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काबुल की गुहार

Triveni
5 Aug 2021 1:00 AM GMT
काबुल की गुहार
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तालिबानी आतंकवाद से जूझ रही अफगान सरकार की भारत से उम्मीद जायज है और जरूरी भी।

तालिबानी आतंकवाद से जूझ रही अफगान सरकार की भारत से उम्मीद जायज है और जरूरी भी। अफगानिस्तान सरकार भारत से हमेशा मदद हासिल करती रही है, पर इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान ने भारत से जो मदद मांगी है, वह बड़ी उल्लेखनीय है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ अत्मार ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को फोन करके संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की गुजारिश की है। बेशक, यह बैठक महत्वपूर्ण होगी और इसके लिए भारत को विशेष प्रयास करने चाहिए। गौरतलब है, अगस्त महीने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अध्यक्षता एक तरह से भारत के पास है। भारत इस स्थिति में है कि वह अफगानिस्तान मामले पर आपात बैठक बुलाने की कोशिश कर सकता है। आज अफगानिस्तान जिस मोड़ पर है, बहुत जरूरी है कि दुनिया बैठकर एक बार विचार करे। अफगानिस्तान को फिर धर्मांध हिंसा के दलदल में झोंक देना है या अफगानियों को भी चैन से सांस लेने का हक है? भारत को अमेरिका व अन्य देशों को राजी करना चाहिए, ताकि अफगानियों को एक शांत व सुरक्षित भविष्य नसीब हो सके। अफगानिस्तान में अगर निरंकुशता बढ़ी, तो आतंकवाद दुनिया के लिए फिर बड़ा खतरा बनकर मंडराने लगेगा।

वैसे अफगानिस्तान को लेकर भारत संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पूरी तरह सचेत व सक्रिय है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कहा है कि अफगानिस्तान की स्थिति सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों के लिए गहरी चिंता का विषय है। हम अफगानिस्तान में आतंकी शिविरों को फिर पनपने नहीं दे सकते और इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा। वाकई पूरी दुनिया देख रही है कि अफगानिस्तान में अभी क्या हो रहा है। पत्रकारों ने जब तिरुमूर्ति से पूछा कि हिंसा में वृद्धि रोकने के लिए सुरक्षा परिषद क्या कर सकती है, तब तिरुमूर्ति ने कहा कि उम्मीद है, सुरक्षा परिषद अफगानिस्तान के संबंध में इस पहलू पर जल्द गौर करेगी। भारत के इस रुख के कारण ही काबुल की भारत से उम्मीदें बढ़ गई हैं।
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह एक स्वतंत्र, शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और स्थिर अफगानिस्तान देखना चाहता है। साथ ही, भारत ने अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हर प्रयास का समर्थन किया है। यह पूरी दुनिया के लिए गंभीरता से विचार करने का समय है। लंबी लड़ाई से थककर अमेरिका भले ही अपना दामन छुड़ाकर चला गया हो, पर बाकी दुनिया को तालिबान के सामने घुटने नहीं टेकने चाहिए। यह अफगानिस्तान की वैध सरकार और प्रशासन के साथ खडे़ होने का वक्त है। अफगानिस्तान के समंगन और हेलमंद प्रांत में सुरक्षा बलों की हवाई कार्रवाई में तालिबान के एक शीर्ष कमांडर समेत 116 आतंकी मारे गए हैं। देश का कानून न मानने वाले आतंकी समूहों के साथ ऐसा ही होना चाहिए। तालिबानी हिंसा रोकने के लिए अफगानी सेना ने कमर कस लिए हैं और वह लगभग रोजाना हवाई व जमीनी कार्रवाई में आतंकवादियों का खात्मा कर रही है। संयुक्त राष्ट्र को व्यवस्थित ढंग से उस काम को पूरा करना चाहिए, जो अमेरिका नहीं कर पाया। अगर अफगानी सेना व सरकार के हाथ मजबूत किए जाएं, तो वह आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने में वाकई सक्षम हो सकती है।


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