सम्पादकीय

मान की चुनौतियां

Subhi
17 March 2022 3:39 AM GMT
मान की चुनौतियां
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पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद पहले संक्षिप्त भाषण में उन वादों को पूरा करने का भरोसा दिया है जो चुनाव घोषणापत्र में किए गए थे।

Written by जनसत्ता: पंजाब के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद पहले संक्षिप्त भाषण में उन वादों को पूरा करने का भरोसा दिया है जो चुनाव घोषणापत्र में किए गए थे। मान ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नशाखोरी से निजात दिलाने और किसानों की समस्याएं हल करने की बात कही है। हालांकि यह भी सब जानते हैं कि इन सारे मोर्चों पर एक साथ काम करना किसी भी सरकार के लिए अब आसान नहीं, क्योंकि पंजाब बदहाल हो चुका है। पर पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को जैसा छप्पर फाड़ जनादेश दिया है, उससे साफ है कि लोगों की उम्मीदें अभी बाकी हैं। जनता को लग रहा है कि अब ऐसी पार्टी सत्ता में आई है जिसमें उसकी भी आवाज सुनी जाएगी।

इसलिए मान सरकार के लिए चुनौतियां तो जरूर हैं, पर कोई भी लक्ष्य हासिल कर पाना असंभव नहीं है। सरकार भले सारे वादे पूरे न कर सके, लेकिन अगर इनमें से थोड़ा भी काम होता दिखा तो यह सरकार और जनता दोनों के लिए किसी बड़े हासिल से कम नहीं होगा। गौरतलब है कि पंजाब की जनता लंबे समय से राजनीतिक दलों के छल का शिकार होती रही है। पूर्ववर्ती सरकारें अपनी अंंदरूनी राजनीति और कलह से जूझते हुए अपने हित साधती रहीं। इसलिए इस बार पंजाब की जनता ने बड़े बदलाव का फैसला करते हुए आम आदमी पार्टी को शासन चलाने का मौका दिया।

चिंता की बात यह है कि पंजाब की माली हालत खस्ता है। सरकार पर इस समय करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज है, जो राज्य की जीडीपी का आधे से ज्यादा यानी छप्पन फीसद है। वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार को अपने कुल राजस्व का चौवन फीसद हिस्सा सिर्फ कर्जों का ब्याज चुकाने पर ही खर्च करना पड़ा था। सवाल है कि अगर पैसा नहीं होगा तो विकास के काम कैसे होंगे? फिर आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले जनता को दिल्ली की तरह मुफ्त बिजली-पानी और महिलाओं को एक-एक हजार रुपए देने जैसी लुभावनी घोषणाएं भी कर डाली हैं।

वे कैसे पूरी होंगी? यानी नई सरकार को इन तमाम खर्चों के लिए पैसे जुटाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। राज्य में नया निवेश लाना होगा। चिंता की बात यह भी है कि पिछले दो दशक में पंजाब में प्रति व्यक्ति आय काफी घट गई है और इस मामले में पंजाब खिसक कर देश में उन्नीसवें स्थान पर आ गया है। जाहिर है, लोगों के पास काम-धंधे का संकट गहराता जा रहा है। आमद है नहीं। लोग रोजगार के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। इसलिए बेरोजगारी से निपटने के लिए सरकार को कुछ ठोस करके दिखाना होगा।

पंजाब देश का सबसे संवेदनशील सीमांत राज्य है। हालांकि राज्य में अब आतंकवाद की समस्या नहीं है, पर वैसी ही गंभीर समस्या नशे के कारोबार की खड़ी हो गई है। राज्य नशीले पदार्थों की तस्करी का गढ़ बन गया है। हर तीन में से एक घर में नशे ने पांव जमा रखे हैं। यह गंभीर स्थिति है। ऐसे में नौजवानों को नशे के चंगुल से सरकार कैसे बचाएगी, अब यह देखना होगा। शराब माफिया और रेत-बजरी माफिया भी कम बड़े संकट नहीं हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आम आदमी पार्टी के लिए किसी पूर्ण राज्य की सरकार चलाने का यह पहला अनुभव होगा। पंजाब की स्थिति हर तरह से दिल्ली से अलग है। इसलिए मान की जिम्मेदारियां और चुनौतियां भी कहीं ज्यादा बड़ी हैं, जिन पर उन्हें खरा उतर कर दिखाना होगा।


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