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स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले देशों में एक है
स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले देशों में एक है। यहां ऐसे नौजवानों की बड़ी संख्या है, जो एक अपार्टमेंट किराए पर ले सकने लायक नहीं कमा पा रहे हैँ। तो अब स्पेन सरकार ने ऐसे युवाओं को हर महीने ढाई सौ यूरो की आर्थिक मदद देने का फैसला किया है।
इस समय स्पेन में हो रहे एक प्रयोग पर दुनिया भर की नजर है। इसलिए कि स्पेन की सोशलिस्ट सरकार ने ये प्रयोग उस समस्या का मुकाबला करने के लिए शुरू किया है, जिससे दुनिया के ज्यादातर देश जूझ रहे हैँ। ये समस्या है- बेरोजगारी। स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले देशों में एक है। यहां ऐसे नौजवानों की बड़ी संख्या है, जो एक अपार्टमेंट किराए पर ले सकने लायक नहीं कमा पा रहे हैँ। तो अब स्पेन की सरकार ने कम आय वाले युवाओं की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए उन्हें हर महीने ढाई सौ यूरो देने का फैसला किया है। इसी हफ्ते सरकार ने कहा कि इस महीने की शुरुआत से 35 साल से कम उम्र के ऐसे स्पेनवासियों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनकी सालाना आय 24,318 यूरो से कम है। वे अगले दो साल तक किसी अपार्टमेंट का किराया चुकाने के लिए सरकार से सब्सिडी ले सकते हैं। सरकार ने स्वीरकार किया है कि यह सब्सिडी बेहद अहम है। फिर भी उसका कहना है कि इस योजना का मकसद किराए पर अपार्टमेंट लेने में नौजवानों की मदद करना है।
स्पेन यूरोप के उन देशों में से एक है, जहां युवाओं की एक बड़ी संख्या माता-पिता के साथ रहती है। साल 2020 के आंकड़े बताते हैं कि 25 से 29 साल के 55 फीसदी से ज्यादा युवा अपने माता-पिता के साथ एक ही घर में रहते हैं। इसकी तुलना साल 2013 में जारी हुए आंकड़ों से करें, तो ऐसे युवाओं की संख्या साढ़े छह फीसदी बढ़ी है। इसका बढ़ती बेरोजगारी से भी सीधा संबंध है। स्पेन में 25 साल से कम उम्र के 29 फीसदी युवा आज ऐसे हैं, जिनके पास कोई काम नहीं है। इस साल के आरंभ में सरकार ने कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कोविड रिकवरी फंड से सामाजिक मकानों के निर्माण के लिए एक अरब यूरो खर्च करने की घोषणा की थी। ये मकान बेघरों को उपलब्ध कराए जाएंगे। ये बात आम तौर पर मानी जा रही है कि सरकार के सब्सिडी देने से युवाओं की अपार्टमेंट न ले पाने की समस्या हल नहीं होगी। मुमकिन है कि इससे उन लोगों में असंतोष पैदा हो, जो आय की सीमा के ऊपर होने की वजह से ये लाभ नहीं पा सकेंगे। बहरहाल, दुनिया यह देखना चाहती है कि ऐसे प्रयोगों का जमीनी असर क्या होता है।
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