सम्पादकीय

जानिए राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सूचना तंत्र की मजबूती के लिए क्‍या कर रही केंद्र सरकार

Gulabi
14 Jan 2022 5:23 PM GMT
जानिए राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सूचना तंत्र की मजबूती के लिए क्‍या कर रही केंद्र सरकार
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मजबूत आसूचना तंत्र जिसे हम खुफिया सूचना तंत्र भी कहते हैं
विवेक ओझा। मजबूत आसूचना तंत्र जिसे हम खुफिया सूचना तंत्र भी कहते हैं, उसके बिना राष्ट्रीय सुरक्षा या आंतरिक सुरक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती है। शायद यही कारण है कि हाल ही में केंद्र सरकार को इस बात की जरूरत समझ में आई है कि राज्यों को कहा जाए कि वे भारत के इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत काम करने वाले कामन काउंटर टेरोरिज्म ग्रिड जिसे हम मल्टी एजेंसी सेंटर के नाम से जानते हैं, उसके साथ अधिक से अधिक खुफिया जानकारी साझा करे। हाल ही में गृह मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय बैठक में देश के गृहमंत्री द्वारा राज्यों के डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस से कहा गया है कि वे आतंकवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी ख़ुफिया जानकारी को मल्टी एजेंसी सेंटर के साथ साझा करें। वर्तमान में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रा), सशस्त्र बलों और राज्य पुलिस सहित 28 संगठन मल्टी एजेंसी सेंटर को रियल टाइम बेसिस पर इंटेलिजेंस इनपुट्स दे रहे हैं और अब गृह मंत्रालय ने इस तंत्र को और मजबूती देने की ठानी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिसके जरिये सुरक्षा के मुद्दों पर संघीय समन्वय की तलाश की जा रही है। चूंकि लोक व्यवस्था या कानून और व्यवस्था राज्य सूची का विषय है और वर्तमान में भारत के कुछ राज्य वैचारिक, राजनीतिक, दलगत और अन्य स्तरों पर केंद्र सरकार से खुली प्रतिस्पर्धा करने की मंशा से ग्रस्त दिखाई देते हैं। ऐसे में उन राज्यों में आतंकी गतिविधियों, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की रोकथाम के लिए राज्यों को सुरक्षा के प्रकरण पर सहयोगी संघवाद की भावना से जोडऩे की जरूरत दिखाई देती है। जम्मू कश्मीर, केरल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में जिस तरह से इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन से जुड़े आतंकी सक्रिय हो रहे हैं, उसे देखते हुए काउंटर टेररिज्म इंटेलिजेंस ग्रिड को राज्यों के सहयोग से अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। पूर्वोत्तर भारत में आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए भी मल्टी एजेंसी सेंटर की भूमिका को अधिक धार देने की जरूरत समझ में आती है।
आज पूर्वोत्तर भारत में जिस तरह से उग्रवादी संगठन आतंकवादी विचारधारा से संचालित हो रहे हैं और नार्को व साइबर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, जिस तरह सुरक्षा, सशस्त्र बलों के वाहनों को निशाना बना रहे हैं, एक राज्य की सीमा से दूसरे राज्य में आतंकी व उग्रवादी अपनी पहुंच किस प्रकार बना रहे हैं, उनकी फंडिंग के नए स्रोत क्या हैं, आतंकियों की भर्ती के नए तरीके कौन से सामने आ रहे हैं, इस उद्देश्य के लिए किन वर्गों या समूहों को लक्षित समूह के रूप में आतंकी संगठन देख रहे हैं, उनके कौन कौन से नए गठजोड़ विकसित हो रहे हैं, इन सब बातों की रियल टाइम पर मिलने वाली खुफिया जानकारी ही भारत के विधि प्रवर्तनकारी निकायों, सुरक्षा बलों को इस बात के लिए सक्षम बनाएगी कि वे आतंकी अभियानों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई समय रहते कर सकें। हाल के समय में जैसे यह खुफिया जानकारी भारत के आसूचना अभिकरणों ने दी है कि पाकिस्तान महिला आतंकियों और तस्करों को सीमा पार कराते हुए भारत भेज रहा है और ऐसी महिलाओं से जाली मुद्रा की तस्करी को अंजाम दिलाने की कोशिश की जा रही है। भारत के अर्धसैनिक बल बीएसएफ को जैसे ही इस बात की सूचना मिली तो बीते माह जम्मू-कश्मीर में उसने एक महिला घुसपैठिए को मार गिराया। माना जा रहा है कि पाकिस्तान अब महिलाओं को ढाल बनाकर भेज रहा है, ताकि उनके पीछे आतंकी बच सकें।
मल्टी एजेंसी सेंटर : आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मैक यानी मल्टी एजेंसी सेंटर का गठन वर्ष 2001 में किया गया था। इसका कार्य शुरू में कारगिल युद्ध के बाद आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित प्राप्त सूचना को दैनिक आधार पर साझा करना था। विभिन्न राज्यों की सहायक मल्टी एजेंसी सेंटरों में आसूचना या ख़ुफिया जानकारी के प्रयासों को साझा करने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल किए गए थे। मल्टी एजेंसी सेंटर देश के विभिन्न आसूचना अभिकरणों जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, वित्तीय खुफिया इकाई, राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के आसूचना अभिकरणों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों सहित कई एजेंसियों के साथ आसूचना इनपुट साझा करता है। साथ ही यह अभिकरण भी मैक के साथ आतंकवाद और देश की आंतरिक सुरक्षा से संबंधित सूचना को साझा करते हैं। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित एसमैक (सब्सिडियरी मल्टी एजेंसी सेंटर्स) के साथ भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगातार और रीयल टाइम में सूचना साझा की जाती है।
आज जरूरत इस बात की है कि जिस प्रकार भारत सरकार ने एनआइए को धीरे धीरे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर संगठित स्तर पर मजबूत बनाया और आतंकवाद से निपटने के लिए उसके कार्यक्षेत्र और अधिकार क्षेत्र दोनों को बढ़ा दिया तथा कुछ राज्यों के इस मुद्दे पर विरोध का शमन करते हुए एनआइए की वैधता को संघीय स्तर पर सिद्ध कराने में सफलता पायी, ठीक उसी तरह मैक को भी आसूचना तंत्र की मजबूती के लिए सशक्त किया जाना चाहिए। इस कड़ी में भारत सरकार को कोस्टल इंटेलिजेंस, वाइल्ड लाइफ इंटेलिजेंस, इकोनामिक इंटेलिजेंस तंत्र को विशेष मजबूती देनी की जरूरत है, ताकि सही समय पर अराजक तत्वों का निदान संभव हो सके।
नैटग्रिड : देश में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (सी-मैक) के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। इसी प्रकार हाल में भारत सरकार द्वारा यह संकेत भी दिया गया है कि नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नैटग्रिड) को भी जल्द ही कार्यरूप दिया जाएगा जिससे राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों, आतंकियों, माओवादियों, नक्सलियों, तस्करों और अन्य अपराधियों की सभी संदिग्ध गतिविधियों की रियल टाइम स्तर पर निगरानी की जा सकेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में ही संकेत दिया था कि नैटग्रिड को जल्द ही शुरू किया जा सकता है। इसकी अवधारणा यह है कि आतंकवादियों को लेकर सूचनाओं का एक सुरक्षित डाटाबेस हो। देश के गृह मंत्री ने पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) के पिछले वर्ष सितंबर में हुए 51वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोरोना महामारी जनित आपदा नहीं आई होती तो प्रधानमंत्री नैटग्रिड देश को समर्पित कर चुके होते। यह नैटग्रिड आतंकवाद, आर्थिक अपराध आदि घटनाओं की जानकारी को सहज और सुरक्षित डाटाबेस के रूप में रख सकने में सक्षम होगा। इसके जरिये संदिग्धों को आसानी से रियल टाइम ट्रैक किया जा सकता है और आतंकी हमलों को रोका जा सकता है। गृह मंत्रालय द्वारा यह दावा किया गया है कि इससे इमिग्रेशन, बैंकिंग, हवाई और रेल यात्रा अधिक सुरक्षित हो सकेगी।
वर्ष 2008 में मुंबई हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों के पास रियल टाइम पर महत्वपूर्ण जानकारी के लिए कोई साधन नहीं था। उसके बाद से नैटग्रिड जैसे किसी साधन की जरूरत महसूस की जा रही थी। आरंभ में 10 यूजर एजेंसी और 21 सेवा प्रदाताओं को नैटग्रिड से जोड़े जाने का प्लान है और बाद के चरणों में करीब 950 संगठनों को इससे जोड़ा जाएगा। इन डाटा सोर्सेज में इमिग्रेशन, वित्तीय लेनदेन, संचार आदि शामिल हैं। आयकर विभाग नैटग्रिड के तहत इन तमाम जांच और खुफिया एजेंसियों के साथ पैन और बैंक के डिटेल्स साझा करेगा।
सेंट्रल मानिटरिंग सिस्टम (सीएमएस) और नेटवर्क ट्रैफिक एनालिसिस (नेत्र) दो अन्य सर्विलांस सिस्टम हैं जिनके जरिये राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की निगरानी करने की मंशा केंद्र सरकार की है। ऐसे निगरानी तंत्रों के सक्रिय होने पर जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बड़े लाभ मिल सकते हैं, वहीं दूसरी ओर इन पर निजता के अधिकार के हनन, संघीय ढांचे के तहत राज्यों के अधिकारों के हनन का आरोप भी लगाया जाता है, लेकिन देश का गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर अपना दृष्टिकोण साफ कर चुका है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अमेरिका से भरपूर सहयोग की अपेक्षा
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच आंतरिक सुरक्षा डायलाग के तहत बढ़ते आतंकवाद को काउंटर करने, साइबर सुरक्षा और दूसरे मुद्दों पर एक-दूसरे के सहयोग को लेकर चर्चा की गई। दोनों देशों ने काउंटर टेररिज्म, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा, समुद्री, हवाई और व्यापार सुरक्षा को लेकर मौजूदा सहयोग की समीक्षा की और इसे बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की। इस वर्चुअल मीटिंग में भारत के गृह सचिव अजय भल्ला और अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अंडर सेक्रेटरी राबर्ट सिल्वर्स समेत दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि होमलैंड सिक्योरिटी डायलाग के तहत कानून प्रवर्तन, ग्लोबल सप्लाई चेन की सुरक्षा, हवाई सुरक्षा, खोजी सहयोग पर मौजूदा सभी समूह आने वाले समय में अलग-अलग बैठक करेंगे। इस साल दोनों देशों में मंत्री-स्तरीय होमलैंड सिक्योरिटी डायलाग होने की भी संभावना है। यह डायलाग दोनों देशों के बीच सबसे पहले मई 2011 में ओबामा प्रशासन में शुरू हुआ था। दूसरा भारत-अमेरिका आंतरिक सुरक्षा संवाद 2013 में वाशिंगटन डीसी में हुआ था। इस डायलाग को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बंद करवा दिया था और पिछले साल दोनों देश इसे फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे। भारत में 2019 में होमलैंड सिक्योरिटी सम्मेलन भी आयोजित किया गया था और स्मार्ट पुलिसिंग पुरस्कार भी वितरित किए गए थे। आयोजन के दौरान उग्रवाद रोधी, बाल सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, अपराध जांच और अभियोजन, साइबर अपराध प्रबंधन, मानव तस्करी, सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन, स्मार्ट पुलिस स्टेशन, निगरानी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, महिला सुरक्षा और अन्य पुलिस पहल के क्षेत्रों में काम करने के लिए अधिकारियों को 35 स्मार्ट पुलिसिंग पुरस्कार दिए गए। भारत और इजरायल केप्रतिरक्षा संबंधों को भी मजबूती दोनों देशों के मध्य हुए होमलैंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट से मिली है। उल्लेखनीय है कि इस समझौते के तहत सीमापार आतंकवाद से निपटने, आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने, अपराध नियंत्रण और निरोध तथा पुलिस आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर बल दिया जाता है।
(लेखक आंतरिक सुरक्षा मामलों के जानकार हैं)
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