मल। केड़ी दिशा जो जाणा।। काली माता की कारक : 'काली-काली महाकाली, गौड़ बंगाले दी चली महाकाली। आसनां ते वौहदीं मेरी काली, काली-काली महाकाली।। नागणी माता की कारक : 'सत भैणां होइयां नागणियां, असां हुण होइयां मुटियारां। असां हुण सैरा जो जाणा, सत भैणां होइयां नागणियां।। गूगा जाहरवीर की कारक : 'गूगा चौहान चलेया छत्तर, घोड़ सवारी गूगा चलेया। गौड़ बंगाले ते चलेया गूगा, हार श्रंृगारे बैठा आसन लाई।। क्यालू बाबे दी कारक : 'गौड़ बंगाले दियां चलियां न योगणा। क्यालू बाबे लेइयां न टाई।।
सिद्ध-योगियों के अनुसार अपराशक्तियों के निवारण के समय जब किसी देवता की न चले तो मामा पहाडि़ए का स्तुतिगान किया जाता है। मामा पहाडि़ए की कारक गाकर व्यक्ति की परेशानी या समस्या को दूर किया जाता है। इसके बोल इस प्रकार हैं : 'जली-वली जायां मेरा मंगल दियाड़ा। पैणा दे वीर बिछोड़ें। बताया जाता है कि थान के बीच विराजमान मामा पहाडिय़ा उस कुल में सुख-शांति व समृद्धि कायम रखता है। ये सभी कारकें लोगों का विश्वास ही है, जिसे वे सहज ही अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं। बदलते समय के साथ इनके संरक्षण की जरूरत है।

कपिल मेहरा, मो.-9816412261

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